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Faridabad News: साहिबाबाद-दिल्ली-फरीदाबाद रूट पर ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रकों का संचालन शुरू किया जाएगा

Sun, 24 May 2026 12:36 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 24 May 2026 12:36 AM IST
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Green hydrogen-powered trucks to be launched on Sahibabad-Delhi-Faridabad route
परियोजना का उद्देश्य वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के साथ पूरे एनसीआर के माल ढुलाई नेटवर्क को प्रदूषण मुक्त बनाना है
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मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। आने वाले वर्षों में फरीदाबाद दिल्ली-एनसीआर के सबसे बड़े ग्रीन लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट हब के रूप में उभर सकता है। सरकार ने साहिबाबाद-दिल्ली-फरीदाबाद रूट को देश के उन चुनिंदा हाईवे कॉरिडोर में शामिल किया है जहां ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रकों का संचालन शुरू किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के साथ पूरे एनसीआर के माल ढुलाई नेटवर्क को आधुनिक, तेज और प्रदूषण मुक्त बनाना है।

यह परियोजना पूरी तरह नया एक्सप्रेसवे बनाने की बजाय मौजूदा सड़क नेटवर्क को स्मार्ट ग्रीन कॉरिडोर में बदलने पर आधारित है। इसमें डीएनडी-फरीदाबाद-केएमपी एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और एनसीआर के प्रमुख औद्योगिक मार्गों को एकीकृत किया जाएगा।
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फरीदाबाद से गुजरने वाला डीएनडी-फरीदाबाद-केएमपी मार्ग पहले ही एनसीआर का महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी कॉरिडोर बन चुका है। इसके जरिये फरीदाबाद का सीधा संपर्क दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट नेटवर्क से जुड़ रहा है। इसके चलते भविष्य में भारी मालवाहक ट्रकों का दबाव शहर की आंतरिक सड़कों से कम होने की उम्मीद है।
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औद्योगिक शहर होने का मिलेगा फायदा

फरीदाबाद हरियाणा का सबसे बड़ा औद्योगिक जिला माना जाता है। शहर में करीब 35 हजार से अधिक छोटे-बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान संचालित हैं। बाटा, सेक्टर-24, सेक्टर-58, आईएमटी, मुजेसर, डबुआ और बल्लभगढ़ इंडस्ट्रियल बेल्ट से प्रतिदिन हजारों मालवाहक वाहन एनसीआर और दूसरे राज्यों के लिए निकलते हैं। दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और पलवल के बीच रणनीतिक स्थिति होने के कारण फरीदाबाद पिछले कुछ वर्षों में वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना है। शहर में ई-कॉमर्स कंपनियों और निजी लॉजिस्टिक्स कंपनियों के बड़े गोदाम भी तेजी से बढ़े हैं।

प्रदूषण और जाम से राहत मिलने की उम्मीद

फरीदाबाद लंबे समय से ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है। बदरपुर बॉर्डर, एनएच-19, मथुरा रोड, सराय ख्वाजा, बाटा चौक और बल्लभगढ़ क्षेत्र में भारी वाहनों के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कई रिपोर्टों में शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब और बेहद खराब श्रेणी में दर्ज हो चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डीजल ट्रकों की जगह चरणबद्ध तरीके से हाइड्रोजन आधारित भारी वाहन चलते हैं तो इससे कार्बन उत्सर्जन और धुएं में कमी आएगी। साथ ही एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।

हाइड्रोजन फ्यूल स्टेशन और स्मार्ट सुविधाएं होंगी विकसित

परियोजना के तहत केवल ट्रकों का संचालन नहीं होगा बल्कि पूरे फ्रेट इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाया जाएगा। कॉरिडोर पर हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा ट्रकों के लिए आधुनिक पार्किंग, वे-साइड सुविधाएं, ड्राइवर रेस्ट एरिया और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम भी तैयार किए जाएंगे। जानकारी के अनुसार इंडियन ऑयल, रिलायंस और अन्य ऊर्जा कंपनियां हाइड्रोजन फ्यूल नेटवर्क तैयार करने में शामिल होंगी। फरीदाबाद में इंडियन ऑयल का बड़ा रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर पहले से मौजूद है जहां वैकल्पिक ईंधन तकनीकों पर लंबे समय से काम हो रहा है। इससे शहर को परियोजना में अतिरिक्त महत्व मिलने की संभावना मानी जा रही है।

जेवर एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे नेटवर्क से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

यह कॉरिडोर सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ रहा है। इसके शुरू होने के बाद दक्षिण दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद के बीच माल ढुलाई और यातायात पहले की तुलना में अधिक तेज हो सकेगा। परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार इससे औद्योगिक इकाइयों की लॉजिस्टिक्स लागत घट सकती है। निर्यात आधारित उद्योगों को भी इसका लाभ मिलेगा क्योंकि जेवर एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे नेटवर्क तक पहुंच आसान होगी।


रोजगार और निवेश बढ़ने की संभावना

परियोजना के चलते फरीदाबाद में ग्रीन एनर्जी, ऑटोमोबाइल, वेयरहाउसिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में निवेश बढ़ने की संभावना है। हाइड्रोजन फ्यूल स्टेशन, ट्रक सर्विसिंग, मेंटेनेंस और लॉजिस्टिक्स संचालन से जुड़े नए रोजगार भी पैदा हो सकते हैं। शहर के उद्योग संगठनों का मानना है कि यदि यह परियोजना समय पर लागू होती है तो फरीदाबाद आने वाले वर्षों में एनसीआर का सबसे बड़ा ग्रीन फ्रेट और लॉजिस्टिक्स हब बन सकता है।


यह परियोजना अभी मुख्यालय स्तर पर वहां से ही इसका काम देखा जा रहा है। -धीरज सिंह, उप महाप्रबंधक एनएचएआई
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