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एफएनजी : 10 किलोमीटर परियोजना से फरीदाबाद से नोएडा को जोड़ेंगे
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-जनवरी तक पूरी होगी डीपीआर, डीपीआर सर्वे के बाद एलाइनमेंट बदलकर जल्द काम शुरू करने की तैयारी
2 लाख वाहन चालक प्रतिदिन झेल रहे लंबा जाम, कई वर्षों से बंद पड़ी है एफएनजी परियोजना
केंद्र, हरियाणा और यूपी में भाजपा सरकार होने के बावजूद तीनों सरकारों ने योजना के प्रति नहीं दिखाई गंभीरता
संदीप वर्मा
फरीदाबाद। छह लेन के 56 किलोमीटर लंबे फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (एफएनजी) एक्सप्रेस-वे परियोजना के अंतर्गत सबसे पहले फरीदाबाद से केवल 10 किलोमीटर तक नोएडा को जोड़ा जाएगा। जनवरी-2025 तक परियोजना की नई डीपीआर बनकर तैयार होगी। इसके बाद दोनों प्रदेशों की सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद काम शुरू हो सकेगा। प्रतिदिन कालिंदी कुंज के रास्ते घंटों जाम में फसकर जाने को मजबूर फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के करीब 2 लाख वाहन चालकों को राहत मिल सकती है।
छह लेन के एफएनजी एक्सप्रेसवे की घोषणा वर्ष 1989 में केंद्र सरकार की ओर से होने के बाद 1998 में यह परियोजना ठंडे बस्त में डाल दी गई। 2018 में एक बार फिर से इसकी डीपीआर बनाई गई लेकिन जमीन अधिग्रहण और अन्य मुद्दों के चलते कई जगह इसका काम बंद हो गया। नोएडा में इस परियोजना का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो गया लेकिन फरीदाबाद में इस योजना पर ग्रहण लगा रहा। विधानसभा चुनाव से पहले जनता से किए वादे के अनुसार नए सिरे से डीपीआर बनाने की कवायद शुरू की गई है। इसके लिए एजेंसी को 27 लाख रुपये जारी किए गए हैं।
वर्षों से अटके एक्सप्रेसवे का ग्रहण दूर करने के लिए अब इस परियोजना के 10 किलोमीटर को सबसे पहले पूरा किया जाएगा। योजना के अंतर्गत छह लेन की इस सड़क और यमुना नदी पर पुल बनाकर इसे नोएडा से जोड़ा जाएगा। जनवरी माह में इसकी डीपीआर रिपोर्ट तैयार करने की तिथि निर्धारित की गई है। इसके बाद ही योजना पर आने वाले खर्च का आकलन कर इसे आगे बढ़ाया जाएगा। 56 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे को बनाने में आ रही अड़चनों को देखते हुए इसे सबसे पहले चरण में यमुना पर पुल बनाकर जोड़ने की कवायद की जा रही है।
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ट्रिपल इंजन सरकार नहीं बढ़ा पाई परियोजना
वर्षों से केंद्र, यूपी और हरियाणा में ट्रिपल इंजन की सरकार होते हुए भी इन चार शहरवासियों को इस परेशानी से निजात नहीं मिली है। अब देखना है कि विधानसभा चुनाव के बाद नए सिरे से इसका सर्वे और डीपीआर की कवायद यदि शुरू होती है कि अभी भी वर्षों का लंबा इंतजार लोगों के लिए बना हुआ है।
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यमुना पर पुल बनाने में नोएडा और फरीदाबाद करेंगे 50-50 खर्च
पूर्व में एफएनजी परियोजना में 28.1 किलोमीटर फ़रीदाबाद, 8 किलोमीटर गाज़ियाबाद और 20 किलोमीटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बननी थी। वर्तमान में फरीदाबाद से केवल 10 किलोमीटर संपर्क मार्ग और यमुना नदी पर पुल बनाकर इसे जोड़ा जाएगा। दूसरी तरफ, नोएडा इसे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे तक फ्लाईओवर बनाकर आगे जोड़ेगा।
एनएचएआई पहले करवा चुकी है सर्वे
