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टीका न व्यवस्था, कोरोना हुआ तो तीसरी लहर में आएगी परेशानी

Wed, 16 Jun 2021 11:10 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 16 Jun 2021 11:10 PM IST
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If there is no vaccine system, then there will be trouble in the third wave
फरीदाबाद। कोरोना संक्रमण की परेशानी किसी से छिपी नहीं है। कुछ दिन पहले तक हर घर में लोग सांसों की लड़ाई लड़ी। टीकाकरण को बढ़ावा देकर तीसरी लहर को आने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के साथ हो रही लापरवाही फिर से संक्रमण को बढ़ावा दे सकती है। यह तीसरी लहर को खुला न्यौता न हो सकता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए टीकाकरण की अभी तक कोई सुविधा नहीं है और सबसे अधिक डर भी इसी वर्ग के लिए है।
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बुधवार को बीके सिविल अस्पताल में ओपीडी कक्ष से लेकर अल्ट्रासाउंड केंद्र तक गर्भवती महिलाओं पर सिविल अस्पताल का कुप्रबंधन हावी दिखा। पहले यह महिलाएं डॉक्टर को दिखाने के लिए बिना सामाजिक दूरी के लाइन में लगकर पंजीकरण कराने को मजबूर हैं। फिर ओपीडी कक्ष में घंटों तक इंतजार करने की मजबूरी उनकी परेशानी को बढ़ावा दे रही है। इसके बाद अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर घंटों इंतजार एक दूसरे के पास होकर बैठना पड़ रहा है। बुधवार को कुछ महिलाएं स्वास्थ्य कर्मियों से भिड़ गई। हालांकि बहस के बाद माहौल शांत हो गया। आरोप था कि न उनके लिए कोई टीका है न अस्पताल में इलाज का कोई प्रबंधन ऐसे में वह सीधे कोरोना की चपेट में आ सकती हैं। इस और कोई भी ध्यान नहीं दे रहा।
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कोई सुने तो हो समय पर जांच...
बीके सिविल अस्पताल की स्त्री रोग जांच के लिए ओपीडी में करीब 150 महिलाएं पहुंची। इस दौरान दोपहर 1 बजे तक कई लोग अपनी बारी का इंतजार करती रहीं। कुछ महिलाओं का आरोप था कि सुबह नौ बजे से वह ओपीडी कक्ष में बैठी हैं, लेकिन डॉक्टर को दिखाने के लिए नंबर नहीं आया। करीब दस गर्भवती भर्ती होने के लिए इंतजार में दिखीं। तीन माह की गर्भवती सुशीला ने बताया कि वह एनआईटी निवासी है। करीब पांच घंटे इंतजार के बाद भी वह ओपीडी में अपनी बारी का इंतजार करती रही। दोपहर करीब एक बजे वह डॉक्टर से मिलकर दवा काउंटर पर पहुंची थी।
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अल्ट्रासाउंड कर्मी बोले, एक डॉक्टर-एक ही केंद्र तो करें क्या...
बुधवार दोपहर अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर करीब 35 गर्भवती अपनी बारी का इंतजार करती दिखी। आरोप था कि वह सुबह से अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं, अल्ट्रासाउंड कक्ष में कोई उनकी सुनने वाला नहीं है। कक्ष में जांच करने वाले डॉ. अहलावत ने बताया कि एक ही केंद्र में महिलाओं का अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। वह सुबह नौ बजे से महिलाओं की लगातार जांच कर रहे हैं। सुबह नौ से साढ़े 11 बजे तक काफी संख्या में महिलाओं का अल्ट्रासाउंड कर चुके हैं। इससे अधिक वह कुछ नहीं कर सकते।
वर्जन-
कोरोना संक्रमण का डर है, लेकिन गर्भावस्था में जांच कराना मजबूरी। अस्पताल में संक्रमण के लिहाज से गर्भवतियों के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। ओपीडी कक्ष में तीन घंटे इंतजार के बाद अल्ट्रासाउंड सेंटर तक पहुंचे। यहां तीन घंटे इंतजार के बाद भी जांच की कोई उम्मीद नहीं आती। केंद्र के अंदर बैठी महिला कर्मी का कहना है कि 35 लोगों के बाद जांच के लिए समय बचा तो जांच होगी नहीं तो लौट जाना। दूसरे दिन आना पड़ा तो और परेशानी झेलनी पड़ेगी। - ममता, तीन माह की गर्भवती
गांव जाजरू से यहां जांच के लिए पहुंची हूं। सुबह से जांच के लिए धक्के खा रही हूं। अल्ट्रासाउंट के लिए परेशान हूं। नंबर कब आएगा पता नहीं। आगे बुलाया जाता है, तो आने में परेशानी होती है। पहले ही स्वास्थ्य के कारण परेशान हूं। - अन्नू, जाजरू
संक्रमण से डर लगता है। गर्भ में पल रहे बच्चे को संक्रमण न हो जाए, इसका डर सता रहा है। डरती हूं कि मुझे कोरोना हुआ तो बच्चे पर असर न हो। दूसरी लहर में घर से नहीं निकले। अब तीन माह का गर्भ है तो जांच के लिए कहा गया है। छह घंटे से अल्ट्रासाउंड के लिए इंतजार में हूं। - सुजाता, तीन माह गर्भवती

सावधानी जरूरी है। स्टाफ की कमी है। ऐसे में थोड़ा सा संयम व सहयोग जरूरी है। स्टाफ को लगातार सतर्कता के साथ लोगों के इलाज के लिए हिदायत दी है। - डॉ. सविता यादव, पीएमओ
फोटो 28 से 34, कृप्या ओपीडी में खड़ी महिला और अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर खड़ी गर्भवतियों की फोटो लगाएँ
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