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Faridabad News: आधुनिक तकनीक की मदद से किया जाएगा बाढ़ प्रबंधन, 100 करोड़ से बनेगी मछली मंडी
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आधुनिक तकनीक की मदद से किया जाएगा बाढ़ प्रबंधन, 100 करोड़ से बनेगी मछली मंडी
किसानों को जैविक उत्पादों के लिए मंडी में मिलेगा अलग से स्थान
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। तेजी से शहरीकरण के बीच कृषि और मत्स्य क्षेत्र को अक्सर पीछे छूट जाने का आरोप झेलने वाले फरीदाबाद को इस बार बजट में अलग पैकेज मिला है। मंडियों में जैविक किसानों के लिए विशेष स्थान, आधुनिक मछली मंडी की स्थापना और बाढ़ से निपटने के लिए नई तकनीक अपनाने की घोषणा की गई है। साथ ही खाद्य गुणवत्ता और मृदा परीक्षण के लिए प्रयोगशालाओं का नेटवर्क मजबूत करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
फरीदाबाद और आसपास के गांवों मंझावली, तिगांव, दयालपुर, पल्ला क्षेत्र में बीते कुछ वर्षों में प्राकृतिक खेती और जैविक उत्पादन की ओर रुझान बढ़ा है। हालांकि इन किसानों को पारंपरिक मंडियों में अलग पहचान नहीं मिल पाती है। अब मंडियों में जैविक और प्राकृतिक उपज बेचने के लिए अलग स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को सीधे प्रमाणित उत्पाद मिल सकेंगे और किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
इसके साथ ही एपीडा मान्यता प्राप्त स्तर की परीक्षण प्रयोगशालाएं और प्रमाणीकरण केंद्र स्थापित करने की योजना है, ताकि उत्पाद की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच हो सके। नई मृदा और जल परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए 9 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। इससे किसानों को अपनी जमीन की सेहत के बारे में सटीक जानकारी मिलेगी और फसल उत्पादन की योजना बेहतर तरीके से बनाई जा सकेगी।
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100 करोड़ की आधुनिक मछली मंडी
फरीदाबाद में मत्स्य कारोबार धीरे-धीरे बढ़ रहा है। यमुना किनारे के गांवों और आसपास के क्षेत्रों में तालाब आधारित मत्स्य पालन करने वाले किसानों की संख्या बढ़ी है। लेकिन अब तक शहर में आधुनिक सुविधाओं वाली मछली मंडी का अभाव रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक मछली मंडी स्थापित करने का प्रस्ताव है। इसमें कोल्ड स्टोरेज, स्वच्छ प्रसंस्करण क्षेत्र, आइस प्लांट और परिवहन सुविधा जैसी व्यवस्थाएं होंगी। इससे स्थानीय व्यापारियों को बेहतर आधारभूत ढांचा मिलेगा और मत्स्य उत्पादों की गुणवत्ता भी बनी रहेगी। व्यापारियों का मानना है कि संगठित मंडी बनने से बाहर के खरीदार भी आकर्षित होंगे और कारोबार का दायरा बढ़ेगा।
खाद्य गुणवत्ता पर जोर
शहर में दो व्यापक एकीकृत खाद्य प्रयोगशालाएं स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिनके लिए वर्ष 2026-27 में 24 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इन प्रयोगशालाओं में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच की जाएगी। फरीदाबाद जैसे औद्योगिक और तेजी से बढ़ते शहर में खाद्य सुरक्षा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर जांच सुविधा उपलब्ध होने से मिलावट पर नियंत्रण में मदद मिल सकती है।
बाढ़ प्रबंधन में नई तकनीक
पिछले साल यमुना का जल स्तर बढ़ने के दौरान यमुना किनारे बसे निचले क्षेत्र वसंतपुर, मोहना व तिगांव के कई इलाकों में कई फीट तक जलभराव हो गया था। इसमें कई स्थानों पर पांच फीट तक पानी भर गया था। बजट में बाढ़ से राहत के लिए नई तकनीक अपनाने की योजना का उल्लेख किया गया है। इसमें ड्रेनेज सिस्टम को आधुनिक बनाना, जल निकासी की निगरानी और त्वरित अलर्ट प्रणाली विकसित करना शामिल हो सकता है। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो बरसात के मौसम में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा। वहीं चांदपुर में बड़ा तालाब बनाकर पानी को एकत्रित करने की योजना पर भी काम चल रहा है।
