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हरियाणा का रण : मुद्दा जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा एनआईटी का बस स्टैंड
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फरीदाबाद एनआईटी बस स्टैड की खस्ता हालत ।
- फोटो : Faridabad
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फरीदाबाद। न्यू इंडस्ट्रीयल टाउन (एनआईटी) स्थित जर्जर हाल बस अड्डा जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा है। वर्ष 2014 में विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन परिवहन मंत्री आफताब अहमद ने इसके जीर्णोद्धार के लिए शिलान्यास किया था मगर सरकार बदल गई और योजना कागजों में ही दबकर रह गई। मौजूद सरकार ने भी इसके सुधार के लिए कोई प्रयास नहीं किए। चार दशक पुराने इस बस स्टैंड से कई राज्यों की बसें चलती हैं। आलम यह है कि शाम ढलते ही यहां नशेड़ियों का जमघट लग जाता है। बरसात के दिनों में तो बस स्टैंड तालाब में तब्दील हो जाता है। रोज करीब एक से डेढ़ हजार यात्री यहां से सफर करते हैं, लेकिन बस स्टैंड की हालत काफी जर्जर है। यात्रियों की संख्या के अनुसार यहां सुविधाएं भी कम हैं।
40 साल पुराना है बस अड्डा
करीब 40 साल पुराने इस बस अड्डे की हालत बेहद दयनीय बनी हुई है। इसकी इमारत काफी जर्जर हो चुकी है। इस कारण जगह-जगह से प्लास्टर गिरता रहता है। ऐसे में हमेशा हादसे का डर सताता रहता है। इससे लोगों और यहां तैनात कर्मचारियों को परेशानियां होती है। बरसात के मौसम में तो बस स्टैंड तालाब का रूप ले लेता है। ऐसे में या तो यात्री स्टैंड के बाहर खड़े होकर बस पकड़ते हैं या फिर पानी में होकर स्टैंड तक जाने को मजबूर होते हैं।
27 स्थानों पर जाती है बसें
एनआईटी बस स्टैंड से विभिन्न राज्यों की बसें चलती हैं। रोडवेज कर्मियों के अनुसार यहां से करीब 27 स्थानों के लिए बसें जाती हैं, इसमें उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश रोडवेज की बसें चलती है। इसमें उत्तराखंड, हिमाचल और हरियाणा के विभिन्न हिस्सों में जाने वाली अधिकतर बसें दिल्ली होते हुए जाती है।
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टूटे काउंटर, शौचालय और पेयजल की सुविधा नहीं
स्टैंड पर न तो पेयजल की कोई सुविधा है और न शौचालय की। एक शौचालय बना भी है तो वहां गंदगी के ढेर लगे हुए हैं और दरवाजा टूटा हुआ है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है। यहां पेयजल के लिए कोई वाटर मशीन नहीं थी। पेयजल के लिए लोगों को पानी की बोतलों पर निर्भर रहना पड़ता है। स्टैंड के निकट बने सुलभ शौचालय का इस्तेमाल लोग बेहतर समझते है। वहीं टिकट काउंटर भी टूटे हुए हैं।
एनआईटी बस स्टैंड की हालत काफी जर्जर है। यहां न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और शौचालय का भी बुरा हाल है। बरसात में तो यहां आना भी मुश्किल हो जाता है। हलकी बरसात में ही बस स्टैंड तालाब बन जाता है। ऐसे में मजबूरन बाहर खड़े होकर ही बस पकड़नी पड़ती है।
- दलजीत सिंह, एनआईटी एक निवासी
एनआईटी बस स्टैंड की हालत खस्ता हुई पड़ी है। इसके अलावा यहां से लंबी दूरी की बसें तो चलती हैं, मगर दिल्ली और गुरुग्राम के लिए लोकल बसों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। बसों की संख्या कम होने के कारण लोग मजबूरी में बसों पर लटक कर सफर करने को मजबूर होते हैं।
- प्रदीप तेवतिया, एनआईटी निवासी
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40 साल पुराना है बस अड्डा
करीब 40 साल पुराने इस बस अड्डे की हालत बेहद दयनीय बनी हुई है। इसकी इमारत काफी जर्जर हो चुकी है। इस कारण जगह-जगह से प्लास्टर गिरता रहता है। ऐसे में हमेशा हादसे का डर सताता रहता है। इससे लोगों और यहां तैनात कर्मचारियों को परेशानियां होती है। बरसात के मौसम में तो बस स्टैंड तालाब का रूप ले लेता है। ऐसे में या तो यात्री स्टैंड के बाहर खड़े होकर बस पकड़ते हैं या फिर पानी में होकर स्टैंड तक जाने को मजबूर होते हैं।
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27 स्थानों पर जाती है बसें
एनआईटी बस स्टैंड से विभिन्न राज्यों की बसें चलती हैं। रोडवेज कर्मियों के अनुसार यहां से करीब 27 स्थानों के लिए बसें जाती हैं, इसमें उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश रोडवेज की बसें चलती है। इसमें उत्तराखंड, हिमाचल और हरियाणा के विभिन्न हिस्सों में जाने वाली अधिकतर बसें दिल्ली होते हुए जाती है।
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टूटे काउंटर, शौचालय और पेयजल की सुविधा नहीं
स्टैंड पर न तो पेयजल की कोई सुविधा है और न शौचालय की। एक शौचालय बना भी है तो वहां गंदगी के ढेर लगे हुए हैं और दरवाजा टूटा हुआ है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है। यहां पेयजल के लिए कोई वाटर मशीन नहीं थी। पेयजल के लिए लोगों को पानी की बोतलों पर निर्भर रहना पड़ता है। स्टैंड के निकट बने सुलभ शौचालय का इस्तेमाल लोग बेहतर समझते है। वहीं टिकट काउंटर भी टूटे हुए हैं।
एनआईटी बस स्टैंड की हालत काफी जर्जर है। यहां न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और शौचालय का भी बुरा हाल है। बरसात में तो यहां आना भी मुश्किल हो जाता है। हलकी बरसात में ही बस स्टैंड तालाब बन जाता है। ऐसे में मजबूरन बाहर खड़े होकर ही बस पकड़नी पड़ती है।
- दलजीत सिंह, एनआईटी एक निवासी
एनआईटी बस स्टैंड की हालत खस्ता हुई पड़ी है। इसके अलावा यहां से लंबी दूरी की बसें तो चलती हैं, मगर दिल्ली और गुरुग्राम के लिए लोकल बसों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। बसों की संख्या कम होने के कारण लोग मजबूरी में बसों पर लटक कर सफर करने को मजबूर होते हैं।
- प्रदीप तेवतिया, एनआईटी निवासी