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Faridabad News: अरावली के रक्षकों को मिलेगी हाईटेक ढाल, धौज में बनेगा प्रदेश का पहला वाइल्डलाइफ रिसर्च सेंटर

Fri, 20 Mar 2026 01:08 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 20 Mar 2026 01:08 AM IST
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High-tech shield to meet Aravali guardians, state's first wildlife research center to be built in Dhauj
वन्यजीवों की निगरानी, संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए तैयार हुआ प्रस्ताव
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। अरावली की पहाड़ियों में बढ़ते शहरी दबाव के बीच वन्यजीवों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। जिले के धौज क्षेत्र में हरियाणा का पहला वाइल्डलाइफ मॉनिटरिंग एंड रिसर्च सेंटर स्थापित करने की योजना तैयार की गई है। वन विभाग ने इसका विस्तृत प्रस्ताव बनाकर सरकार को मंजूरी के लिए भेज दिया है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलते ही अरावली क्षेत्र में वन्यजीवों की वैज्ञानिक निगरानी, शोध और संरक्षण का काम व्यवस्थित तरीके से शुरू हो सकेगा।

धौज और आसपास का रिजर्व फॉरेस्ट अरावली पर्वतमाला का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में यहां तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, सियार, नीलगाय सहित कई वन्यजीवों की सक्रियता बढ़ी है। दूसरी ओर लगातार बढ़ते निर्माण कार्य और शहरी विस्तार के कारण जंगल का दायरा प्रभावित हुआ है, जिससे कई बार वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ जाते हैं। विभाग का मानना है कि प्रस्तावित रिसर्च सेंटर बनने के बाद इन घटनाओं को रोकने में काफी मदद मिलेगी।
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मिलेगा वैज्ञानिक डाटा

अरावली क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या, उनके मूवमेंट और प्राकृतिक आवास को लेकर अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक डाटा उपलब्ध नहीं है। विभाग को कई बार सूचना मिलने पर ही मौके पर टीम भेजनी पड़ती है, जिससे समय भी लगता है और जोखिम भी बढ़ जाता है। रिसर्च सेंटर बनने के बाद नियमित निगरानी और अध्ययन के आधार पर वन्यजीवों के व्यवहार को समझा जा सकेगा और उसी के अनुसार संरक्षण की योजना बनाई जाएगी।
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हाईटेक तकनीक से होगी निगरानी

प्रस्तावित सेंटर को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाएगा। जंगल के अलग-अलग हिस्सों में कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे जिनसे चौबीस घंटे वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर कुछ जानवरों को रेडियो कॉलर या जीपीएस डिवाइस से ट्रैक किया जाएगा ताकि उनकी आवाजाही की सटीक जानकारी मिल सके। इसके साथ ही जीआईएस मैपिंग के जरिए यह भी देखा जाएगा कि किस क्षेत्र में जंगल घट रहा है और कहां वन्यजीव ज्यादा समय बिताते हैं।

बचाव कार्य में मिलेगी मदद

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तेंदुआ या अन्य वन्यजीवों के गांव या फार्महाउस की ओर आने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। कई बार सूचना देर से मिलने के कारण लोगों में डर फैल जाता है। यदि सेंटर के माध्यम से पहले से ही जानवरों की लोकेशन का पता चल जाएगा तो बचाव दल समय रहते पहुंच सकेगा और किसी भी तरह के हादसे को रोका जा सकेगा। इससे रेस्क्यू ऑपरेशन भी अधिक सुरक्षित और तेज हो पाएगा।



अधिकारियों की राय

वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, धौज क्षेत्र में रिसर्च सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव काफी समय से विचाराधीन था और अब इसे अंतिम रूप देकर मंजूरी के लिए भेजा गया है। सेंटर बनने के बाद अरावली क्षेत्र में संरक्षण का काम अनुमान के बजाय वैज्ञानिक आधार पर किया जा सकेगा।
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