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कोरोना महामारी से ठीक होने के बाद तीन महीने अहम
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फरीदाबाद (धनंजय चौहान)। कोरोना महामारी को मात देकर स्वस्थ हो चुके मरीजों के लिए तीन माह बेहद अहम हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इस दौरान खानपान और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। क्योंकि अस्पताल और दवाओं के बाद भी अपनी सेहत अपने हाथ में है। कोरोना संक्रमण का असर न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
संक्रमित होने पर लोगों के मन में तरह-तरह ख्याल आने लगते है। संक्रमित व्यक्ति अक्सर इन बातों के साथ मन ही मन जूझता है। कोरोना से ठीक होने के बाद भी उसे दोबारा संक्रमित होने का डर बना रहता है। इससे व्यक्ति के अवसादग्रस्त होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। वहीं कुछ लोग ठीक होने के बाद लापरवाही बरतने लगते हैं। बाहर का खानपान, शराब का सेवन आदि करना शुरू कर देते हैं। ऐसे लोगों के दोबारा संक्रमित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। हाल ही में कोरोना से ठीक होने के बाद ग्रेटर फरीदाबाद में एक युवक की मौत हो गई थी। डॉक्टर ने मौत की वजह लापरवाही को बताया है।
केस हिस्ट्री-: 1
एनआईटी एक नंबर निवासी 36 वर्षीय दिनेश नागर ने बताया कि उन्हें 13 जून में पता चला कि वो कोविड पॉजिटिव हैं, उनके लक्षण गंभीर थे। इसलिए उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। 14 दिन इलाज के बाद जब दोबारा जांच करवाई तो एक बार फिर रिपोर्ट पॉजिटिव आई। कई दिनों के इलाज के बाद वो पूरी तरह ठीक हो गए। इसके बाद भी उन्हें थकान, कमजोरी, सांस फूलना और ठीक से नींद न आने जैसे समस्याएं होने लगी। इसके बाद लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहा। डॉक्टर द्वारा बताई गई डाइट ली, अब स्वस्थ हूं।
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केस हिस्ट्री-: 2
सेक्टर-21 निवासी रमेश वर्मा ने बताया कि उन्हें 19 सितंबर को कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई। इसके बाद उन्होंने खुद को होम आइसोलेट कर दिया। डॉक्टर की देखरेख में इलाज चलता रहा। एक दिन घर पर अचानक तबीयत खराब हो गई। मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इस दौरान तीन दिन तक वेंटिलेटर पर रहा। इसके बाद आठ अक्तूबर को मेरी रिपोर्ट निगेटिव आ गई और दो दिन बाद मैं डिस्चार्ज हो गया, मगर इसके बाद भी मुझे थकान और कमजोरी महसूस होने लगी और चक्कर आने लगे। मुझे सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होने लगी थी और जल्दी गुस्सा आ जाता था। मुझे वेंटिलेटर पर रहने की वजह से डरावने सपने आ रहे थे। डॉक्टर ने बताया कि यह प्रक्रिया का हिस्सा है, और यह ठीक हो जाएगा। इसके बाद लगातार डॉक्टर के संपर्क में हूं।
स्वच्छ भोजन करें, स्वस्थ रहें
एनआईटी तीन स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के रजिस्ट्रार डॉ. अनिल पांडेय ने कहा कि कोरोना से ठीक होने के बाद एंटीबॉडी बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसलिए व्यक्ति को स्वच्छ भोजन करना चाहिए। घर पर बना भोजन करें तो ज्यादा अच्छा होता है। बाहर के भोजन में तेल, मसाले ज्यादा होते हैं। इनका सेवन करने से बचना चाहिए। धूम्रपान और शराब के सेवन से दूर रहें।
नियमित रूप से करें व्यायाम
फोर्टिस एस्कोर्ट अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग निदेशक डॉ. रोहित गुप्ता ने कहा कि कोरोना महामारी का असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी काफी पड़ा है। लोग अब अपनी सेहत का विशेष ख्याल रख रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ कोरोना काल में नौकरी जाने की वजह से लोगों में अवसाद और तनाव की शिकायतें बढ़ी हैं। कोरोना काल में आत्महत्या की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। तनाव एक मानसिक विकार है जो व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर कर देता है। समय पर जांच से डिप्रेशन से बचा जा सकता है। इसके साथ ही नियमित रूप से योग और व्यायाम करें।
अपने से रखें अपना ख्याल
