फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   Heart patients will get state-of-the-art treatment in the new year

नए वर्ष में दिल के रोगियों को मिलेगा अत्याधुनिक इलाज

Thu, 17 Dec 2020 10:35 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 17 Dec 2020 10:35 PM IST
विज्ञापन
Heart patients will get state-of-the-art treatment in the new year
फरीदाबाद (संजय शिशौदिया)। दिल की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए अब निजी अस्पतालों की भाग-दौड़ नहीं करने पड़ेगी। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में विश्वस्तरीय कैथलैब (हार्ट सेंटर) खोलने की योजना परवान चढ़ने लगी है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से दो कैथलैब बनाए जाने के लिए टेंडर जारी किए गए हैं। सिंगापुर की तर्ज पर बनने वाली इन दो कैथलैब के निर्माण पर करीब 20 से 25 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इससे हर माह करीब छह सौ ह्दय रोगियों को लाभ मिलेगा। नए साल की पहली तिमाही के दौरान ही दोनों कैथलैब में दिल का इलाज मिलना शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन

फरीदाबाद जिले में करीब 6.5 लाख ईएसआई कार्डधारक हैं। इनमें से दिल, कैंसर, दिमाग और किडनी संबंधी बीमारियों से ग्रस्त लोगों को सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं के लिए निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस दौरान मरीजों को कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। दो अस्पतालों के बीच भागदौड़ से जहां समय ज्यादा लगता है, वहीं रोगियों की जान जाने का खतरा भी बढ़ जाता है। निजी अस्पतालों में ईएसआई के मरीजों से व्यवहार भी ठीक नहीं किया जाता। ऐसे कई मामले पहले सामने आ चुके हैं। इन परेशानियों को देखते हुए कॉलेज प्रबंधन ने अस्पताल परिसर में हार्ट सेंटर शुरू करने की योजना बनाई है।
विज्ञापन

जिले में हर महीने ढाई हजार मरीजों का होता है दिल का इलाज
एनआईटी-3 स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में हर महीने औसतन करीब 600 सौ ह्दय रोगी इलाज के लिए पहुंचते हैं। नागरिक अस्पताल बीके हार्ट सेंटर में करीब 500 से 700 और निजी अस्पतालों में करीब 12 सौ मरीज पहुंचते हैं। ईएसआईसी में कैथलैब न होने के कारण गंभीर मरीजों को ईएसआई के तहत आने वाले निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। निजी अस्पतालों में एक मरीज की एंजियोप्लाटी (स्टंट डालना) पर भी एक से डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है। हालांकि, यह खर्च ईएसआईसी वहन करता है। ऐसे में ईएसआईसी द्वारा निजी अस्पतालों को हर महीने तीन से चार करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सिंगापुर की तर्ज पर मिलेगी सुविधा:
एनआईटी तीन स्थित ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज में स्थापित होने वाली कैथलैब दिल्ली एम्स और सिंगापुर की तर्ज पर स्थापित की जाएगी। यहां एंजियोप्लास्टी और एंजियोग्राफी, हृदय की पूरी जांच, स्टंट व पेस मेकर भी डलवा सकेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, मार्च 2021 तक कैथ लैब मरीजों के लिए शुरू कर दी जाएगी।
तीसरे तल पर बनेंगी
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के तीसरे तल पर अत्याधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण ऑपरेशन थियेटर है। इसके लिए तीसरे तल पर ही कैथ लैब को विकसित किए जाने की योजना है।
सिंगापुर और जर्मनी से मंगाई जांएगी मशीनें
एम्स की तर्ज पर कैथलैब स्थापित करने के लिए मशीनें सिंगापुर और जर्मनी से मंगाई जाएंगी। अत्याधुनिक तकनीक से लैस मशीनों से ह्दय के ऑपरेशन करने में काफी सहायता मिलेगी। इसके साथ ही अस्पताल में ओपन हार्ट सर्जरी भी शुरू की जाएगी।
रेफरल व्यवस्था होगी बंद
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के अधिकारी ने बताया कि कैथ लैब नहीं होने के कारण प्रत्येक महीने 50 से 60 मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर किया जाता है। इससे ईएसआईसी पर आर्थिक बोझ पढ़ता है। मेडिकल कॉलेज में कैथलैब शुरू होने के बाद मरीजों के रेफरल बंद कर दिया जाएगा।

दिल के मरीजों की परेशानी जल्द होगी दूर
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कैथलैब बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। कैथलैब और हार्ट सेंटर शुरू होने के बाद मरीजों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलने लगेगी।
- डॉ. असीम दास, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed