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एसआरएस घोटाला : अनिल जिंदल समेत तीन निदेशक एक और मामले में गिरफ्तार
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एसआरएस घोटाला : अनिल जिंदल समेत तीन निदेशक एक और मामले में गिरफ्तार
फरीदाबाद। एसआरएस घोटाले के मुख्य आरोपी ग्रुप के चेयरमैन अनिल जिंदल सहित दो निदेशकों को पुलिस की आर्थिक अपराध जांच शाखा ने दो दिन के रिमांड पर लिया था। पुलिस ने धोखाधड़ी के एक और मामले में गिरफ्तार कर पूछताछ की। रिमांड समाप्त होने पर पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
आर्थिक अपराध जांच शाखा ने चेयरमैन अनिल जिंदल के अलावा निदेशक नानक चंद और राजेश सिंगला को सेक्टर-31 थाने में 20 अप्रैल 2018 को किशन लाल गेरा की शिकायत पर दर्ज मामले में रिमांड पर लिया था। गेरा ने शिकायत में बताया था कि उसने अपने ऑफिस और उनकी पत्नी ने फ्लैट के लिए 27-27 लाख रुपये अधिक जमा करवाए थे। गेरा का आरोप है कि उन्हें बताया गया था कि इस प्रोजेक्ट के लिए उनके पास सभी तरह के अनापत्ति प्रमाण पत्र हैं। उन्होंने पूरे रुपये जमा करवा दिए थे। इसके बावजूद उन्हें न तो प्लॉट मिला और न ही ऑफिस की जगह मिली। इस मामले में पुलिस ने दो दिन पहले तीनों आरोपियों को अदालत से प्रोडक्शन वारंट पर लेकर गिरफ्तार किया और पूछताछ के लिए अदालत से रिमांड हासिल किया। जांच अधिकारी ने बताया कि इस मामले में तीनों आरोपियों से पूछताछ के बाद शुक्रवार को रिमांड समाप्त हो गया। तीनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें अदालत में पेश किया गया। अदालत ने तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
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फरीदाबाद। एसआरएस घोटाले के मुख्य आरोपी ग्रुप के चेयरमैन अनिल जिंदल सहित दो निदेशकों को पुलिस की आर्थिक अपराध जांच शाखा ने दो दिन के रिमांड पर लिया था। पुलिस ने धोखाधड़ी के एक और मामले में गिरफ्तार कर पूछताछ की। रिमांड समाप्त होने पर पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
आर्थिक अपराध जांच शाखा ने चेयरमैन अनिल जिंदल के अलावा निदेशक नानक चंद और राजेश सिंगला को सेक्टर-31 थाने में 20 अप्रैल 2018 को किशन लाल गेरा की शिकायत पर दर्ज मामले में रिमांड पर लिया था। गेरा ने शिकायत में बताया था कि उसने अपने ऑफिस और उनकी पत्नी ने फ्लैट के लिए 27-27 लाख रुपये अधिक जमा करवाए थे। गेरा का आरोप है कि उन्हें बताया गया था कि इस प्रोजेक्ट के लिए उनके पास सभी तरह के अनापत्ति प्रमाण पत्र हैं। उन्होंने पूरे रुपये जमा करवा दिए थे। इसके बावजूद उन्हें न तो प्लॉट मिला और न ही ऑफिस की जगह मिली। इस मामले में पुलिस ने दो दिन पहले तीनों आरोपियों को अदालत से प्रोडक्शन वारंट पर लेकर गिरफ्तार किया और पूछताछ के लिए अदालत से रिमांड हासिल किया। जांच अधिकारी ने बताया कि इस मामले में तीनों आरोपियों से पूछताछ के बाद शुक्रवार को रिमांड समाप्त हो गया। तीनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें अदालत में पेश किया गया। अदालत ने तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
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