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बाजार में सज गए रावण के कुनबे के पुतले
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फरीदाबाद एनआईटी मेंट्रो मोड़ पर रावण के पुतले लेकर ग्राहक की इंतजार में बैठा कारीगर नवाब ।
- फोटो : Faridabad
फरीदाबाद (जोगेंद्र शर्मा)। कोरोना संक्रमण के कारण जहां दशहरा पर बड़े कार्यक्रमों पर रोक है वहीं, बाजार में रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले आ गए हैं। दो से ढाई हजार रुपये के इन पुतलों को लोग अपने घरों में जला सकते हैं। इससे न तो बच्चों को मेला ले जाने की जरूरत पड़ेगी और न ही भीड़भाड़ वाली जगह पर। एनआईटी एक निवासी नवाब ने इन पुतलों को तैयार किया है।
मूलरूप से गाजियाबाद निवासी नवाब ने बताया कि रावण कुनबे के पुतले बनाना उनका पुश्तैनी काम है। परिवार में दो भाई और दो बहन हैं। दोनों भाई भी पुतले बनाते हैं। दशहरा पर हर वर्ष अच्छा कारोबार हो जाता है मगर इस बार कोरोना महामारी के कारण सरकार की ओर से रावण का पुतला जलाने की मंजूरी नहीं मिली। इस कारण बड़े पुतले बनाने का काम ठप है। इसका असर उनकी रोजी-रोटी पर भी पड़ा है।
जैसे-जैसे त्योहार नजदीक आ रहा है, बच्चों में भी घूमने के लिए मेला जाने का उत्साह बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार बच्चों को लुभाने के लिए छह फुट के रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनाए हैं। इनके रेट भी लोगों के बजट में है। बीके चौक स्थित मेट्रो मोड़ के पास तीन दिन से दुकान लगा रखी है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनके बनाए पुतलों को खरीदार जरूर मिलेंगे। नवाब बताते हैं कि छोटे पुतलों को घरों में जलाने के लिए प्रशासन की कोई मंजूरी की जरूरत नहीं है, क्योंकि घरों में मेले जैसी भीड़ नहीं होती है।
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मूलरूप से गाजियाबाद निवासी नवाब ने बताया कि रावण कुनबे के पुतले बनाना उनका पुश्तैनी काम है। परिवार में दो भाई और दो बहन हैं। दोनों भाई भी पुतले बनाते हैं। दशहरा पर हर वर्ष अच्छा कारोबार हो जाता है मगर इस बार कोरोना महामारी के कारण सरकार की ओर से रावण का पुतला जलाने की मंजूरी नहीं मिली। इस कारण बड़े पुतले बनाने का काम ठप है। इसका असर उनकी रोजी-रोटी पर भी पड़ा है।
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जैसे-जैसे त्योहार नजदीक आ रहा है, बच्चों में भी घूमने के लिए मेला जाने का उत्साह बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार बच्चों को लुभाने के लिए छह फुट के रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनाए हैं। इनके रेट भी लोगों के बजट में है। बीके चौक स्थित मेट्रो मोड़ के पास तीन दिन से दुकान लगा रखी है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनके बनाए पुतलों को खरीदार जरूर मिलेंगे। नवाब बताते हैं कि छोटे पुतलों को घरों में जलाने के लिए प्रशासन की कोई मंजूरी की जरूरत नहीं है, क्योंकि घरों में मेले जैसी भीड़ नहीं होती है।
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