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Faridabad News: ट्रेनों का संचालन प्रभावित होने से जेब पर बढ़ रहा बोझ
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बस, मेट्रो और ऑटो का लेना पड़ रहा सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का संचालन प्रभावित होने से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली और पलवल की ओर ट्रेन से आवागमन करने वाले यात्रियों को अब अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए बस, मेट्रो, ऑटो और ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ रहा है। पहले जहां एक ही ट्रेन से सफर पूरा हो जाता था, वहीं अब रास्ते में साधन बदलने पड़ रहे हैं। इसका असर यात्रियों के समय के साथ-साथ उनकी जेब पर भी पड़ रहा है।
फरीदाबाद से दिल्ली नौकरी और पढ़ाई के लिए जाने वाले यात्रियों ने बताया कि पहले ट्रेन से आने-जाने में करीब 30 रुपये प्रतिदिन खर्च होते थे। अब ऑटो और मेट्रो का सहारा लेने से यही खर्च बढ़कर करीब 60 से 80 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया है। यानी यात्रियों को रोजाना करीब 30 से 50 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। 26 दिन नियमित सफर करने वाले यात्री के हिसाब से यह अतिरिक्त खर्च करीब 780 से 1300 रुपये महीने का बैठता है।
यात्री सोनू ने बताया कि वह दिल्ली की एक निजी कंपनी में काम करते हैं। ट्रेनें बंद होने से बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। अब यह समझ नहीं आ रहा कि बचाए क्या और खाएं क्या। वहीं, यात्री सोहन ने बताया कि रोजाना लगने वाला थोड़ा-थोड़ा अतिरिक्त किराया महीने के अंत तक एक बड़ी रकम बन जाता है, जिससे हम जैसे कम आय वाले नौकरीपेशा लोगों पर आर्थिक दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का संचालन प्रभावित होने से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली और पलवल की ओर ट्रेन से आवागमन करने वाले यात्रियों को अब अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए बस, मेट्रो, ऑटो और ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ रहा है। पहले जहां एक ही ट्रेन से सफर पूरा हो जाता था, वहीं अब रास्ते में साधन बदलने पड़ रहे हैं। इसका असर यात्रियों के समय के साथ-साथ उनकी जेब पर भी पड़ रहा है।
फरीदाबाद से दिल्ली नौकरी और पढ़ाई के लिए जाने वाले यात्रियों ने बताया कि पहले ट्रेन से आने-जाने में करीब 30 रुपये प्रतिदिन खर्च होते थे। अब ऑटो और मेट्रो का सहारा लेने से यही खर्च बढ़कर करीब 60 से 80 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया है। यानी यात्रियों को रोजाना करीब 30 से 50 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। 26 दिन नियमित सफर करने वाले यात्री के हिसाब से यह अतिरिक्त खर्च करीब 780 से 1300 रुपये महीने का बैठता है।
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यात्री सोनू ने बताया कि वह दिल्ली की एक निजी कंपनी में काम करते हैं। ट्रेनें बंद होने से बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। अब यह समझ नहीं आ रहा कि बचाए क्या और खाएं क्या। वहीं, यात्री सोहन ने बताया कि रोजाना लगने वाला थोड़ा-थोड़ा अतिरिक्त किराया महीने के अंत तक एक बड़ी रकम बन जाता है, जिससे हम जैसे कम आय वाले नौकरीपेशा लोगों पर आर्थिक दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
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