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Faridabad News: पांच माह में सात गुना बढ़ा कंटेनर का किराया, निर्यात महंगा

Fri, 02 Oct 2026 12:02 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2026 12:02 AM IST
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Container freight rates increased sevenfold in five months; exports become costlier.
मई में 1300 डाॅलर में न्यूयार्क के लिए कंटेनर मिल रहा था
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केशव भारद्वाज
फरीदाबाद। शहर के उद्योगों से विदेशों को माल भेजना अब उद्यमियों के लिए लगातार महंगा होता जा रहा है। पिछले पांच माह में कंटेनर का किराया सात गुना तक बढ़ गया है। मई में मुंबई से अमेरिका के न्यूयॉर्क के लिए 20 फीट का कंटेनर करीब 1300 डॉलर में मिल रहा था, जिसका अब किराया बढ़कर करीब 9050 डॉलर हो गया है। करीब सात गुना किराया बढ़ने से उद्यमियों का मुनाफा न्यूनतम स्तर पर आ गया है। इससे निर्यातक परेशान हैं।
फरीदाबाद में छोटे-बड़े 30 हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। इनमें ऑटोमोबाइल सेक्टर की बड़ी हिस्सेदारी है। इसके अलावा गारमेंट, फर्नीचर, बर्तन, केमिकल, क्रेन, अर्थमूवर मशीन, ट्रैक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवा और बुलेटप्रूफ जैकेट समेत कई तरह के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। शहर से अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और मध्य-पूर्व समेत कई देशों में इनका निर्यात होता है। उद्यमियों के अनुसार अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्धों के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग व्यवस्था प्रभावित हुई है। कंटेनरों की उपलब्धता कम होने से किराये पर भी असर पड़ा है। दूसरी ओर विदेशी ग्राहक बढ़ी हुई परिवहन लागत के अनुपात में उत्पादों की कीमत बढ़ाने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में बढ़ा हुआ खर्च निर्यातकों को ही वहन करना पड़ रहा है। आईएमटी में औद्योगिक इकाई चलाने वाले उद्यमी दीपक प्रसाद ने बताया कि निर्यात करना मुश्किल होता जा रहा है। कंटेनर का किराया कई गुना बढ़ने से लागत काफी बढ़ गई है और सभी निर्यातक परेशान हैं। कारोबार को बढ़ाने के लिए निवेश भी नहीं कर पा रहे हैं। इससे नए रोजगार भी पैदा नहीं हो रहे हैं।
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सेक्टर-छह में ऑटोमोबाइल पुर्जे बनाने वाली फैक्टरी के प्रबंध निदेशक विशाल ललानी ने बताया कि उनका माल शिकागो जाता है। कंटेनर का किराया लगातार बढ़ने से अब मुनाफे के बजाय घाटे की स्थिति बन रही है। ग्राहक माल के दाम बढ़ाने को तैयार नहीं हैं।
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कंटेनरों की संख्या भी बनी समस्या
उद्यमियों का कहना है कि कंटेनरों की उपलब्धता कम होना भी बड़ी समस्या बन गई है। युद्ध के कारण शिपिंग व्यवस्था प्रभावित होने से उपलब्ध कंटेनरों पर दबाव बढ़ा है। युद्ध के कारण कंटेनर एक देश में फंस जाते हैं। इस वजह से भी समस्या बनी हुई है। उनका कहना है कि यदि कंटेनरों की उपलब्धता बढ़ती है तो किराये में भी कमी आ सकती है। फिलहाल बढ़ा हुआ किराया शहर के निर्यातकों की लागत और कारोबार दोनों पर असर डाल रहा है।
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