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फर्जीवाड़े में ठेकेदार गिरफ्तार
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फरीदाबाद। नगर निगम में हुए 200 करोड़ के घोटाले में राज्य सतर्कता ब्यूरो (विजिलेंस) की टीम ने पहली कार्रवाई की है। ब्यूरो की टीम ने मंगलवार शाम हरिद्वार से एक ठेकेदार को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान सेक्टर-82 स्थित एसपीआर सोसाइटी निवासी सतवीर के रूप में की गई है। आरोप है कि सतवीर ने वार्ड-14 में टाइल्स इंटरलॉकिंग के कार्य में करीब 55 लाख रुपये के बदले फर्जी बिल लगाकर करीब दो करोड़ रुपये की निकासी करा ली। फिलहाल ब्यूरो ने आरोपी को अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए छह दिन की रिमांड पर लिया है। इससे निगम के कई अधिकारियों की सांसें अटक गई हैं। उन पर व अन्य पर भी गाज गिरने की आशंका बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस ने दो दिन पहले ही निगम के कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। हालांकि मुकदमे में किन-किन अधिकारियों का नाम है, इसका खुलासा नहीं किया गया है। बावजूद विजिलेंस की ओर से बड़ी कार्रवाई की गई है। घोटाले के आरोपी ठेकेदार सतवीर को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार ठेकेदार पर आरोप है कि निगम के इंजीनियरिंग और अकाउंट ब्रांच के अधिकारियों से सांठगांठ करके फर्जी बिल लगाकर 55 लाख रुपये के बदले दो करोड़ का भुगतान करा लिया था। इसकी शिकायत बीते दिनों पार्षद आदि कर चुके हैं।
यह है पूरा मामला
निवर्तमान पार्षद दीपक चौधरी, महेंद्र सरपंच, सुरेंद्र अग्रवाल ने साल 2020 में निगम प्रशासन को शिकायत देते हुए आरोप लगाया था कि निगम अधिकारियों ने ठेकेदार के साथ मिलकर कई वार्डों में बगैर कोई विकास कार्य कराए ही करोड़ों का घोटाला किया है। उक्त पार्षदों का आरोप है कि जहां के विकास कार्य के लिए बिल पास कराया गया, वहां कोई काम नहीं हुआ लेकिन फर्जी बिल लगाकर उसका निगम से भुगतान हो गया। पार्षदों के मुताबिक ये रकम करीब 50 करोड़ से अधिक की है। निगम सदन की बैठक में भी कई बार यह मुद्दा पार्षद उठा चुके हैं।
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निवर्तमान पार्षद जसवंत सिंह ने भी की थी शिकायत
वार्ड नंबर-14 के निवर्तमान पार्षद जसवंत सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2018 में एक मामला उठाया था। राज्य सतर्कता ब्यूरो को दी शिकायत में बताया था कि उनके वार्ड स्थित एनआईटी-पांच के कई ब्लॉक में इंटरलॉकिंग टाइल लगाने का कार्य किया गया था। इसमें कुल 55 लाख रुपये लागत आने की बातें बताई गई थी, लेकिन ठेकेदार ने कोई काम नहीं किया। निगम निगम के अकाउंट ब्रांच से जानकारी मिली कि ठेकेदार को बिना काम किए ही 55 लाख रुपये के बदले दो करोड़ रुपये पास कर दिए गए हैं। उसे दो करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। निवर्तमान पार्षद जसवंत सिंह ने बताया कि निगम के घोटाले में विजिलेंस की टीम ने पहली गिरफ्तारी की है।
बिना सिले हुए कपड़े पहनने की शपथ ली थी
एनआईटी विधायक नीरज शर्मा ने भी विधानसभा सत्र में निगम के घोटाले का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस मामले में दो-दो बार जांच भी हो चुकी है लेकिन अभी तक न तो किसी अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई। उन्होंने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज न होने तक बिना सिले हुए कपड़े पहनने की शपथ ली थी। ऐसे में वह इस समय बिना सिले कपड़े पहने पूरे क्षेत्र में घूम रहे हैं। सदन में भी बिना सिले कपड़े पहने पहुंचे थे।
सतर्कता आयोग द्वारा 200 करोड़ के घोटाले में सतवीर नामक ठेकेदार को गिरफ्तार करने की बात सामने आई है। अगर निगम घोटाले की सही तरीके से जांच की जाए तो यह कई हजार करोड़ों का घोटाला निकलेगा। मुझे ऐसा लगता है सरकार सिर्फ छोटी मछलियों को पकड़कर बड़े मगरमच्छों को बचाना चाहती है क्योंकि इस भ्रष्टाचार में सरकार के कई बड़े-बड़े अधिकार संलिप्त हैं।
