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Faridabad News: गैस संकट से उद्योगों पर दोहरी मार, कर्मचारी कम व उत्पादन भी घटा
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गैस संकट से उद्योगों पर दोहरी मार, कर्मचारी कम व उत्पादन भी घटा
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। मध्य-पूर्व एशिया में चल रहे विवाद के कारण फरीदाबाद के औद्योगिक पहिये पर असर पड़ रहा है। घरेलू गैस सिलेंडरों की किल्लत ने मजदूरों को फैक्टरियों से दूर कर दिया है जिससे उत्पादन और ऑर्डर दोनों पर सीधा असर पड़ रहा है।
शहर के औद्योगिक क्षेत्रों में इन दिनों मशीनों से ज्यादा गैस सिलिंडरों की चर्चा है। हजारों कर्मचारी रोजाना काम पर आने के बजाय गैस एजेंसियों के चक्कर लगा रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई फैक्टरियों में कर्मचारियों की संख्या आधी तक सिमट गई है और उत्पादन की रफ्तार कम होने लगी है।
फरीदाबाद में करीब 30 हजार छोटे-बड़े उद्योग संचालित हैं जिनमें बड़ी संख्या में पूर्वांचल और बिहार से आए श्रमिक काम करते हैं। इनमें से अधिकांश किराये के मकानों में रहते हैं जहां पाइप्ड गैस (पीएनजी) की सुविधा नहीं है। ऐसे में घरेलू गैस सिलेंडर ही उनके लिए खाना बनाने का एकमात्र सहारा है। सिलेंडर की कमी ने उनके सामने रोजमर्रा की जिंदगी का संकट खड़ा कर दिया है।
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उद्यमियों के मुताबिक स्थिति अब केवल श्रमिकों की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं रही बल्कि इसका असर सीधे कारोबार पर दिखने लगा है। कई उद्योगों के पास बड़े ऑर्डर लंबित हैं जिन्हें समय पर पूरा करना चुनौती बन गया है। कर्मचारियों की कमी के कारण उत्पादन घट रहा है और ओवरटाइम की व्यवस्था भी ठप पड़ गई है।
समस्या को और गंभीर बना रहा शादियों का सीजन
होली के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने गांव गए थे जिनमें से कई अब तक वापस नहीं लौटे हैं। जो कर्मचारी शहर में मौजूद हैं वे भी गैस सिलिंडर की व्यवस्था के लिए छुट्टियां ले रहे हैं। इससे पहले से ही कम स्टाफ वाले उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो इसका असर आने वाले समय में और गहरा सकता है।
मुश्किल हो रही है स्थिति
लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष अमृतपाल कोचर का कहना है कि गैस संकट के कारण हर उद्योग प्रभावित हो रहा है और कर्मचारियों की लगातार अनुपस्थिति से कामकाज बाधित है। वहीं उद्योगपति विशाल ललानी बताते हैं कि पहले ही कर्मचारियों की कमी थी अब गैस की समस्या ने हालात और बिगाड़ दिए हैं, जिससे समय पर ऑर्डर पूरा करना मुश्किल हो गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। मध्य-पूर्व एशिया में चल रहे विवाद के कारण फरीदाबाद के औद्योगिक पहिये पर असर पड़ रहा है। घरेलू गैस सिलेंडरों की किल्लत ने मजदूरों को फैक्टरियों से दूर कर दिया है जिससे उत्पादन और ऑर्डर दोनों पर सीधा असर पड़ रहा है।
शहर के औद्योगिक क्षेत्रों में इन दिनों मशीनों से ज्यादा गैस सिलिंडरों की चर्चा है। हजारों कर्मचारी रोजाना काम पर आने के बजाय गैस एजेंसियों के चक्कर लगा रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई फैक्टरियों में कर्मचारियों की संख्या आधी तक सिमट गई है और उत्पादन की रफ्तार कम होने लगी है।
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फरीदाबाद में करीब 30 हजार छोटे-बड़े उद्योग संचालित हैं जिनमें बड़ी संख्या में पूर्वांचल और बिहार से आए श्रमिक काम करते हैं। इनमें से अधिकांश किराये के मकानों में रहते हैं जहां पाइप्ड गैस (पीएनजी) की सुविधा नहीं है। ऐसे में घरेलू गैस सिलेंडर ही उनके लिए खाना बनाने का एकमात्र सहारा है। सिलेंडर की कमी ने उनके सामने रोजमर्रा की जिंदगी का संकट खड़ा कर दिया है।
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उद्यमियों के मुताबिक स्थिति अब केवल श्रमिकों की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं रही बल्कि इसका असर सीधे कारोबार पर दिखने लगा है। कई उद्योगों के पास बड़े ऑर्डर लंबित हैं जिन्हें समय पर पूरा करना चुनौती बन गया है। कर्मचारियों की कमी के कारण उत्पादन घट रहा है और ओवरटाइम की व्यवस्था भी ठप पड़ गई है।
समस्या को और गंभीर बना रहा शादियों का सीजन
होली के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने गांव गए थे जिनमें से कई अब तक वापस नहीं लौटे हैं। जो कर्मचारी शहर में मौजूद हैं वे भी गैस सिलिंडर की व्यवस्था के लिए छुट्टियां ले रहे हैं। इससे पहले से ही कम स्टाफ वाले उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो इसका असर आने वाले समय में और गहरा सकता है।
मुश्किल हो रही है स्थिति
लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष अमृतपाल कोचर का कहना है कि गैस संकट के कारण हर उद्योग प्रभावित हो रहा है और कर्मचारियों की लगातार अनुपस्थिति से कामकाज बाधित है। वहीं उद्योगपति विशाल ललानी बताते हैं कि पहले ही कर्मचारियों की कमी थी अब गैस की समस्या ने हालात और बिगाड़ दिए हैं, जिससे समय पर ऑर्डर पूरा करना मुश्किल हो गया है।