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Faridabad News: फेफड़ों का कैंसर...बिगड़ती जीवनशैली का जानलेवा खेल
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फेफड़े में कैंसर के बढ़ते जोखिम का प्रमुख कारण बिगड़ती जीवनशैली
पुरुषों में फेफड़ों में कैंसर होने का खतरा सबसे ज्यादा, युवा ज्यादा प्रभावित
भारती दुबे
फरीदाबाद। फेफड़े में कैंसर के मामलों में चिंताजनक वृद्धि हुई है, जो कैंसर के बढ़ने का बड़ा कारण है। जिले में फेफड़े में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग पौष्टिक भोजन छोड़कर जंक फूड, तला भुना और शक्करयुक्त पेय की ओर भाग रहे हैं। निजी अस्पताल में कैंसर के लक्षण लेकर रोजाना करीब 20 से 25 उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें युवा भी शामिल हैं।
डॉक्टर की मानें तो तंबाकू, शराब और व्यायाम की कमी शरीर को कमजोर करती है। इन कारणों से फेफड़े पर अधिक असर पड़ता है और कैंसर का विकास हो सकता है। ऐसे में निजी अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 20 से 25 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, जिनमें फेफड़े में कैंसर के लक्षण दिखाई देते हैं। 25 मरीजों में लगभग 8 मरीज कैंसर से ग्रसित पाए जाते हैं, जिनका उपचार किया जाता है। अब धीरे- धीरे युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज करने से बढ़ रहा खतरा
निजी अस्पताल में क्लिनिकल डायरेक्टर और एचओडी डॉ. मोहित शर्मा ने बताया कि अत्यधिक गर्मी, प्रदूषण और निरंतर मौसम बदलाव से लोगों का प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, जिससे लोग जल्दी बीमार हो जाते हैं। ऐसे में वायु प्रदूषण से निकलने वाले घातक रसायन और धूल के कण फेफड़ों पर सीधे प्रभाव डालते हैं, इससे फेफड़ों में कैंसर का खतरा चार गुना बढ़ जाता है। लोग अक्सर कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण भविष्य में मरीज को भारी परेशानी होती है और शरीर विकसित नहीं हो पाता। बीमारी का देरी से पता चलने पर मरीजों को अधिक समस्या हो रही है। इसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।
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धूल और कूड़ा जलाने से उठता धुंआ कर रहा फेफड़ों को खराब
विशेषज्ञों की मानें तो शहर में सड़कें बदहाल हैं, जगह-जगह गड्ढे हैं और इनसे उड़ती धूल हवा में जहर घोल रही है। वहीं, जलते कूड़े से निकलने वाली गैस भी युवा के फेफड़ों को प्रभावित कर रही है। लगातार सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों की बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं और इसका सबसे ज्यादा असर युवा वर्ग पर देखने को मिल रहा है। इसके अलावा ट्रैफिक जाम के दौरान और तेज हवाओं में यह समस्या और भी विकराल हो जाती है।
समय रहते डॉक्टर से कराएं जांच
डॉ. मोहित ने बताया कि फेफड़े में कैंसर को रोकने के लिए समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराएं। इसके साथ ही जागरूकता बढ़ाना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना संभव है। हम अपने शरीर की सुनें, नियमित रूप से डॉक्टर से चेकअप कराएं। वहीं, बुरी आदतों से बचाव करें, जो बड़ी बीमारियों को जन्म दी सकती हैं।
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पुरुषों में फेफड़ों में कैंसर होने का खतरा सबसे ज्यादा, युवा ज्यादा प्रभावित
भारती दुबे
फरीदाबाद। फेफड़े में कैंसर के मामलों में चिंताजनक वृद्धि हुई है, जो कैंसर के बढ़ने का बड़ा कारण है। जिले में फेफड़े में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग पौष्टिक भोजन छोड़कर जंक फूड, तला भुना और शक्करयुक्त पेय की ओर भाग रहे हैं। निजी अस्पताल में कैंसर के लक्षण लेकर रोजाना करीब 20 से 25 उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें युवा भी शामिल हैं।
डॉक्टर की मानें तो तंबाकू, शराब और व्यायाम की कमी शरीर को कमजोर करती है। इन कारणों से फेफड़े पर अधिक असर पड़ता है और कैंसर का विकास हो सकता है। ऐसे में निजी अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 20 से 25 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, जिनमें फेफड़े में कैंसर के लक्षण दिखाई देते हैं। 25 मरीजों में लगभग 8 मरीज कैंसर से ग्रसित पाए जाते हैं, जिनका उपचार किया जाता है। अब धीरे- धीरे युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
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प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज करने से बढ़ रहा खतरा
निजी अस्पताल में क्लिनिकल डायरेक्टर और एचओडी डॉ. मोहित शर्मा ने बताया कि अत्यधिक गर्मी, प्रदूषण और निरंतर मौसम बदलाव से लोगों का प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, जिससे लोग जल्दी बीमार हो जाते हैं। ऐसे में वायु प्रदूषण से निकलने वाले घातक रसायन और धूल के कण फेफड़ों पर सीधे प्रभाव डालते हैं, इससे फेफड़ों में कैंसर का खतरा चार गुना बढ़ जाता है। लोग अक्सर कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण भविष्य में मरीज को भारी परेशानी होती है और शरीर विकसित नहीं हो पाता। बीमारी का देरी से पता चलने पर मरीजों को अधिक समस्या हो रही है। इसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।
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धूल और कूड़ा जलाने से उठता धुंआ कर रहा फेफड़ों को खराब
विशेषज्ञों की मानें तो शहर में सड़कें बदहाल हैं, जगह-जगह गड्ढे हैं और इनसे उड़ती धूल हवा में जहर घोल रही है। वहीं, जलते कूड़े से निकलने वाली गैस भी युवा के फेफड़ों को प्रभावित कर रही है। लगातार सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों की बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं और इसका सबसे ज्यादा असर युवा वर्ग पर देखने को मिल रहा है। इसके अलावा ट्रैफिक जाम के दौरान और तेज हवाओं में यह समस्या और भी विकराल हो जाती है।
समय रहते डॉक्टर से कराएं जांच
डॉ. मोहित ने बताया कि फेफड़े में कैंसर को रोकने के लिए समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराएं। इसके साथ ही जागरूकता बढ़ाना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना संभव है। हम अपने शरीर की सुनें, नियमित रूप से डॉक्टर से चेकअप कराएं। वहीं, बुरी आदतों से बचाव करें, जो बड़ी बीमारियों को जन्म दी सकती हैं।