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नौ साल पहले फरीदाबाद से उजाड़ी हरियाली, बदले में मेवात में पौधरोपण की तैयारी
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फरीदाबाद (अशेषांश सिंह)। बदरपुर बॉर्डर से बल्लभगढ़ मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण के दौरान करीब नौ साल पहले सात हजार पेड़ विकास की बली चढ़ गए। बदले में दस गुना पेड़ यहां लगाए जाने थे। लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण पौधरोपण नहीं किया गया। हालांकि एनएचएआई की ओर से नए सिरे से पेड़-पौधे लगाए जाने के लिए करीब 37 लाख रुपये का भुगतान भी किया गया लेकिन मामला आज तक ठंडे बस्ते में हैं। जब आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी गई तो जवाब मिला कि जिन पेड़ों को मेट्रो कॉरिडोर निर्माण के समय काट दिया गया था। उसकी एवज में मेवात में जल्द पौध रोपण किया जाएगा।
2011-12 में बदरपुर बॉर्डर से बल्लभगढ़ मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण में अड़चन पड़ने पर करीब सात हजार से अधिक पेड़ों की कटाई की गई थी। काटे गए पेड़ों के बदले नए पौधे लगाने थे। इसके एवज में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) की ओर से वन विभाग को 2014 में 37,89,386 रुपये का भुगतान कर दिया गया था। लेकिन रुपये मिलने के बाद वन विभाग ने पौधरोपण के लिए कोई कदम नहीं उठाए।
जब पर्यावरण प्रेमी भूपाल सिंह ने इस संबंध में आरटीआई के तहत जानकारी मांगी तो विभाग में खलबली मच गई। पहले तो विभाग की ओर से सूचना नहीं दी गई। लेकिन जब दो साल की लंबी लड़ाई लड़ने के बाद राज्य सूचना आयोग ने अधिकारियों को तलब कर सूचना देने का आदेश जारी किया तो इसके बाद अधिकारियों ने कार्यकर्ता को सूचना उपलब्ध कराई। उप वन संरक्षक फरीदाबाद की ओर से जानकारी दी गई कि बदरपुर बॉर्डर से बल्लभगढ़ तक कोई पौधरोपण नहीं किया गया है और भविष्य में यहां कोई पौधरोपण का भी प्रस्ताव नहीं किया गया।
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विभाग की ओर से इसके बदले में मेवात क्षेत्र में पौधरोपण करने की बात कही गई है। यानी पेड़ काटे गए फरीदाबद-बल्लभगढ़ क्षेत्र में और बदले में लगाए जाएंगे मेवात में। वहीं, आईएफएस के जिला वन अधिकारी राज कुमार ने बताया कि इस मामले की जानकारी नहीं है। मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जल्द लाई जाएगी।
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2011-12 में बदरपुर बॉर्डर से बल्लभगढ़ मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण में अड़चन पड़ने पर करीब सात हजार से अधिक पेड़ों की कटाई की गई थी। काटे गए पेड़ों के बदले नए पौधे लगाने थे। इसके एवज में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) की ओर से वन विभाग को 2014 में 37,89,386 रुपये का भुगतान कर दिया गया था। लेकिन रुपये मिलने के बाद वन विभाग ने पौधरोपण के लिए कोई कदम नहीं उठाए।
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जब पर्यावरण प्रेमी भूपाल सिंह ने इस संबंध में आरटीआई के तहत जानकारी मांगी तो विभाग में खलबली मच गई। पहले तो विभाग की ओर से सूचना नहीं दी गई। लेकिन जब दो साल की लंबी लड़ाई लड़ने के बाद राज्य सूचना आयोग ने अधिकारियों को तलब कर सूचना देने का आदेश जारी किया तो इसके बाद अधिकारियों ने कार्यकर्ता को सूचना उपलब्ध कराई। उप वन संरक्षक फरीदाबाद की ओर से जानकारी दी गई कि बदरपुर बॉर्डर से बल्लभगढ़ तक कोई पौधरोपण नहीं किया गया है और भविष्य में यहां कोई पौधरोपण का भी प्रस्ताव नहीं किया गया।
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विभाग की ओर से इसके बदले में मेवात क्षेत्र में पौधरोपण करने की बात कही गई है। यानी पेड़ काटे गए फरीदाबद-बल्लभगढ़ क्षेत्र में और बदले में लगाए जाएंगे मेवात में। वहीं, आईएफएस के जिला वन अधिकारी राज कुमार ने बताया कि इस मामले की जानकारी नहीं है। मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जल्द लाई जाएगी।