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Faridabad News: तोड़फोड़ का डर, नेहरू कॉलोनी से वाहनों में सामान भरकर ले जा रहे लोग
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फरीदाबाद नेहरू कॉलोनी में मकान खाली करते कॉलोनी वासी। संवाद।
लघु सचिवालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंरा, पुनर्वास की मांग उठाई
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। नेहरू कॉलोनी में नगर निगम की ध्वस्तीकरण कार्रवाई का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। कॉलोनी में रहने वाले कई परिवारों ने अपने घर खाली करने शुरू कर दिए हैं। लोग अपना सामान ट्रकों, पिकअप और अन्य साधनों में भरकर दूसरी जगह ले जा रहे हैं, जबकि कई परिवार अभी भी अपने घरों के बाहर सामान निकालकर आगे की स्थिति का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर मंगलवार को बड़ी संख्या में कॉलोनीवासी सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पुनर्वास की मांग उठाई।
कॉलोनीवासियों का कहना है कि उन्हें हटाने से पहले वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जानी चाहिए। उनका आरोप है कि बिना पुनर्वास के हजारों परिवारों को बेघर किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि अधिकांश परिवार पिछले 30 से 40 वर्षों से यहां रह रहे हैं और उनके बच्चों की पढ़ाई, रोजगार तथा सामाजिक जीवन पूरी तरह इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि नगर निगम की कार्रवाई के बाद कॉलोनी में भय और असमंजस का माहौल बना हुआ है। कई परिवारों की रातों की नींद उड़ चुकी है। लोग दिनभर अपने घरों के बाहर बैठकर प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मकान तोड़ दिए गए तो उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।
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ज्ञापन के माध्यम से कॉलोनीवासियों ने प्रशासन से मांग की कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की उचित व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई न की जाए। लोगों ने कहा कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि कॉलोनियों में आकर वोट मांगते हैं, लेकिन आज जब हजारों परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा है तो उनकी समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं है।
नगर निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा का कहना है कि सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माणों को हटाने के लिए नियमानुसार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मिला है, वहां बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई की जा रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। नेहरू कॉलोनी में नगर निगम की ध्वस्तीकरण कार्रवाई का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। कॉलोनी में रहने वाले कई परिवारों ने अपने घर खाली करने शुरू कर दिए हैं। लोग अपना सामान ट्रकों, पिकअप और अन्य साधनों में भरकर दूसरी जगह ले जा रहे हैं, जबकि कई परिवार अभी भी अपने घरों के बाहर सामान निकालकर आगे की स्थिति का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर मंगलवार को बड़ी संख्या में कॉलोनीवासी सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पुनर्वास की मांग उठाई।
कॉलोनीवासियों का कहना है कि उन्हें हटाने से पहले वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जानी चाहिए। उनका आरोप है कि बिना पुनर्वास के हजारों परिवारों को बेघर किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि अधिकांश परिवार पिछले 30 से 40 वर्षों से यहां रह रहे हैं और उनके बच्चों की पढ़ाई, रोजगार तथा सामाजिक जीवन पूरी तरह इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि नगर निगम की कार्रवाई के बाद कॉलोनी में भय और असमंजस का माहौल बना हुआ है। कई परिवारों की रातों की नींद उड़ चुकी है। लोग दिनभर अपने घरों के बाहर बैठकर प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मकान तोड़ दिए गए तो उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।
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ज्ञापन के माध्यम से कॉलोनीवासियों ने प्रशासन से मांग की कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की उचित व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई न की जाए। लोगों ने कहा कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि कॉलोनियों में आकर वोट मांगते हैं, लेकिन आज जब हजारों परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा है तो उनकी समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं है।
नगर निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा का कहना है कि सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माणों को हटाने के लिए नियमानुसार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मिला है, वहां बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई की जा रही है।