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Faridabad News: दस वर्ष बाद भी शहर में नहीं एक भी ट्रामा सेंटर

Sat, 17 Feb 2024 11:48 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 17 Feb 2024 11:48 PM IST
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Even after ten years there is not a single trauma center in the city
अमर उजाला ब्यूरो
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फरीदाबाद। शहर में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल बेहाल है। दो-दो मंत्री होने के बावजूद सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को ट्रॉमा सेंटर और आईसीयू की सुविधा के लिए दिल्ली एम्स रेफर किया जा रहा है। ऐसे में समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण रास्ते में कई बार उनकी जान भी चली जाती है। हालांकि शहर में ट्रामा सेंटर की मांग 10 सालों से चल रही है लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टरों के अनुसार ट्रामा सेंटर खुलने से 70 फीसदी सड़क दुर्घटना में घायलों की जान बचाई जा सकती है।

औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में 28 लाख की आबादी पर मात्र एक बीके सिविल अस्पताल है। 200 बेड के इस अस्पताल में रोजाना दो हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इमरजेंसी में रोजाना 60-70 से ज्यादा मरीज आते हैं। इनमें आईसीयू और ट्रामा सेंटर की सुविधा नहीं होने की वजह से रोजाना करीब 15 से 20 मरीजों को दिल्ली एम्स रेफर किया जाता है। कई बार मरीजों की हालत गंभीर होने की वजह से रास्ते में ही उनकी मौत हो जाती है।
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सालों से कागजों में बन रही योजना

सरकार की ओर से स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के बड़े-बड़े दावे तो किए जा रहे हैं लेकिन वे केवल कागजों तक ही सीमित हैं। वर्ष 2013 में स्वास्थ्य विभाग ने सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों की जान बचाने के लिए जिले में ट्रामा सेंटर बनवाने की कोशिश थी। इसकी जरूरत को देखते हुए विभाग ने एक व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार कर स्वास्थ्य महानिदेशक और जिला उपायुक्त को भेजी थी। ताकी एनएचएआई से इस सेंटर को विशेष मामले में पास करवाया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार मरीजों को 50 किमी के अंदर इसकी सुविधा मिलनी चाहिए। बीके अस्पताल एम्स अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर से 35 किमी की दूरी पर है। जिला स्वास्थ्य विभाग का क्षेत्र होडल तक को कवर करता है। इसके बावजूद मंजूरी नहीं मिली। एनआईटी-तीन स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राहुल कुमार ने बताया कि अस्पताल इमरजेंसी में रोजाना तीन से पांच मरीज सड़क दुर्घटना के पहुंचते हैं। इनमें ट्रामा केस ज्यादा होते हैं।
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तीन साल में सड़क हादसों में 1500 लोग घायल, लगभग 700 लोगों की जान गई

रोड सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एसके शर्मा ने बताया कि साल 2021 तक में जिले में 505 सड़क हादसों में 211 लोगों की मौत और 423 लोग घायल हुए थे। वहीं, साल 2022 में 589 सड़क हादसों में 253 लोगों की मौत और 452 लोग घायल हुए। दिसंबर 2023 में 540 सड़क हादसों में 228 लोगों की मौत और 450 लोग घायल हुए। इन घायलों में कुछ ऐसे मरीज भी थे जिनको समय पर ट्रामा सेंटर की सुविधा नहीं मिलने से उनकी मौत हो गई।

योजना के संबंध में जानकारी नहीं
दिल्ली एम्स में बने ट्रामा सेंटर के बाद दूसरा सेंटर 50 किमी दूर बनाया जाना है। इसे फरीदाबाद के बजाए पृथला में बनाने की योजना है लेकिन किसी कारण योजना सिरे नहीं चढ़ी। इसकी जानकारी नहीं है। - डॉ. विनय गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
डॉक्टरों से बातचीत
सड़क दुर्घटना में सबसे ज्यादा व्यक्ति को सिर में चोट आती है, जिससे उसका पूरा शरीर कंट्रोल होता है। यदि आधे घंटे के अंदर घायल को उचित उपचार मिल जाए तो मरीज बच सकता है। - डॉ. सुषमा शर्मा, वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट


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शहर में ट्रॉमा सेंटर की बेहद जरूरत है। इसे सरकार को अपना मुख्य एजेंडे में शामिल करना चाहिए। ट्रामा सेंटर खुलने से होडल तक के लाखों लोगों को लाभ मिलेगा। - डॉ. कमल वर्मा, वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट
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