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किसान नहीं जड़ पाए अमूल प्लांट पर ताला
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Mon, 25 Apr 2016 03:07 PM IST
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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी मुआवजा न दिए जाने के विरोध में चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी रहा। पूर्व घोषणा के मुताबिक किसानों ने रविवार को अमूल दुग्ध प्लांट पर तालाबंदी करने की चेतावनी दी थी लेकिन भारी पुलिस बल के सामने उनके हौसले पस्त हो गए।
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लांकि पुलिस की ढील के कारण कुछ किसानों ने तालाबंदी करने की रस्म अदायगी जरूर की। इन किसानों ने ताला न होने की सूरत में प्लांट का गेट कुछ देर बंद रखा। करीब 20 मिनट के विरोध-प्रदर्शन के बाद किसान घर लौट गए। इससे प्रशासन ने राहत की सांस ली। पेश है रिपोर्ट :
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सुबह 10:30 बजे
धरना स्थल पर किसानों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही थी। धरने में जसवंत सैनी और प्रवेश टोंगर आमरण अनशन पर बैठे हुए थे। जबकि बुजुर्ग अलग-अलग टोली में हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे। प्रदर्शन में पहुंचने के लिए महिलाओं में जोश देखने लायक था। युवा तालाबंदी को लेकर खासे उत्साहित थे। ट्रैक्टर-ट्राली में भर कर किसान धरने पर पहुंच रहे थे। किसान ‘इंकलाब जिंदाबाद और लेकर रहेंगे-अपना हक’ जैसे नारे लगा रहे थे। भीड़ एकत्र होने के बाद किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष रामनिवास नागर ने माइक संभाला और संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने विशेष तौर पर युवाओं को तालाबंदी के दौरान संयम बरतने की नसीहत दी।
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सुबह 11:45 बजे
करीब एक घंटे की भाषणबाजी के बाद कमेटी के कोर ग्रुप ने धरना स्थल पर मीटिंग की और तालाबंदी कार्यक्रम पर रणनीति बनाई। बैठक में कई सुझाव आए। ग्रामीण ओमपाल टोंगर ने कहा कि यदि मुआवजा नहीं मिला तो अगले रविवार को किसान अपने-अपने खेतों पर कब्जा लेंगे। तालाबंदी पूरी तरह शांतिपूर्ण होगी। करीब 15 मिनट चर्चा करने के बाद चंदावली निवासी किशन चहल ने माइक संभाला और कमेटी के फैसले की घोषणा की। इस पर किसानों ने हाथ खड़े कर समर्थन किया। सूचना मिलते ही युवाओं का एक दल धरना स्थल से उठकर चलने लगा। लेकिन कमेटी सदस्यों ने उसे रोक लिया और कुछ समय और इंतजार करने को कहा। किसान मोहन डागर ने आमरण अनशन पर बैठे युवा जसंवत सैनी और प्रवेश टोंगर से अनशन खत्म करने की अपील की।
दोपहर 12:30 बजे
धरने में चंदावली गांव की पूर्व सरपंच और हरियाणा किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष डीके शर्मा भी पहुंच गए। कमेटी ने दोनों नेताओं का समर्थन देने पर आभार जताया। इस मौके पर किसान नेता डीके शर्मा ने कहा कि लंबी लड़ाई को लड़ने के लिए जोश के साथ होश भी होना चाहिए। अन्यथा लेने के देने पड़ जाएंगे। पूर्व सरपंच रचना शर्मा ने भी किसानों को आंदोलन की बारीकियां बताईं और कहा कि मुआवजा आज नहीं तो कल मिल जाएगा। तालाबंदी से कोई फायदा नहीं होगा। इसका खासकर युवाओं ने विरोध किया। पूर्व सरपंच को भाषण बीच में रोकना पड़ा। आंदोलन को समर्थन देने अनशनकारी बाबा रामकेवल भी पहुंच गए। भाषण खत्म करके कमेटी ने शांतिपूर्वक मार्च करते हुए अमूल प्लांट पर तालाबंदी के प्रस्थान की घोषणा की।
दोपहर 1:30 बजे
हाथों में बैनर और नारेबाजी करते हुए सैकड़ों किसान अमूल दुग्ध प्लांट पर पहुंचे। एसीपी विष्णुदयाल भारी पुलिस बल के साथ किसानों को कवर कर रहे थे। प्लांट पर पुलिस को देखते ही किसानों के होश उड़ गए, लेकिन कमेटी सदस्यों के जोश से किसानों में भी जोश आ गया। प्लांट पर पहुंचते ही किसानों ने प्लांट में घुसने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने बीच में रोक दिया। डीसीपी भूपेंद्र सिंह किसानों को समझा और कानून को हाथ में न लेने की अपील की। किसानों ने कहा कि हमें मुआवजा दिलाओ अन्यथा यहां से हट जाओ। यह प्लांट हमारी जगह पर बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों महिलाओं ने पुलिसकर्मियों को खूब बुरा-भला कहा।
दोहपर 1:40 बजे
बहस के बीच पुष्पा डागर, हेमवती पुलिस की आंखों में धूल झोंक प्लांट के गेट पर पहुंच गई, जहां चार महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका। प्रदर्शनकारी महिलाएं तालाबंदी करने पर अड़ी हुई थीं। इसी बीच बुजुर्ग रामवती भी पहुंच गए। कहने लगी, तीन साल हो गए, धक्के-धक्के खाते-खाते। प्रशासन कुछ नहीं करता। एसीपी विष्णुदयाल ने बुजुर्ग महिला को समझाया। उन्हें देखकर प्रदर्शनकारी रामनिवास नागर और मोहन डागर भी पहुंच गए। तालाबंदी करने पर अड़ गए। लेकिन किसी के पास ताला ही नहीं था। काफी जद्दोजहद के बाद जब पुलिस नहीं मानी तो प्लांट के गेट को बंद कर तालाबंदी की रस्म अदायगी की। इसके बाद कमेटी ने लोगों को तालाबंदी करने की घोषणा कर कार्यक्रम को खत्म करने की घोषणा की। इसके बाद किसान वापस धरना स्थल पर लौटे।