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Faridabad News: पराली जलाने की घटनाओं पर रोक के लिए ड्रोन से की जाएगी निगरानी
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विभाग ने मुख्यालय से छह ड्रोन की मांग की
भूपेश जोशी
फरीदाबाद।
जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी व्यवस्था सख्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने मुख्यालय से छह ड्रोन की मांग की है। ड्रोन उपलब्ध होने के बाद जिले के छह गांवों में खेतों की निगरानी की जाएगी। विभाग का मानना है कि ड्रोन से बड़े क्षेत्र पर नजर रखना आसान होगा और पराली जलाने की घटनाओं की तत्काल जानकारी मिल सकेगी।
कृषि विभाग के अनुसार जिले में करीब 25 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि है। धान की कटाई के बाद खेतों में फसल अवशेष यानी पराली बच जाती है। कई बार किसान अगली फसल की तैयारी के लिए पराली में आग लगा देते हैं। इससे वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी की उर्वरता पर भी असर पड़ता है। इसी को देखते हुए विभाग की ओर से पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है।
छह गांव में होगी ड्रोन से निगरानी
ड्रोन के माध्यम से नेकपुर, अलावलपुर (धौज), शेरपुर खादर, छांयसा, करनेरा और मोहना गांवों की निगरानी की जाएगी। विभाग के अधिकारियों के अनुसार खेत-खेत जाकर निगरानी करना चुनौतीपूर्ण है, ऐसे में ड्रोन से पराली जलाने वालों की पहचान कर समय पर कार्रवाई करना आसान होगा। विभाग किसानों को फसल अवशेष न जलाने और वैकल्पिक प्रबंधन के लिए जागरूक कर रहा है। पिछले साल जिले में पराली जलाने के दो मामले सामने आए थे। इनमें एक शेरपुर खादर और दूसरा करनेरा गांव का था। ड्रोन मिलने के बाद निगरानी और सख्ती बढ़ने की उम्मीद है।
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वर्जन-
पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए मुख्यालय से छह ड्रोन की मांग की गई है। ड्रोन मिलने के बाद चिन्हित गांवों में नियमित निगरानी की जाएगी। इससे खेतों में पराली जलाने की घटनाओं की तुरंत जानकारी मिलेगी और नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।- आनंद प्रकाश, तकनीकी सहायक, कृषि विभाग
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भूपेश जोशी
फरीदाबाद।
जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी व्यवस्था सख्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने मुख्यालय से छह ड्रोन की मांग की है। ड्रोन उपलब्ध होने के बाद जिले के छह गांवों में खेतों की निगरानी की जाएगी। विभाग का मानना है कि ड्रोन से बड़े क्षेत्र पर नजर रखना आसान होगा और पराली जलाने की घटनाओं की तत्काल जानकारी मिल सकेगी।
कृषि विभाग के अनुसार जिले में करीब 25 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि है। धान की कटाई के बाद खेतों में फसल अवशेष यानी पराली बच जाती है। कई बार किसान अगली फसल की तैयारी के लिए पराली में आग लगा देते हैं। इससे वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी की उर्वरता पर भी असर पड़ता है। इसी को देखते हुए विभाग की ओर से पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है।
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छह गांव में होगी ड्रोन से निगरानी
ड्रोन के माध्यम से नेकपुर, अलावलपुर (धौज), शेरपुर खादर, छांयसा, करनेरा और मोहना गांवों की निगरानी की जाएगी। विभाग के अधिकारियों के अनुसार खेत-खेत जाकर निगरानी करना चुनौतीपूर्ण है, ऐसे में ड्रोन से पराली जलाने वालों की पहचान कर समय पर कार्रवाई करना आसान होगा। विभाग किसानों को फसल अवशेष न जलाने और वैकल्पिक प्रबंधन के लिए जागरूक कर रहा है। पिछले साल जिले में पराली जलाने के दो मामले सामने आए थे। इनमें एक शेरपुर खादर और दूसरा करनेरा गांव का था। ड्रोन मिलने के बाद निगरानी और सख्ती बढ़ने की उम्मीद है।
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पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए मुख्यालय से छह ड्रोन की मांग की गई है। ड्रोन मिलने के बाद चिन्हित गांवों में नियमित निगरानी की जाएगी। इससे खेतों में पराली जलाने की घटनाओं की तुरंत जानकारी मिलेगी और नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।- आनंद प्रकाश, तकनीकी सहायक, कृषि विभाग