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Faridabad News: पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की कमी से जूझ रहा ईएसआई अस्पताल
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फोटो संख्या: 7
- 50 बेड के अस्पताल में अल्ट्रासाउंड तक की अच्छी सुविधा नहीं, मरीजों को मेडिकल कॉलेज कर दिया जाता है रेफर
- डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल में पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की है भारी कमी
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सरकार के बड़े-बड़े दावे खोखले साबित हो रहे हैं। सेक्टर-8 स्थित 50 ईएसआई अस्पताल में डॉक्टर सहित पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है। अल्ट्रासाउंड भी सप्ताह में केवल एक दिन होते हैं। ऐसे में मरीजों को ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिले में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के दो बड़े अस्पताल हैं। सेक्टर-8 स्थित 50 बेड के ईएसआई अस्पताल का संचालन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है, जबकि एनआईटी-3 स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का संचालन केंद्र सरकार करती है। सेक्टर-8 अस्पताल का निर्माण वर्ष 1984 में शुरू हुआ था। उस समय अस्पताल में 200 बेड निर्धारित किए गए थे। जिससे से एनआईटी-3 स्थित अस्पताल से मरीजों का भार कम किया जा सके। वरिष्ठ डॉ. जसवंत सिंह ने बताया कि राज्य सरकार ने शुरुआत में 50 बेड का चालू किया और 100 बेड एनआईटी 3 अस्पताल से शिफ्ट करवा लिए। आरोप है कि इसके बाद भी केवल 50 बेड का अस्पताल ही चल रहा है। उसमें नियमानुसार पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ की स्थिति
सेक्टर-8 अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल में 33 डॉक्टरों के पद हैं, लेकिन काम कुल 20 ही कर रहे हैं। 43 पैरामेडिकल स्टाफ और नर्स की जरूरत है लेकिन काम केवल 15 कर रहे हैं। लैब टेक्नीशियन 2 होने चाहिए, लेकिन काम एक ही कर रहा है। फार्मासिस्ट की 22 पोस्ट हैं, काम केवल पांच कर रहे हैं। अस्पताल से करीब 13 ग्रामीण क्षेत्रों की डिस्पेंसरियां जुड़ी है। जहां से उच्च स्तरीय इलाज के लिए मरीज रेफर होकर आते हैं। कर्मचारी नेता व एटक के प्रदेश महासचिव बेचू गिरी ने कहा कि पहले ही अस्पताल डॉक्टरों और स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में यहां रेफर होकर आने वाले मरीजों को एनआईटी तीन स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। यही वजह है कि मेडिकल कॉलेज पर मरीजों का दबाव बढ़ता जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज पर बढ़ रहा मरीजों का दबाव
650 बेड के ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रोजाना 4500 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मरीजों की भीड़ बढ़ने के कारण दवा केंद्रों पर मरीजों को दवाइयों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, हालांकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा बुजुर्ग मरीजों के लिए दवाइयों की होम डिलीवरी और काउंटर पर दवा वितरण का समय रात 9 बजे तक कर दिया गया है। इसके बावजूद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉ. जसंवत ने कहा कि यदि सेक्टर-8 स्थित ईएसआई अस्पताल और डिस्पेंसरी स्तर पर ही मरीजों को सेकंडरी केयर लगभग पूर्ण इलाज मिल जाए तो ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज पर मरीजों का दबाव कम हो जाएगा और मरीजों को भी घर के नजदीक अच्छा इलाज मिल सकेगा। उन्हें ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।
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अल्ट्रासाउंड और हड्डियों के ऑपरेशन के लिए मरीजाें को किया जाता है रेफर
डॉक्टरों ने बताया कि सेक्टर-8 अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की एक डॉक्टर है। वह पदोन्नत हो गईं। अब सप्ताह में केवल एक दिन ही आती हैं। इस कारण अल्ट्रासाउंड के मरीजों को ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। यहां अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों की 15 दिन से एक माह की वेटिंग चल रही है, यदि सेक्टर-8 में ही नियमित तौर पर अल्ट्रासाउंड शुरू हो जाए तो मरीजों को काफी राहत मिलेगी। इसी प्रकार हड्डी रोग विशेषज्ञ न होने के कारण उनके मरीज भी ईएसआईसी 3 नंबर में आते हैं।
वर्जन
सेक्टर-8 ईएसआई अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती की प्रक्रिया जारी है। अस्पताल को जल्द नए डॉक्टर और स्टाफ मिलेगा। एक डॉक्टर अल्ट्रासाउंड के लिए समय-समय पर आती हैं। मरीजों की समस्या को देखते हुए स्थायी स्टाफ का भी प्रबंध किया जा रहा है। - डॉ. अनिल मलिक, निदेशक, ईएसआई हेल्थ केयर हरियाणा
