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Faridabad News: पेट में लगातार भारीपन और दर्द को न करें नजरअंदाज
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हर महीने 3 से 4 महिलाओं में ओवेरियन कैंसर के मामले आ रहे सामने
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले में लगातार ओवेरियन कैंसर के मामलों में वृद्धि हो रही है। निजी अस्पताल की ओपीडी में हर महीने 3 से 4 महिलाओं में ओवेरियन कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। बीमारी बढ़ने पर कैंसर लिवर, फेफड़ों और हड्डियों तक फैल सकता है।
महिलाओं में बढ़ते ओवेरियन कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर वर्ष 8 मई को वर्ल्ड ओवेरियन कैंसर डे मनाया जाता है। निजी अस्पताल की सीनियर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रुकैया अहमद मीर ने बताया कि अंडाशय में होने वाला ओवेरियन कैंसर महिलाओं में आम कैंसरों में शामिल है। इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है, क्योंकि करीब 70 प्रतिशत मामलों में बीमारी एडवांस्ड स्टेज में पता चलती है।
उन्होंने बताया कि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण बहुत कम दिखाई देते हैं। पेट में लगातार गैस बनना, निचले हिस्से में भारीपन या असहनीय दर्द, पेट फूलना, भूख कम लगना, वजन घटना और पेट में पानी भरना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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50 से 60 वर्ष की महिलाओं में ज्यादा खतरा
डॉ. मीर के अनुसार, जिन महिलाओं के परिवार में ब्रेस्ट या ओवेरियन कैंसर की हिस्ट्री है, उनमें इसका खतरा अधिक रहता है। मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन, बच्चे न होना और एंडोमेट्रियोसिस भी जोखिम बढ़ाते हैं। यह कैंसर आमतौर पर 50 से 60 वर्ष की महिलाओं में मेनोपॉज के बाद अधिक देखा जाता है। उन्होंने कहा कि शुरुआती स्टेज में सर्जरी से प्रभावी इलाज संभव है, जबकि एडवांस्ड स्टेज में सर्जरी, कीमोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी की जरूरत पड़ती है। महिलाओं को नियमित जांच, संतुलित आहार और व्यायाम अपनाने की सलाह दी गई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले में लगातार ओवेरियन कैंसर के मामलों में वृद्धि हो रही है। निजी अस्पताल की ओपीडी में हर महीने 3 से 4 महिलाओं में ओवेरियन कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। बीमारी बढ़ने पर कैंसर लिवर, फेफड़ों और हड्डियों तक फैल सकता है।
महिलाओं में बढ़ते ओवेरियन कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर वर्ष 8 मई को वर्ल्ड ओवेरियन कैंसर डे मनाया जाता है। निजी अस्पताल की सीनियर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रुकैया अहमद मीर ने बताया कि अंडाशय में होने वाला ओवेरियन कैंसर महिलाओं में आम कैंसरों में शामिल है। इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है, क्योंकि करीब 70 प्रतिशत मामलों में बीमारी एडवांस्ड स्टेज में पता चलती है।
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उन्होंने बताया कि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण बहुत कम दिखाई देते हैं। पेट में लगातार गैस बनना, निचले हिस्से में भारीपन या असहनीय दर्द, पेट फूलना, भूख कम लगना, वजन घटना और पेट में पानी भरना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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50 से 60 वर्ष की महिलाओं में ज्यादा खतरा
डॉ. मीर के अनुसार, जिन महिलाओं के परिवार में ब्रेस्ट या ओवेरियन कैंसर की हिस्ट्री है, उनमें इसका खतरा अधिक रहता है। मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन, बच्चे न होना और एंडोमेट्रियोसिस भी जोखिम बढ़ाते हैं। यह कैंसर आमतौर पर 50 से 60 वर्ष की महिलाओं में मेनोपॉज के बाद अधिक देखा जाता है। उन्होंने कहा कि शुरुआती स्टेज में सर्जरी से प्रभावी इलाज संभव है, जबकि एडवांस्ड स्टेज में सर्जरी, कीमोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी की जरूरत पड़ती है। महिलाओं को नियमित जांच, संतुलित आहार और व्यायाम अपनाने की सलाह दी गई है।