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औद्योगिक प्लॉट में नकली शराब की फैक्टरी पकड़ी
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fake liquor factory caught by police in faridabad
फरीदाबाद। डबुआ-पाली रोड पर राजेश धर्मकांटा के पास औद्योगिक प्लॉट में चल रही एक नकली शराब की फैक्टरी का क्राइम ब्रांच एनआईटी ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से 12 पेटी तैयार शराब, शराब बनाने का सामान, नकली लेबल और खाली बोतलें बरामद की हैं। जांच में पाया गया कि फैक्टरी को सराय ख्वाजा निवासी ज्ञान चंद और उसका बेटा तिलकराज शर्मा चला रहे थे।
क्राइम ब्रांच एनआईटी प्रभारी नरेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्हें डबुआ पाली रोड पर नकली शराब की फैक्टरी के बारे में सूचना मिली थी। इस पर कार्रवाई करते हुए उन्होंने सोमवार सुबह करीब ग्यारह बजे प्लॉट पर छापेमारी की। जिस प्लॉट में शराब बनाई जा रही थी, वह पंजाब निवासी कारोबारी का है। तिलकराज और उसके पिता उसमें नकली शराब बनाने का धंधा कर रहे थे। दोनों बाप बेटा पहले भी तीन बार नकली शराब बनाने के आरोप में पकड़े जा चुके हैं। वह बीते करीब दो-तीन माह से यहां शराब बना रहे थे। पुलिस के आने की भनक लगते ही दोनों आरोपी मौके से भाग गए। पुलिस उनकी तलाश में जुट गई है। इस शराब की खपत कहां कहां की जा रही थी इसकी भी जांच की जा रही है।
क्राइम ब्रांच प्रभारी ने बताया कि आरोपी स्प्रिट, अल्कोहल और केमिकल मिलाकर नकली शराब तैयार करते थे। शराब की बोतलों पर एक खास ब्रांड का लेबल लगा दिया जाता था। डीसीपी क्राइम मुकेश मल्होत्रा ने बताया कि यह शराब स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। कुछ महीनों पहले भी छांयसा व बल्लभगढ़ के कुछ गांवों में नकली शराब पीने से कुछ लोगों की मौत हो गई थी और आंखों की रोशनी भी चली गई थी।
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क्राइम ब्रांच एनआईटी प्रभारी नरेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्हें डबुआ पाली रोड पर नकली शराब की फैक्टरी के बारे में सूचना मिली थी। इस पर कार्रवाई करते हुए उन्होंने सोमवार सुबह करीब ग्यारह बजे प्लॉट पर छापेमारी की। जिस प्लॉट में शराब बनाई जा रही थी, वह पंजाब निवासी कारोबारी का है। तिलकराज और उसके पिता उसमें नकली शराब बनाने का धंधा कर रहे थे। दोनों बाप बेटा पहले भी तीन बार नकली शराब बनाने के आरोप में पकड़े जा चुके हैं। वह बीते करीब दो-तीन माह से यहां शराब बना रहे थे। पुलिस के आने की भनक लगते ही दोनों आरोपी मौके से भाग गए। पुलिस उनकी तलाश में जुट गई है। इस शराब की खपत कहां कहां की जा रही थी इसकी भी जांच की जा रही है।
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क्राइम ब्रांच प्रभारी ने बताया कि आरोपी स्प्रिट, अल्कोहल और केमिकल मिलाकर नकली शराब तैयार करते थे। शराब की बोतलों पर एक खास ब्रांड का लेबल लगा दिया जाता था। डीसीपी क्राइम मुकेश मल्होत्रा ने बताया कि यह शराब स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। कुछ महीनों पहले भी छांयसा व बल्लभगढ़ के कुछ गांवों में नकली शराब पीने से कुछ लोगों की मौत हो गई थी और आंखों की रोशनी भी चली गई थी।
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