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Faridabad News: गो-रक्षकों के खिलाफ मॉब लिंचिंग की धाराओं में चलेगा का मुकदमा

Thu, 28 Nov 2024 10:43 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 28 Nov 2024 10:43 PM IST
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Case will be filed against cow protectors under sections of mob lynching
गो-तस्कर समझकर आर्यन मिश्रा को गोली मारकर हत्या के मामले में चार्जशीट दाखिल
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-अपराध शाखा ने अदालत में 600 पेज की चार्जशीट दाखिल की
आर्यन के साथ मौजूद दोस्तों समेत 30 लोगों को बनाया गया गवाह
-23 अगस्त को गदपुरी टोल के नजदीक गो-रक्षकों ने आर्यन मिश्रा को गो-तस्कर समझकर मार दी थी गोली
पुलिस ने 28 अगस्त को पांच आरोपियों को किया था गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद । जिले में 12वीं के छात्र आर्यन मिश्रा को गो-तस्कर समझकर गोली मारने के मामले में अब पुलिस मॉब लिंचिंग की धाराओं में कार्रवाई करेगी। मंगलवार को अपराध शाखा की ओर से न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 600 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई । आर्यन के साथ कार में मौजूद दोस्तों समेत कुल 30 लोगों को मामले में गवाह बनाकर उनके बयान दर्ज किए गए हैं।
फरीदाबाद पुलिस ने मॉब लिंचिंग की धाराओं समेत तीन और धाराओं को जोड़ा है। इससे अब आरोपियों की मुश्किलें बढ़ना तय है। हालांकि, पुलिस की जांच से आर्यन का परिवार संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि आर्यन के साथ कार में मौजूद लोगों की भूमिका भी संदिग्ध थी। पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
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पुलिस के मुताबिक, 23 अगस्त को आर्यन मिश्रा (20) अपने दोस्त शैंकी और हर्षित के साथ कार से दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे से गुजर रहे थे। इसी बीच पांच गो-रक्षकों सौरभ, अनिल कौशिक, वरुण, कृष्णा और आदेश ने कार से इनका पीछा किया। गो-रक्षकों को खबर मिली थी कि दो वाहनों से कुछ गो-तस्कर शहर में रेकी करने की नियत से निकले हैं।
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करीब 25 किलोमीटर तक कार से पीछा करने के बाद गदपुरी टोल के नजदीक आरोपियों ने गोली चला दी। गोली कार में मौजूद आर्यन मिश्रा को लगी। बाद में आर्यन की मौत हो गई। कई दिनों तक मामले को दबाकर रखा गया। मामला जब सुर्खियाें में आया तो पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांचों आरोपियों को 28 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया।

क्यों लगती है मॉब लिंचिंग की धारा
अपराध शाखा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि 600 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई है। शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 103 (1) (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, आरोपपत्र में इस धारा को बीएनएस की धारा 103 (2) से बदल दिया गया है। 103 (2) के तहत मॉब लिंचिंग को परिभाषित किया गया है। इस धारा को तब लगाया जाता है, जब पांच या उससे अधिक लोगों का समूह नस्ल, जाति या समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या किसी अन्य समान आधार पर हत्या की वारदात को अंजाम देता है। ऐसी किसी वारदात में शामिल समूह के प्रत्येक सदस्य को अदालत मौत या आजीवन कारावास के साथ जुर्माना दोनों की सजा सुना सकती है।
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आरोप पत्र में दो और धाराएं जोड़ी गई...

आरोपी गो-रक्षकों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट में पुलिस ने दो और धाराएं जोड़ी हैं। इनमें आपराधिक साजिश के लिए बीएनएस की धारा 61 (24) और जानबूझकर सबूत छिपाने के लिए बीएनएस की धारा 238(2) लगाई है। अवैध रूप से इकट्ठा होने और घातक हथियारों के साथ दंगा करने की अन्य धाराओं के साथ-साथ आर्म्स एक्ट की धाराओं को चार्जशीट में बरकरार रखा गया है। बता दें कि बीएनएस से पहले आईपीसी में भीड़ द्वारा की गई हत्या के लिए कोई खास प्रावधान नहीं था।



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हम पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं हैं। आर्यन के साथ कार में मकान मालकिन, उनके बेटे और अन्य लोग भी मौजूद थे। उनको पुलिस ने जांच में लगभग क्लीन चिट दे है। अपने अधिवक्ता से बात करने के बाद ही पूरी तरह से कह पाएंगे। आरोपियों के खिलाफ जो धाराएं जोड़ी गई हैं और चार्जशीट कितनी सही है, इसका जांच के बाद ही इसका पता चलेगा।
सियानंद मिश्रा, आर्यन के पिता
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