- नीरज शर्मा, विधायक, एनआईटी
मंगलवार शाम आरोपी ठेकेदार सतवीर को गिरफ्तार किया गया है। उसे अदालत में पेश कर छह दिन की रिमांड पर पूछताछ के लिए लिया गया है। अभी घोटाले की जांच की जा रही है। जल्द ही और आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी।
- अनिल कुुमार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक
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सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस ने दो दिन पहले ही निगम के कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। हालांकि मुकदमे में किन-किन अधिकारियों का नाम है, इसका खुलासा नहीं किया गया है। बावजूद विजिलेंस की ओर से बड़ी कार्रवाई की गई है। घोटाले के आरोपी ठेकेदार सतवीर को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार ठेकेदार पर आरोप है कि निगम के इंजीनियरिंग और अकाउंट ब्रांच के अधिकारियों से सांठगांठ करके फर्जी बिल लगाकर 55 लाख रुपये के बदले दो करोड़ का भुगतान करा लिया था। इसकी शिकायत बीते दिनों पार्षद आदि कर चुके हैं।
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यह है पूरा मामला
निवर्तमान पार्षद दीपक चौधरी, महेंद्र सरपंच, सुरेंद्र अग्रवाल ने साल 2020 में निगम प्रशासन को शिकायत देते हुए आरोप लगाया था कि निगम अधिकारियों ने ठेकेदार के साथ मिलकर कई वार्डों में बगैर कोई विकास कार्य कराए ही करोड़ों का घोटाला किया है। उक्त पार्षदों का आरोप है कि जहां के विकास कार्य के लिए बिल पास कराया गया, वहां कोई काम नहीं हुआ लेकिन फर्जी बिल लगाकर उसका निगम से भुगतान हो गया। पार्षदों के मुताबिक ये रकम करीब 50 करोड़ से अधिक की है। निगम सदन की बैठक में भी कई बार यह मुद्दा पार्षद उठा चुके हैं।
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निवर्तमान पार्षद जसवंत सिंह ने भी की थी शिकायत
वार्ड नंबर-14 के निवर्तमान पार्षद जसवंत सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2018 में एक मामला उठाया था। राज्य सतर्कता ब्यूरो को दी शिकायत में बताया था कि उनके वार्ड स्थित एनआईटी-पांच के कई ब्लॉक में इंटरलॉकिंग टाइल लगाने का कार्य किया गया था। इसमें कुल 55 लाख रुपये लागत आने की बातें बताई गई थी, लेकिन ठेकेदार ने कोई काम नहीं किया। निगम निगम के अकाउंट ब्रांच से जानकारी मिली कि ठेकेदार को बिना काम किए ही 55 लाख रुपये के बदले दो करोड़ रुपये पास कर दिए गए हैं। उसे दो करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। निवर्तमान पार्षद जसवंत सिंह ने बताया कि निगम के घोटाले में विजिलेंस की टीम ने पहली गिरफ्तारी की है।
बिना सिले हुए कपड़े पहनने की शपथ ली थी
एनआईटी विधायक नीरज शर्मा ने भी विधानसभा सत्र में निगम के घोटाले का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस मामले में दो-दो बार जांच भी हो चुकी है लेकिन अभी तक न तो किसी अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई। उन्होंने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज न होने तक बिना सिले हुए कपड़े पहनने की शपथ ली थी। ऐसे में वह इस समय बिना सिले कपड़े पहने पूरे क्षेत्र में घूम रहे हैं। सदन में भी बिना सिले कपड़े पहने पहुंचे थे।
सतर्कता आयोग द्वारा 200 करोड़ के घोटाले में सतवीर नामक ठेकेदार को गिरफ्तार करने की बात सामने आई है। अगर निगम घोटाले की सही तरीके से जांच की जाए तो यह कई हजार करोड़ों का घोटाला निकलेगा। मुझे ऐसा लगता है सरकार सिर्फ छोटी मछलियों को पकड़कर बड़े मगरमच्छों को बचाना चाहती है क्योंकि इस भ्रष्टाचार में सरकार के कई बड़े-बड़े अधिकार संलिप्त हैं।
- नीरज शर्मा, विधायक, एनआईटी
मंगलवार शाम आरोपी ठेकेदार सतवीर को गिरफ्तार किया गया है। उसे अदालत में पेश कर छह दिन की रिमांड पर पूछताछ के लिए लिया गया है। अभी घोटाले की जांच की जा रही है। जल्द ही और आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी।
- अनिल कुुमार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक