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Faridabad News: विकास योजनाओं का बजट अलॉट, फिर भी ठेकेदार नहीं कर रहे काम शुरू
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फरीदाबाद। विकास कार्यों की धीमी रफ्तार शहर वासियों पर भारी पड़ रही है। बड़ी बात यह है कि जिन विकास कार्यों के काम अलाॅट हैं, उनके काम तीन माह बाद भी शुरू नहीं हो पाए हैं। इनमें ग्रेटर नोएडा, नोएडा व दिल्ली से कनेक्टिविटी वाली कालिंदीकुंज सड़क को चार लेन करना, यमुना नदी किनारे आठ गांव में एसटीपी निर्माण व नीलम रेलवे ओवर ब्रिज की स्लिप रोड व नीचे से कनेक्टिविटी शामिल है। जिससे लोग बेहद परेशान हैं।
स्मार्ट सिटी से दिल्ली जाने के लिए अभी तक दो मुख्य सड़क है। दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग, बाईपास रोड का लोग उपयोग करते हैं। बाईपास रोड दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य चलने के कारण बंद है। ऐसे में वाहन चालकों के पास विकल्प के तौर पर केवल दिल्ली-आगरा हाईवे बचता है। हाईवे पर अक्सर जाम रहता है। दिल्ली तक का सफर तय करने में लगभग एक घंटा लग जाता है। इसके अलावा सूरजकुंड की ओर से जाने वाला रास्ता बेहद लंबा है। तीसरे विकल्प के तौर पर आगरा कैनाल रोड। आईएमटी से दिल्ली के कालिंदी कुंज तक 36 किलोमीटर लंबी यह सड़क तीन राज्य दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को जोड़ती है। सितंबर 2023 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस सड़क को चार लेन बनाने की घोषणा की थी। अब इस परियोजना की डीपीआर बनाने के बजट को लेकर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग और फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण के अधिकारी आमने-सामने हैं। सड़क निर्माण उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग करेगा, इसलिए उसने डीपीआर के लिए करीब 13 करोड़ रुपये देने की मांग की है। उधर प्राधिकरण अभी शुरुआत में इतनी राशि देने को तैयार नहीं है। इसलिए योजना फाइलों में दब कर रह गई है। यह पूरी परियोजना 285 करोड़ की है। यदि योजना सिरे चढ़ती है तो इस सड़क से नोएडा मात्र 20 मिनट में पहुंचा जा सकेगा। इससे दो लाख वाहन चालकों को फायदा होगा।
फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण की ओर से करीब एक वर्ष पहले राष्ट्रीय राजमार्ग के सबसे व्यस्त अजरौंदा चौराहे को जाम मुक्त करने की योजना तैयार की गई थी। नीलम रेलवे पुल पर स्लिप रोड और पुल के नीचे से वाहनों के आवागमन के लिए सड़क बनानी थी। ठेकेदार को काम अलाॅट कर दिया गया, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। इस कनेक्टिविटी से एक ओर जहां गलत दिशा में चलने वाले वाहनों को राहत मिलती, साथ ही हाईवे पर वाहनों का दबाव कम होता। इस योजना पर 1.20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के एसडीओ सर्वे राजेंद्र कुमार का कहना है कि नीलम पुल के नीचे अतिक्रमण का जल्द सफाया किया जाएगा। इस बाबत पुलिस फोर्स लेकर कार्रवाई होगी।
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तीन साल बाद भी एसटीपी की योजना नहीं चढ़ी सिरे
वर्ष 2021 में एनजीटी के आदेश पर पंचायती राज विभाग द्वारा यमुना नदी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए किनारे बसे हुए आठ गांव में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन कुछ समय बाद यह योजना जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को सौंप दी गई। योजना के अनुसार गांव छांयसा, मोहना, चांदपुर, इमामुद्दीनपुर, शाहजहांपुर, साहुपुरा, अरुआ, घुड़ासन-बेला में एसटीपी बनने हैं। इस योजना पर करीब 28 करोड़ रुपये की लागत आएगी। विभाग द्वारा इन गांवों का सर्वे किया जा चुका है। इसके बावजूद योजना जमीन न मिलने की वजह से आगे नहीं बढ़ सकी।