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- 50 बेड के अस्पताल में अल्ट्रासाउंड तक की अच्छी सुविधा नहीं, मरीजों को मेडिकल कॉलेज कर दिया जाता है रेफर
- डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल में पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की है भारी कमी
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सरकार के बड़े-बड़े दावे खोखले साबित हो रहे हैं। सेक्टर-8 स्थित 50 ईएसआई अस्पताल में डॉक्टर सहित पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है। अल्ट्रासाउंड भी सप्ताह में केवल एक दिन होते हैं। ऐसे में मरीजों को ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिले में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के दो बड़े अस्पताल हैं। सेक्टर-8 स्थित 50 बेड के ईएसआई अस्पताल का संचालन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है, जबकि एनआईटी-3 स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का संचालन केंद्र सरकार करती है। सेक्टर-8 अस्पताल का निर्माण वर्ष 1984 में शुरू हुआ था। उस समय अस्पताल में 200 बेड निर्धारित किए गए थे। जिससे से एनआईटी-3 स्थित अस्पताल से मरीजों का भार कम किया जा सके। वरिष्ठ डॉ. जसवंत सिंह ने बताया कि राज्य सरकार ने शुरुआत में 50 बेड का चालू किया और 100 बेड एनआईटी 3 अस्पताल से शिफ्ट करवा लिए। आरोप है कि इसके बाद भी केवल 50 बेड का अस्पताल ही चल रहा है। उसमें नियमानुसार पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ की स्थिति
सेक्टर-8 अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल में 33 डॉक्टरों के पद हैं, लेकिन काम कुल 20 ही कर रहे हैं। 43 पैरामेडिकल स्टाफ और नर्स की जरूरत है लेकिन काम केवल 15 कर रहे हैं। लैब टेक्नीशियन 2 होने चाहिए, लेकिन काम एक ही कर रहा है। फार्मासिस्ट की 22 पोस्ट हैं, काम केवल पांच कर रहे हैं। अस्पताल से करीब 13 ग्रामीण क्षेत्रों की डिस्पेंसरियां जुड़ी है। जहां से उच्च स्तरीय इलाज के लिए मरीज रेफर होकर आते हैं। कर्मचारी नेता व एटक के प्रदेश महासचिव बेचू गिरी ने कहा कि पहले ही अस्पताल डॉक्टरों और स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में यहां रेफर होकर आने वाले मरीजों को एनआईटी तीन स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। यही वजह है कि मेडिकल कॉलेज पर मरीजों का दबाव बढ़ता जा रहा है।
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मेडिकल कॉलेज पर बढ़ रहा मरीजों का दबाव
650 बेड के ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रोजाना 4500 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मरीजों की भीड़ बढ़ने के कारण दवा केंद्रों पर मरीजों को दवाइयों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, हालांकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा बुजुर्ग मरीजों के लिए दवाइयों की होम डिलीवरी और काउंटर पर दवा वितरण का समय रात 9 बजे तक कर दिया गया है। इसके बावजूद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉ. जसंवत ने कहा कि यदि सेक्टर-8 स्थित ईएसआई अस्पताल और डिस्पेंसरी स्तर पर ही मरीजों को सेकंडरी केयर लगभग पूर्ण इलाज मिल जाए तो ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज पर मरीजों का दबाव कम हो जाएगा और मरीजों को भी घर के नजदीक अच्छा इलाज मिल सकेगा। उन्हें ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।
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अल्ट्रासाउंड और हड्डियों के ऑपरेशन के लिए मरीजाें को किया जाता है रेफर
डॉक्टरों ने बताया कि सेक्टर-8 अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की एक डॉक्टर है। वह पदोन्नत हो गईं। अब सप्ताह में केवल एक दिन ही आती हैं। इस कारण अल्ट्रासाउंड के मरीजों को ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। यहां अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों की 15 दिन से एक माह की वेटिंग चल रही है, यदि सेक्टर-8 में ही नियमित तौर पर अल्ट्रासाउंड शुरू हो जाए तो मरीजों को काफी राहत मिलेगी। इसी प्रकार हड्डी रोग विशेषज्ञ न होने के कारण उनके मरीज भी ईएसआईसी 3 नंबर में आते हैं।
वर्जन
सेक्टर-8 ईएसआई अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती की प्रक्रिया जारी है। अस्पताल को जल्द नए डॉक्टर और स्टाफ मिलेगा। एक डॉक्टर अल्ट्रासाउंड के लिए समय-समय पर आती हैं। मरीजों की समस्या को देखते हुए स्थायी स्टाफ का भी प्रबंध किया जा रहा है। - डॉ. अनिल मलिक, निदेशक, ईएसआई हेल्थ केयर हरियाणा