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किसानों को जैविक उत्पादों के लिए मंडी में मिलेगा अलग से स्थान
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। तेजी से शहरीकरण के बीच कृषि और मत्स्य क्षेत्र को अक्सर पीछे छूट जाने का आरोप झेलने वाले फरीदाबाद को इस बार बजट में अलग पैकेज मिला है। मंडियों में जैविक किसानों के लिए विशेष स्थान, आधुनिक मछली मंडी की स्थापना और बाढ़ से निपटने के लिए नई तकनीक अपनाने की घोषणा की गई है। साथ ही खाद्य गुणवत्ता और मृदा परीक्षण के लिए प्रयोगशालाओं का नेटवर्क मजबूत करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
फरीदाबाद और आसपास के गांवों मंझावली, तिगांव, दयालपुर, पल्ला क्षेत्र में बीते कुछ वर्षों में प्राकृतिक खेती और जैविक उत्पादन की ओर रुझान बढ़ा है। हालांकि इन किसानों को पारंपरिक मंडियों में अलग पहचान नहीं मिल पाती है। अब मंडियों में जैविक और प्राकृतिक उपज बेचने के लिए अलग स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को सीधे प्रमाणित उत्पाद मिल सकेंगे और किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
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इसके साथ ही एपीडा मान्यता प्राप्त स्तर की परीक्षण प्रयोगशालाएं और प्रमाणीकरण केंद्र स्थापित करने की योजना है, ताकि उत्पाद की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच हो सके। नई मृदा और जल परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए 9 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। इससे किसानों को अपनी जमीन की सेहत के बारे में सटीक जानकारी मिलेगी और फसल उत्पादन की योजना बेहतर तरीके से बनाई जा सकेगी।
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100 करोड़ की आधुनिक मछली मंडी
फरीदाबाद में मत्स्य कारोबार धीरे-धीरे बढ़ रहा है। यमुना किनारे के गांवों और आसपास के क्षेत्रों में तालाब आधारित मत्स्य पालन करने वाले किसानों की संख्या बढ़ी है। लेकिन अब तक शहर में आधुनिक सुविधाओं वाली मछली मंडी का अभाव रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक मछली मंडी स्थापित करने का प्रस्ताव है। इसमें कोल्ड स्टोरेज, स्वच्छ प्रसंस्करण क्षेत्र, आइस प्लांट और परिवहन सुविधा जैसी व्यवस्थाएं होंगी। इससे स्थानीय व्यापारियों को बेहतर आधारभूत ढांचा मिलेगा और मत्स्य उत्पादों की गुणवत्ता भी बनी रहेगी। व्यापारियों का मानना है कि संगठित मंडी बनने से बाहर के खरीदार भी आकर्षित होंगे और कारोबार का दायरा बढ़ेगा।
खाद्य गुणवत्ता पर जोर
शहर में दो व्यापक एकीकृत खाद्य प्रयोगशालाएं स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिनके लिए वर्ष 2026-27 में 24 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इन प्रयोगशालाओं में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच की जाएगी। फरीदाबाद जैसे औद्योगिक और तेजी से बढ़ते शहर में खाद्य सुरक्षा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर जांच सुविधा उपलब्ध होने से मिलावट पर नियंत्रण में मदद मिल सकती है।
बाढ़ प्रबंधन में नई तकनीक
पिछले साल यमुना का जल स्तर बढ़ने के दौरान यमुना किनारे बसे निचले क्षेत्र वसंतपुर, मोहना व तिगांव के कई इलाकों में कई फीट तक जलभराव हो गया था। इसमें कई स्थानों पर पांच फीट तक पानी भर गया था। बजट में बाढ़ से राहत के लिए नई तकनीक अपनाने की योजना का उल्लेख किया गया है। इसमें ड्रेनेज सिस्टम को आधुनिक बनाना, जल निकासी की निगरानी और त्वरित अलर्ट प्रणाली विकसित करना शामिल हो सकता है। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो बरसात के मौसम में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा। वहीं चांदपुर में बड़ा तालाब बनाकर पानी को एकत्रित करने की योजना पर भी काम चल रहा है।