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Faridabad News: खुले में प्रसव मामले पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग सख्त

Sat, 30 May 2026 12:17 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 30 May 2026 12:17 AM IST
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Haryana Human Rights Commission strict on open delivery issue
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट
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गर्भवती महिला की सरकारी अस्पताल परिसर के बाहर हुई थी डिलीवरी


संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। सेक्टर-3 स्थित सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में गर्भवती महिला की अस्पताल परिसर के बाहर खुले में डिलीवरी होने के मामले को हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने इसे मानव गरिमा, स्वास्थ्य अधिकार और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में गंभीर लापरवाही का मामला मानते हुए स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी।



आयोग के समक्ष प्रस्तुत शिकायत और समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार 15-16 मई 2026 की रात प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला को सेक्टर-3 पीएचसी लाया गया था। आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर मुख्य गेट बंद मिला और इमरजेंसी वार्ड में तत्काल कोई चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं थी। परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को तलाशने की कोशिश की, लेकिन समय पर सहायता नहीं मिलने के कारण महिला की डिलीवरी अस्पताल परिसर के बाहर पार्किंग क्षेत्र में करानी पड़ी।
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टॉर्च की रोशनी में हुई डिलीवरी



समाचार रिपोर्टों में दावा किया गया है कि डिलीवरी और उससे जुड़ी प्रक्रियाएं टॉर्च की रोशनी में खुले स्थान पर की गईं। परिजनों को खुद व्हीलचेयर की व्यवस्था करनी पड़ी और काफी देर तक मेडिकल स्टाफ का इंतजार करना पड़ा। आयोग ने समाचार पत्रों में प्रकाशित तस्वीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्थिति बेहद चिंताजनक और अमानवीय प्रतीत होती है।
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हरियाणा मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस ललित बत्रा ने अपने आदेश में कहा कि एक ओर राज्य सरकार जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके) के तहत सभी सरकारी अस्पतालों में निशुल्क और सुरक्षित प्रसव सेवाओं का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को समय पर संस्थागत चिकित्सा सुविधा नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है।



आयोग ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की विफलता है बल्कि महिला और नवजात के जीवन, गरिमा और स्वास्थ्य अधिकारों का उल्लंघन भी है।


आयोग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य विभाग, महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा, सिविल सर्जन फरीदाबाद और पीएचसी सेक्टर-3 के प्रभारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में अस्पताल में रात के समय डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता, ड्यूटी रोस्टर, आपातकालीन सेवाओं की स्थिति और घटना के बाद की गई कार्रवाई की जानकारी देने को कहा गया है।




मुआवजे पर भी मांगा जवाब



आयोग ने सिविल सर्जन फरीदाबाद को यह भी निर्देश दिए हैं कि वह स्पष्ट करें कि गर्भवती महिला को जेएसएसके योजना के तहत मिलने वाली सुविधाएं क्यों नहीं मिल सकीं। साथ ही यह भी बताने को कहा गया है कि मानव गरिमा और मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के लिए पीड़ित महिला को मुआवजा देने की सिफारिश क्यों न की जाए।
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