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सैनिक विहार में प्लॉट के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप

Thu, 26 Jul 2018 09:44 PM IST
Updated Thu, 26 Jul 2018 09:44 PM IST
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सैनिक विहार में प्लॉट के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप
प्लॉट के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप
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- निवेशकों ने पुलिस आयुक्त को दी शिकायत, आर्थिक अपराध जांच शाखा को सौंपी जांच
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सैनिक विहार सोसायटी के नाम पर निवेशकों के साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में बुधवार को पीड़ित लोगों ने पुलिस आयुक्त अमिताभ सिंह ढिल्लो से मुलाकात कर शिकायत दी। पुलिस आयुक्त ने मामले की जांच आर्थिक अपराध जांच शाखा को सौंप दी है।
सैनिक विहार सोसायटी में निवेश करने वाले लोगों की एसोसिएशन के अध्यक्ष आरवी सिंह ने बताया कि सैनिक कॉलोनी सोसायटी ने वर्ष 1997 में सेक्टर-88 में सैनिक विहार सोसायटी के लिए आवेदन मांगे थे। उस समय ड्रा में 345 लोगों का नाम आया था और उन्होंने प्लॉट के लिए रुपये जमा करवा दिए थे। सोसायटी ने 90, 150, 250, 350 व 500 गज के प्लॉट के लिए आवेदन मांगे थे। आरवी सिंह के अनुसार वर्ष 2005 में सोसायटी ने दोबारा आवेदन निकाले और दोबारा 330 प्लॉट तथा 2011 में 44 प्लॉट फिर निकाले गए। सोसायटी समय-समय पर आवेदन तो मांगती रही, मगर धरातल पर कुछ नहीं था। आरवी सिंह के अनुसार 2011 में ही सोसायटी के पदाधिकारियों ने निवेशकों को बताया कि उनके पास 57 एकड़ जमीन है तथा आसपास और जमीन नहीं मिल रही है। ऐसे में सोसायटी उन्हें प्लॉट देने की बजाय फ्लैट देगी और उसकी एवज में उन्हें कोई भुगतान नहीं करना होगा।
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पहले से ही लाखों रुपये फंसा चुके निवेशक इस पर भी संतुष्ट थे कि प्लॉट की जगह फ्लैट ही सही। मगर 2014 में सोसायटी ने निवेशकों को फिर झटका दिया और कहा कि उनका जिस बिल्डर के साथ करार था, वह भाग गया है और अब दूसरे बिल्डर के साथ बात चल रही है। मगर इसके लिए लोगों को और भुगतान करना होगा। सोसायटी की ओर से 10 से 28 लाख रुपये मांगे गए थे। सिंह के अनुसार 700 से अधिक निवेशकों नें करीब 150 करोड़ से अधिक पैसा जमा करवा रखा है, मगर दस साल में आज तक न तो प्लॉट का पता और न ही फ्लैट मिले हैं। इस साल जनवरी में सोसायटी ने निवेशकों को बहलाने के लिए ड्रा निकाल कर फ्लैट नंबर दे दिए। मगर आज तक उनके लेटर भी नहीं मिले हैं। ऐसे में परेशान निवेशकों ने इसकी शिकायत पुलिस आयुक्त से की है। पुलिस आयुक्त ने आर्थिक अपराध जांच शाखा को मामले की जांच सौंप दी है।
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