आईएमटी से कालिंदी कुंज तक चार लेन सड़क का निर्माण यूपी सिंचाई विभाग को करना है। इसके लिए हम भुगतान करने को तैयार हैं लेकिन विभाग के उच्च अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचते हैं। वहीं स्लिप रोड शुरू करने के लिए ठेकेदार को काम अलॉट किया जा चुका है, लेकिन नीलम रेलवे पुल के नीचे अतिक्रमण बाधा बन रहा है। इसे हटाने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। - रमेश बागड़ी, मुख्य अभियंता, एफएमडीए
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स्मार्ट सिटी से दिल्ली जाने के लिए अभी तक दो मुख्य सड़क है। दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग, बाईपास रोड का लोग उपयोग करते हैं। बाईपास रोड दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य चलने के कारण बंद है। ऐसे में वाहन चालकों के पास विकल्प के तौर पर केवल दिल्ली-आगरा हाईवे बचता है। हाईवे पर अक्सर जाम रहता है। दिल्ली तक का सफर तय करने में लगभग एक घंटा लग जाता है। इसके अलावा सूरजकुंड की ओर से जाने वाला रास्ता बेहद लंबा है। तीसरे विकल्प के तौर पर आगरा कैनाल रोड। आईएमटी से दिल्ली के कालिंदी कुंज तक 36 किलोमीटर लंबी यह सड़क तीन राज्य दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को जोड़ती है। सितंबर 2023 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस सड़क को चार लेन बनाने की घोषणा की थी। अब इस परियोजना की डीपीआर बनाने के बजट को लेकर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग और फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण के अधिकारी आमने-सामने हैं। सड़क निर्माण उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग करेगा, इसलिए उसने डीपीआर के लिए करीब 13 करोड़ रुपये देने की मांग की है। उधर प्राधिकरण अभी शुरुआत में इतनी राशि देने को तैयार नहीं है। इसलिए योजना फाइलों में दब कर रह गई है। यह पूरी परियोजना 285 करोड़ की है। यदि योजना सिरे चढ़ती है तो इस सड़क से नोएडा मात्र 20 मिनट में पहुंचा जा सकेगा। इससे दो लाख वाहन चालकों को फायदा होगा।
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फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण की ओर से करीब एक वर्ष पहले राष्ट्रीय राजमार्ग के सबसे व्यस्त अजरौंदा चौराहे को जाम मुक्त करने की योजना तैयार की गई थी। नीलम रेलवे पुल पर स्लिप रोड और पुल के नीचे से वाहनों के आवागमन के लिए सड़क बनानी थी। ठेकेदार को काम अलाॅट कर दिया गया, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। इस कनेक्टिविटी से एक ओर जहां गलत दिशा में चलने वाले वाहनों को राहत मिलती, साथ ही हाईवे पर वाहनों का दबाव कम होता। इस योजना पर 1.20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के एसडीओ सर्वे राजेंद्र कुमार का कहना है कि नीलम पुल के नीचे अतिक्रमण का जल्द सफाया किया जाएगा। इस बाबत पुलिस फोर्स लेकर कार्रवाई होगी।
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तीन साल बाद भी एसटीपी की योजना नहीं चढ़ी सिरे
वर्ष 2021 में एनजीटी के आदेश पर पंचायती राज विभाग द्वारा यमुना नदी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए किनारे बसे हुए आठ गांव में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन कुछ समय बाद यह योजना जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को सौंप दी गई। योजना के अनुसार गांव छांयसा, मोहना, चांदपुर, इमामुद्दीनपुर, शाहजहांपुर, साहुपुरा, अरुआ, घुड़ासन-बेला में एसटीपी बनने हैं। इस योजना पर करीब 28 करोड़ रुपये की लागत आएगी। विभाग द्वारा इन गांवों का सर्वे किया जा चुका है। इसके बावजूद योजना जमीन न मिलने की वजह से आगे नहीं बढ़ सकी।
आईएमटी से कालिंदी कुंज तक चार लेन सड़क का निर्माण यूपी सिंचाई विभाग को करना है। इसके लिए हम भुगतान करने को तैयार हैं लेकिन विभाग के उच्च अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचते हैं। वहीं स्लिप रोड शुरू करने के लिए ठेकेदार को काम अलॉट किया जा चुका है, लेकिन नीलम रेलवे पुल के नीचे अतिक्रमण बाधा बन रहा है। इसे हटाने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। - रमेश बागड़ी, मुख्य अभियंता, एफएमडीए