एफएनजी परियोजना को सिरे चढ़ाने के लिए पांच वर्ष पहले एनएचएआई भी सर्वे करवा चुकी है। डीपीआर तैयार कर सरकार को भेजी गई थी, लंबे समय तक विचार के बाद सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अब परियोजना को एक बार फिर सिरे चढ़ाने की कवायद शुरू की गई है। इसके तहत लोक निर्माण विभाग की ओर से नए सिरे से सर्वे कराने के लिए टेंडर छोड़ा गया था। अब विभाग की ओर से नोएडा की एमएसवी कंपनी को कंसल्टेंट नियुक्त किया गया है। एजेंसी 4 से 5 माह में सर्वे के आधार पर डीपीआर तैयार करके रिपोर्ट सौंपेगी।
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एफएनजी मार्ग कहां से निकलनेगा
-एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से नोएडा के सेक्टर-121, 122, 140 और 150 से होकर गुज़रेगा।
-एक्सप्रेसवे, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे से चक मंगरौली के ऊपर यमुना पर मिलता है।
-फरीदाबाद में नई डीपीआर बनाई जा रही है। इसमें एक्सप्रेसवे कहां से गुजरेगा, इसके लिए नया एलाइनमेंट तय किया जाएगा।
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किसके पास जिम्मेदारी
-एफएनजी मार्ग के लिए यमुना पर लालपुर के पास करीब 650 मीटर लंबाई का पुल प्रस्तावित है।
-इस पुल से सेक्टर-88 स्थित अमृता अस्पताल के पास तक करीब नौ किलोमीटर सड़क तैयार की जाएगी।
-एक किलोमीटर लंबी सड़क पुल के उस पार उत्तर प्रदेश की सीमा तक भी बनेगी।
-यमुना नदी पर बनने वाले पुल का डीपीआर पीडब्ल्यूडी तैयार करेगा।
-हरियाणा सरकार और नोएडा प्राधिकरण मिलकर इस पुल का रखरखाव देखेगा।
-नोएडा प्राधिकरण, छिजारसी में फ्लाईओवर बनाएगी।
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एफएनजी परियोजना को लेकर डीपीआर बनाने का कार्य एजेंसी को सौंपा गया है। एजेंसी जनवरी माह तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। नई डीपीआर के तहत एलाइनमेंट में बदलाव आ सकता है। डीपीआर तैयार कर परियोजना पर काम शुरू किया जाएगा। -
प्रदीप संधू, कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
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2 लाख वाहन चालक प्रतिदिन झेल रहे लंबा जाम, कई वर्षों से बंद पड़ी है एफएनजी परियोजना
केंद्र, हरियाणा और यूपी में भाजपा सरकार होने के बावजूद तीनों सरकारों ने योजना के प्रति नहीं दिखाई गंभीरता
संदीप वर्मा
फरीदाबाद। छह लेन के 56 किलोमीटर लंबे फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (एफएनजी) एक्सप्रेस-वे परियोजना के अंतर्गत सबसे पहले फरीदाबाद से केवल 10 किलोमीटर तक नोएडा को जोड़ा जाएगा। जनवरी-2025 तक परियोजना की नई डीपीआर बनकर तैयार होगी। इसके बाद दोनों प्रदेशों की सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद काम शुरू हो सकेगा। प्रतिदिन कालिंदी कुंज के रास्ते घंटों जाम में फसकर जाने को मजबूर फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के करीब 2 लाख वाहन चालकों को राहत मिल सकती है।
छह लेन के एफएनजी एक्सप्रेसवे की घोषणा वर्ष 1989 में केंद्र सरकार की ओर से होने के बाद 1998 में यह परियोजना ठंडे बस्त में डाल दी गई। 2018 में एक बार फिर से इसकी डीपीआर बनाई गई लेकिन जमीन अधिग्रहण और अन्य मुद्दों के चलते कई जगह इसका काम बंद हो गया। नोएडा में इस परियोजना का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो गया लेकिन फरीदाबाद में इस योजना पर ग्रहण लगा रहा। विधानसभा चुनाव से पहले जनता से किए वादे के अनुसार नए सिरे से डीपीआर बनाने की कवायद शुरू की गई है। इसके लिए एजेंसी को 27 लाख रुपये जारी किए गए हैं।