सेक्टर-16ए स्थित मेट्रो अस्पताल स्वास्थ्य निदेशक डॉ. नीरज जैन ने बताया कि कोरोना से ठीक होने के बाद दो से तीन महीने काफी अहम होते है। क्योंकि कोरोना होने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ठीक होने पर भी पहले जैसी चीजें नहीं रहती। इसलिए रोजाना ताजा भोजन खाएं। सुबह के नाश्ते में फल आदि को सेवन ज्यादा करें। खुद का ख्याल रखेंगे तभी स्वस्थ रह पाएंगे, अस्पताल के भरोसे नहीं।
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संक्रमित होने पर लोगों के मन में तरह-तरह ख्याल आने लगते है। संक्रमित व्यक्ति अक्सर इन बातों के साथ मन ही मन जूझता है। कोरोना से ठीक होने के बाद भी उसे दोबारा संक्रमित होने का डर बना रहता है। इससे व्यक्ति के अवसादग्रस्त होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। वहीं कुछ लोग ठीक होने के बाद लापरवाही बरतने लगते हैं। बाहर का खानपान, शराब का सेवन आदि करना शुरू कर देते हैं। ऐसे लोगों के दोबारा संक्रमित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। हाल ही में कोरोना से ठीक होने के बाद ग्रेटर फरीदाबाद में एक युवक की मौत हो गई थी। डॉक्टर ने मौत की वजह लापरवाही को बताया है।
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केस हिस्ट्री-: 1
एनआईटी एक नंबर निवासी 36 वर्षीय दिनेश नागर ने बताया कि उन्हें 13 जून में पता चला कि वो कोविड पॉजिटिव हैं, उनके लक्षण गंभीर थे। इसलिए उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। 14 दिन इलाज के बाद जब दोबारा जांच करवाई तो एक बार फिर रिपोर्ट पॉजिटिव आई। कई दिनों के इलाज के बाद वो पूरी तरह ठीक हो गए। इसके बाद भी उन्हें थकान, कमजोरी, सांस फूलना और ठीक से नींद न आने जैसे समस्याएं होने लगी। इसके बाद लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहा। डॉक्टर द्वारा बताई गई डाइट ली, अब स्वस्थ हूं।
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केस हिस्ट्री-: 2
सेक्टर-21 निवासी रमेश वर्मा ने बताया कि उन्हें 19 सितंबर को कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई। इसके बाद उन्होंने खुद को होम आइसोलेट कर दिया। डॉक्टर की देखरेख में इलाज चलता रहा। एक दिन घर पर अचानक तबीयत खराब हो गई। मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इस दौरान तीन दिन तक वेंटिलेटर पर रहा। इसके बाद आठ अक्तूबर को मेरी रिपोर्ट निगेटिव आ गई और दो दिन बाद मैं डिस्चार्ज हो गया, मगर इसके बाद भी मुझे थकान और कमजोरी महसूस होने लगी और चक्कर आने लगे। मुझे सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होने लगी थी और जल्दी गुस्सा आ जाता था। मुझे वेंटिलेटर पर रहने की वजह से डरावने सपने आ रहे थे। डॉक्टर ने बताया कि यह प्रक्रिया का हिस्सा है, और यह ठीक हो जाएगा। इसके बाद लगातार डॉक्टर के संपर्क में हूं।
स्वच्छ भोजन करें, स्वस्थ रहें
एनआईटी तीन स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के रजिस्ट्रार डॉ. अनिल पांडेय ने कहा कि कोरोना से ठीक होने के बाद एंटीबॉडी बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसलिए व्यक्ति को स्वच्छ भोजन करना चाहिए। घर पर बना भोजन करें तो ज्यादा अच्छा होता है। बाहर के भोजन में तेल, मसाले ज्यादा होते हैं। इनका सेवन करने से बचना चाहिए। धूम्रपान और शराब के सेवन से दूर रहें।
नियमित रूप से करें व्यायाम
फोर्टिस एस्कोर्ट अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग निदेशक डॉ. रोहित गुप्ता ने कहा कि कोरोना महामारी का असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी काफी पड़ा है। लोग अब अपनी सेहत का विशेष ख्याल रख रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ कोरोना काल में नौकरी जाने की वजह से लोगों में अवसाद और तनाव की शिकायतें बढ़ी हैं। कोरोना काल में आत्महत्या की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। तनाव एक मानसिक विकार है जो व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर कर देता है। समय पर जांच से डिप्रेशन से बचा जा सकता है। इसके साथ ही नियमित रूप से योग और व्यायाम करें।
अपने से रखें अपना ख्याल
सेक्टर-16ए स्थित मेट्रो अस्पताल स्वास्थ्य निदेशक डॉ. नीरज जैन ने बताया कि कोरोना से ठीक होने के बाद दो से तीन महीने काफी अहम होते है। क्योंकि कोरोना होने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ठीक होने पर भी पहले जैसी चीजें नहीं रहती। इसलिए रोजाना ताजा भोजन खाएं। सुबह के नाश्ते में फल आदि को सेवन ज्यादा करें। खुद का ख्याल रखेंगे तभी स्वस्थ रह पाएंगे, अस्पताल के भरोसे नहीं।