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Faridabad News: हार्ट अटैक से युवाओं की मौतें बढ़ीं, प्रदेश में चौथे स्थान पर पलवल

Mon, 06 Apr 2026 12:17 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 06 Apr 2026 12:17 AM IST
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Heart attack deaths among young people have increased, Palwal ranks fourth in the state
2020 से 2026 के बीच 1539 युवकों की हार्ट अटैक से हुई मौत
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संवाद न्यूज एजेंसी

पलवल। जिले में हृदय रोग से पीड़ित मरीजों, खासकर युवाओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। कोरोना काल के बाद से हार्ट अटैक और हार्ट फेल से होने वाली मौतों में तेजी आई है, जिसने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
इसके बावजूद जमीनी स्तर पर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं नाकाफी बनी हुई हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों में दिल की बीमारियों के इलाज के लिए कोई विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं है। जिसके कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। हरियाणा सरकार द्वारा विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार साल 2020 से जनवरी 2026 तक जिले में 1539 युवाओं की मौत हार्ट अटैक और हार्ट फेल से हो चुकी है। वर्ष 2020 में यह संख्या 196 थी, जो 2025 तक बढ़कर 286 पहुंच गई। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2026 के जनवरी महीने में ही 37 युवाओं की मौत दिल की बीमारी से हो चुकी है। इस मामले में पलवल जिला पूरे प्रदेश में चौथे स्थान पर है।
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गौरतलब है कि जिले के 200 बेड वाले सबसे बड़े जिला नागरिक अस्पताल में भी हृदय रोग के इलाज की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। हार्ट अटैक जैसी आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। जिला अस्पताल में सुविधाएं न होने के कारण मरीजों को नूंह के नल्हड़ मेडिकल कॉलेज, फरीदाबाद के बादशाह खान अस्पताल या फिर दिल्ली और गुरुग्राम के निजी अस्पतालों में रेफर किया जाता है। इस देरी के कारण कई बार मरीज की जान बचाना मुश्किल हो जाता है।
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हार्ट सेंटर की परियोजना कागजों में अटकी

जिले में हृदय रोगियों के बेहतर इलाज के लिए सात वर्ष पहले जिला नागरिक अस्पताल परिसर में पीपीपी मॉडल के तहत हार्ट सेंटर बनाने की योजना बनाई गई थी। इस सेंटर में एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, टीएनटी, स्टेंट डालने और अन्य जांचों की सुविधा शुरू की जानी थी। आधुनिक मशीनों और उपकरणों से लैस यह सेंटर मरीजों को निजी अस्पतालों जैसी सेवाएं सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने वाला था। आज तक यह योजना केवल कागजों में ही अटकी हुई है।

विशेषज्ञों की कमी से ओपीडी हुई बंद

इतना ही नहीं, कुछ वर्ष पहले जिला नागरिक अस्पताल में शुरू की गई कार्डियोलॉजी ओपीडी भी विशेषज्ञ डॉक्टर के पद रिक्त होने के कारण बंद हो गई। इस ओपीडी में हर सप्ताह करीब 50 मरीज उपचार के लिए पहुंचते थे। ओपीडी बंद होने से अब मरीजों को निजी अस्पतालों में भारी खर्च उठाना पड़ रहा है।



वर्जन

जिले में युवाओं में बढ़ती दिल की बीमारियां चिंता का विषय है। हार्ट सेंटर की योजना को पहले स्वीकृति नहीं मिल पाई थी लेकिन अब इसे दोबारा मुख्यालय भेजा जाएगा। साथ ही ओपीडी दोबारा शुरू करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर के पद को भरने के लिए भी पत्राचार किया जाएगा। -डॉ. सतिन्द्र वशिष्ठ, जिला सिविल सर्जन
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