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Faridabad News: पांच माह की बच्ची की मौत पर मानवाधिकार आयोग सख्त

Wed, 15 Jul 2026 12:04 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jul 2026 12:04 AM IST
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Human Rights Commission takes a tough stance on the death of a five-month-old baby girl.
ईएसआई मेडिकल कॉलेज और बीके अस्पताल से तलब की रिपोर्ट
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इलाज में लापरवाही और रेफर करने के आरोपों पर लिया संज्ञान
मामले की सुनवाई 14 सितंबर को गुरुग्राम स्थित कैंप कोर्ट में होगी


संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। ईएसआई मेडिकल कॉलेज और बीके नागरिक अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद पांच माह की बच्ची की मौत के मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है। आयोग ने मामले में उपचार में लापरवाही के आरोपों पर संज्ञान लेते हुए ईएसआई मेडिकल कॉलेज (एनएच-3) के निदेशक और फरीदाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

आयोग ने दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई 14 सितंबर को गुरुग्राम स्थित कैंप कोर्ट में होगी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 17 मई को पांच माह की बच्ची को ईएसआई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, लेकिन वहां वेंटिलेटर पर शिफ्ट करने के बजाय बीके नागरिक अस्पताल रेफर कर दिया गया। इसके बाद बच्ची को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा गया, जहां ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई।
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येह है पूरा मामला

एनआईटी कपड़ा कॉलोनी निवासी जितेंद्र यादव और उसकी पत्नी बबली देवी अपनी पांच माह की बेटी को गंभीर हालत में ईएसआई अस्पताल लेकर पहुंचे थे। बच्ची कई दिनों से मां का दूध नहीं पी रही थी। परिजनों का आरोप है कि ईएसआई अस्पताल में पर्याप्त इलाज नहीं मिला और उसे बीके नागरिक अस्पताल भेज दिया गया। वहां भी आवश्यक सुविधा और बेड उपलब्ध न होने की बात कहकर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिजनों का कहना है कि उन्होंने पैनल के निजी अस्पताल में रेफर करने का आग्रह भी किया, लेकिन चिकित्सकों ने मना कर दिया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एंबुलेंस से सफदरजंग ले जाते समय बच्ची ने रास्ते में दम तोड़ दिया। शिकायत में दोनों अस्पतालों के चिकित्सकों पर समय पर उचित उपचार उपलब्ध न कराने का आरोप लगाया गया है।
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रेफरल व्यवस्था पर पहले भी उठते रहे सवाल

जिले में गंभीर मरीजों को इलाज के बजाय रेफर किए जाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। 15 मार्च 2026 को घायल फैज अहमद की नागरिक अस्पताल में कागजी कार्रवाई और रेफर करने में देरी के दौरान मौत हो गई थी। अगस्त 2025 में सरस्वती कॉलोनी के एक नवजात की भी रेफर किए जाने के बाद मौत हो गई थी। उस मामले में अस्पताल के तीन कर्मचारियों पर केस दर्ज हुआ था। रेफर मुक्त फरीदाबाद संघर्ष समिति ने इस व्यवस्था के विरोध में 294 दिन तक बीके अस्पताल के बाहर धरना दिया था।


स्वास्थ्य मंत्री ने बीके अस्पताल को रेफर मुक्त करने का किया दावा
जिले में बीते सोमवार को लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक आयोजित हुई थी। इसकी अध्यक्षता राज्य की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने की। बैठक में कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। इसी दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने बीके नागरिक अस्पताल को एक वर्ष के भीतर रेफर मुक्त बनाने का दावा किया। हालांकि जिले के समाज सेवियों का कहना है कि सरकार पहले भी इस तरह के दावे कर चुकी है, लेकिन अभी तक जमीन पर कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है।
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