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वर्षों से अटके एक्सप्रेसवे का ग्रहण दूर करने के लिए अब इस परियोजना के 10 किलोमीटर को सबसे पहले पूरा किया जाएगा। योजना के अंतर्गत छह लेन की इस सड़क और यमुना नदी पर पुल बनाकर इसे नोएडा से जोड़ा जाएगा। जनवरी माह में इसकी डीपीआर रिपोर्ट तैयार करने की तिथि निर्धारित की गई है। इसके बाद ही योजना पर आने वाले खर्च का आकलन कर इसे आगे बढ़ाया जाएगा। 56 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे को बनाने में आ रही अड़चनों को देखते हुए इसे सबसे पहले चरण में यमुना पर पुल बनाकर जोड़ने की कवायद की जा रही है।
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ट्रिपल इंजन सरकार नहीं बढ़ा पाई परियोजना
वर्षों से केंद्र, यूपी और हरियाणा में ट्रिपल इंजन की सरकार होते हुए भी इन चार शहरवासियों को इस परेशानी से निजात नहीं मिली है। अब देखना है कि विधानसभा चुनाव के बाद नए सिरे से इसका सर्वे और डीपीआर की कवायद यदि शुरू होती है कि अभी भी वर्षों का लंबा इंतजार लोगों के लिए बना हुआ है।
यमुना पर पुल बनाने में नोएडा और फरीदाबाद करेंगे 50-50 खर्च
पूर्व में एफएनजी परियोजना में 28.1 किलोमीटर फ़रीदाबाद, 8 किलोमीटर गाज़ियाबाद और 20 किलोमीटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बननी थी। वर्तमान में फरीदाबाद से केवल 10 किलोमीटर संपर्क मार्ग और यमुना नदी पर पुल बनाकर इसे जोड़ा जाएगा। दूसरी तरफ, नोएडा इसे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे तक फ्लाईओवर बनाकर आगे जोड़ेगा।
एनएचएआई पहले करवा चुकी है सर्वे
एफएनजी परियोजना को सिरे चढ़ाने के लिए पांच वर्ष पहले एनएचएआई भी सर्वे करवा चुकी है। डीपीआर तैयार कर सरकार को भेजी गई थी, लंबे समय तक विचार के बाद सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अब परियोजना को एक बार फिर सिरे चढ़ाने की कवायद शुरू की गई है। इसके तहत लोक निर्माण विभाग की ओर से नए सिरे से सर्वे कराने के लिए टेंडर छोड़ा गया था। अब विभाग की ओर से नोएडा की एमएसवी कंपनी को कंसल्टेंट नियुक्त किया गया है। एजेंसी 4 से 5 माह में सर्वे के आधार पर डीपीआर तैयार करके रिपोर्ट सौंपेगी।
एफएनजी मार्ग कहां से निकलनेगा
-एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से नोएडा के सेक्टर-121, 122, 140 और 150 से होकर गुज़रेगा।
-एक्सप्रेसवे, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे से चक मंगरौली के ऊपर यमुना पर मिलता है।
-फरीदाबाद में नई डीपीआर बनाई जा रही है। इसमें एक्सप्रेसवे कहां से गुजरेगा, इसके लिए नया एलाइनमेंट तय किया जाएगा।
किसके पास जिम्मेदारी
-एफएनजी मार्ग के लिए यमुना पर लालपुर के पास करीब 650 मीटर लंबाई का पुल प्रस्तावित है।
-इस पुल से सेक्टर-88 स्थित अमृता अस्पताल के पास तक करीब नौ किलोमीटर सड़क तैयार की जाएगी।
-एक किलोमीटर लंबी सड़क पुल के उस पार उत्तर प्रदेश की सीमा तक भी बनेगी।
-यमुना नदी पर बनने वाले पुल का डीपीआर पीडब्ल्यूडी तैयार करेगा।
-हरियाणा सरकार और नोएडा प्राधिकरण मिलकर इस पुल का रखरखाव देखेगा।
-नोएडा प्राधिकरण, छिजारसी में फ्लाईओवर बनाएगी।
एफएनजी परियोजना को लेकर डीपीआर बनाने का कार्य एजेंसी को सौंपा गया है। एजेंसी जनवरी माह तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। नई डीपीआर के तहत एलाइनमेंट में बदलाव आ सकता है। डीपीआर तैयार कर परियोजना पर काम शुरू किया जाएगा। -
प्रदीप संधू, कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग