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Faridabad News: महिला से छेड़छाड़ के नौ साल पुराने मामले में चार आरोपी दोषमुक्त
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महिला के फटे कपड़े घटना के करीब छह महीने बाद पुलिस को सौंपे गए थे
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। महिला से छेड़छाड़, उसके कपड़े फाड़ने और जान से मारने की धमकी देने के करीब नौ साल पुराने मामले में अदालत ने चार आरोपियों को दोषमुक्त करार कर दिया। मामले में महिला के फटे कपड़े घटना के करीब छह महीने बाद पुलिस को सौंपे गए थे।
कपड़े सौंपने में देरी का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया और न ही उन्हें अदालत में भौतिक साक्ष्य के रूप में पेश किया गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (एसीजेएम) रीतू यादव की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में फैसला सुनाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई 45 दिन की देरी और अन्य कमियों को भी महत्वपूर्ण माना। अभियोजन पक्ष के अनुसार, तिलपत निवासी महिला ने 20 जून 2017 को महिला थाना फरीदाबाद में शिकायत दी थी। आरोप था कि छह मई 2017 की शाम करीब पांच बजे वह अपनी सास के साथ जंगल की ओर जा रही थी। इस दौरान गांव के त्रिलोकनाथ, नरेंद्र और वीरू ने उसका पीछा कर अश्लील टिप्पणियां की थीं। विरोध करने पर त्रिलोकनाथ उसे घसीटकर खेत में ले गया और राहुल ने उसके कपड़े फाड़ दिए। महिला के शोर मचाने पर बलबीरनाथ और बंसीनाथ मौके पर पहुंचे और उसे आरोपियों से छुड़ाया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।
45 दिन बाद दर्ज कराई थी शिकायत
अदालत ने पाया कि कथित घटना छह मई 2017 को हुई थी, जबकि शिकायत 20 जून 2017 को दर्ज कराई गई। अभियोजन पक्ष इस देरी का संतोषजनक कारण नहीं बता सका। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि घटना के समय चश्मदीद गवाहों की मौजूदगी बताई गई थी, इसके बावजूद पुलिस को सूचना देने में देरी हुई। अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि महिला के फटे कपड़े 28 नवंबर 2017 को पुलिस को सौंपे गए, जबकि घटना 6 मई 2017 की थी। कपड़े सौंपने में हुई देरी का कारण स्पष्ट नहीं किया गया और न ही उन्हें अदालत में भौतिक साक्ष्य के रूप में पेश किया गया। बचाव पक्ष ने दोनों पक्षों के बीच पुरानी रंजिश का तर्क भी दिया। अदालत ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास और आरोपियों की साझा मंशा साबित नहीं होने समेत अन्य पहलुओं पर विचार किया। इसके बाद वीरू, त्रिलोकनाथ, नरेंद्र और राहुल को संबंधित धाराओं में लगाए गए आरोपों से दोषमुक्त करने का आदेश दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। महिला से छेड़छाड़, उसके कपड़े फाड़ने और जान से मारने की धमकी देने के करीब नौ साल पुराने मामले में अदालत ने चार आरोपियों को दोषमुक्त करार कर दिया। मामले में महिला के फटे कपड़े घटना के करीब छह महीने बाद पुलिस को सौंपे गए थे।
कपड़े सौंपने में देरी का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया और न ही उन्हें अदालत में भौतिक साक्ष्य के रूप में पेश किया गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (एसीजेएम) रीतू यादव की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में फैसला सुनाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई 45 दिन की देरी और अन्य कमियों को भी महत्वपूर्ण माना। अभियोजन पक्ष के अनुसार, तिलपत निवासी महिला ने 20 जून 2017 को महिला थाना फरीदाबाद में शिकायत दी थी। आरोप था कि छह मई 2017 की शाम करीब पांच बजे वह अपनी सास के साथ जंगल की ओर जा रही थी। इस दौरान गांव के त्रिलोकनाथ, नरेंद्र और वीरू ने उसका पीछा कर अश्लील टिप्पणियां की थीं। विरोध करने पर त्रिलोकनाथ उसे घसीटकर खेत में ले गया और राहुल ने उसके कपड़े फाड़ दिए। महिला के शोर मचाने पर बलबीरनाथ और बंसीनाथ मौके पर पहुंचे और उसे आरोपियों से छुड़ाया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।
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45 दिन बाद दर्ज कराई थी शिकायत
अदालत ने पाया कि कथित घटना छह मई 2017 को हुई थी, जबकि शिकायत 20 जून 2017 को दर्ज कराई गई। अभियोजन पक्ष इस देरी का संतोषजनक कारण नहीं बता सका। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि घटना के समय चश्मदीद गवाहों की मौजूदगी बताई गई थी, इसके बावजूद पुलिस को सूचना देने में देरी हुई। अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि महिला के फटे कपड़े 28 नवंबर 2017 को पुलिस को सौंपे गए, जबकि घटना 6 मई 2017 की थी। कपड़े सौंपने में हुई देरी का कारण स्पष्ट नहीं किया गया और न ही उन्हें अदालत में भौतिक साक्ष्य के रूप में पेश किया गया। बचाव पक्ष ने दोनों पक्षों के बीच पुरानी रंजिश का तर्क भी दिया। अदालत ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास और आरोपियों की साझा मंशा साबित नहीं होने समेत अन्य पहलुओं पर विचार किया। इसके बाद वीरू, त्रिलोकनाथ, नरेंद्र और राहुल को संबंधित धाराओं में लगाए गए आरोपों से दोषमुक्त करने का आदेश दिया।
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