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Faridabad News: जिले में लगातार गिर रहा भूजल स्तर, पानी सहेजने के इंतजाम नाकाफी

Thu, 09 Jul 2026 12:36 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2026 12:36 AM IST
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Groundwater levels in the district are continuously falling; measures to conserve water are inadequate.
मानसून शुरू होने के बाद किया जा रहा है 230 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की मरम्मत का काम
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40 मीटर से नीचे पहुंच चुका है भूजल स्तर
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। बारिश का दौर शुरू हो चुका है। शहर की सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। करोड़ों लीटर वर्षा जल नालों के रास्ते यमुना की ओर बह रहा है। दूसरी ओर जिस बारिश के पानी को जमीन में उतारकर भूजल संकट कम किया जा सकता था उसके लिए सबसे अहम योजना पर काम मानसून आने के बाद शुरू हुआ है।
नगर निगम ने 3 जुलाई के बाद 230 नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की मरम्मत और नए सिरे से बनाने का काम शुरू किया है। ऐसे में इस साल का अधिकांश मानसून निकल जाएगा और शहर को इस परियोजना का वास्तविक लाभ अगले वर्ष ही मिल सकेगा। फरीदाबाद में भूजल संकट लगातार गहराता जा रहा है।
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केंद्रीय भूजल बोर्ड के आकलन के अनुसार जिले का अधिकांश क्षेत्र अत्यधिक दोहन की श्रेणी में है। कई इलाकों में भूजल स्तर 40 मीटर से भी नीचे पहुंच चुका है। लगातार बढ़ते दोहन और पर्याप्त रिचार्ज नहीं होने से हालात हर वर्ष और गंभीर हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जितना अधिक पानी गहराई से निकलेगा उसकी गुणवत्ता पर भी उतने ही सवाल खड़े होंगे। गहरे जल भंडारों में कई स्थानों पर पानी में घुले खनिज और लवणों की मात्रा बढ़ने लगती है जिससे पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहता है।
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नगर निगम ने इस संकट से निपटने के लिए परियोजना तैयार की है। इसके तहत शहर में 230 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को नए सिरे से बनाया जाएगा। परियोजना को पूरा करने के लिए 13 महीने का समय तय किया गया है। यानी इस वर्ष का पूरा मानसून लगभग निकल जाएगा और शहर को इस योजना का प्रत्यक्ष लाभ अगले मानसून से पहले मिलना मुश्किल होगा।


बढ़ती आबादी और बढ़ता जल संकट

करीब 20 लाख की आबादी, 741 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और हरियाणा के सबसे बड़े औद्योगिक जिलों में शामिल फरीदाबाद में हजारों औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। घरेलू और औद्योगिक जरूरतों के लिए बड़ी संख्या में बोरवेल से पानी निकाला जा रहा है। दूसरी तरफ प्राकृतिक जल स्रोत लगातार कम हुए हैं। जिले में 144 गांव और तेजी से विकसित हो रहे ग्रेटर फरीदाबाद क्षेत्र में भी भूजल पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।


पानी की गुणवत्ता पर भी बढ़ रहा खतरा

जल विशेषज्ञों के अनुसार केवल पानी की उपलब्धता ही नहीं उसकी गुणवत्ता भी बड़ी चिंता है। जैसे-जैसे भूजल गहराई में जाता है वैसे-वैसे कई स्थानों पर पानी में घुले ठोस तत्व (टीडीएस), कठोरता और अन्य खनिजों की मात्रा बढ़ने लगती है। इसका असर घरेलू उपयोग, पेयजल और औद्योगिक उपयोग पर भी पड़ सकता है। इसलिए अब केवल नए जल स्रोत तलाशना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वर्षा जल को जमीन में पहुंचाकर प्राकृतिक जल भंडार को पुनर्भरित करना भी जरूरी है।



रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य को लेकर जानकारी नहीं है, यह काम किस स्टेटस में है यह देखना पड़ेगा। - अमित यादव, ज्वाइंट कमिश्नर फरीदाबाद
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