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ठेकेदार से 25 फीसदी कमीशन लेने के बाद हस्ताक्षर करता था भास्कर
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फरीदाबाद। निगम के 200 करोड़ रुपये के घोटाले में पूर्व मुख्य आरोपी व मुख्य अभियंता डीआर भास्कर बिल पास करने की एवज में ठेकेदार सतबीर से 25 फीसदी कमीशन लेता था। विजिलेंस टीम को यह बात ठेकेदार ने आरोपी के सामने बैठकर बताई। भास्कर का छह दिन की रिमांड पूरा हो गया है। विजिलेंस शुक्रवार आज उसे अदालत में पेश करेगी। माना जा रहा है कि विजिलेंस आरोपी का रिमांड बढ़वाने की मांग कर सकती है।
विजिलेंस ने पूर्व मुख्य अभियंता डीआर भास्कर और ठेकेदार सतवीर को आमने-सामने बैठाकर फिर से पूछताछ की। ठेकेदार ने कहा कि बिना काम भुगतान की एवज में आरोपी उससे 25 फीसदी तक कमीशन लेता था। विजिलेंस ने ठेकेदार सतवीर को प्रोडक्शन वारंट पर पांच दिन के रिमांड पर ले रखा है। तीसरे आरोपी मुख्य अभियंता रमन शर्मा ने की अग्रिम जमानत याचिका पर 23 मई को सुनवाई होगी। विजिलेंस अभी तक इंजीनियरिंग ब्रांच से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ कर रही है। जांच टीम ने टेंडर जारी करने से लेकर भुगतान करने तक की प्रक्रिया बारीकी से समझी है। विजिलेंस को बताया गया कि टेंडर जारी करने से लेकर बिल अकाउंट ब्रांच तक भेजने की जिम्मेदारी इंजीनियरिंग ब्रांच की होती है।
विकास कार्यों से जुड़े कागजों पर इंजीनियरिंग ब्रांच के जेई, एसडीओ, कार्यकारी अभियंता, अधीक्षण अभियंता और चीफ इंजीनियर के हस्ताक्षर होते हैं। अंत में विकास कार्यों के फोटो और उसकी सारी डिटेल के साथ बिल अकाउंट ब्रांच के पास भेज दिया जाता है। अकाउंट ब्रांच जांच के बाद भुगतान जारी करता है। टीम ये जानना चाहती है कि इतनी प्रक्रिया के बावजूद बिना किसी जांच के अकाउंट ब्रांच ने भुगतान कैसे जारी कर दिया। जल्द ही विजिलेंस अकाउंट ब्रांच से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ करेगी। इसमें कई और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
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क्या है मामला
मई 2020 में नगर निगम के तत्कालीन चार पार्षदों दीपक चौधरी, दीपक यादव, सुरेंद्र अग्रवाल व महेंद्र सरपंच ने तत्कालीन निगम आयुक्त को शिकायत दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि निगम के लेखा विभाग ने ठेकेदार सतवीर की विभिन्न फर्मों को बिना काम किए भुगतान कर दिया है। निगम आयुक्त ने अपने स्तर पर मामले की जांच कराई। ठेकेदार को भुगतान में अनियमितताएं पाए जाने पर उन्होंने विजिलेंस से जांच की सिफारिश की। विजिलेंस ने अभी तक दो केस दर्ज किए हैं। जांच अभी जारी है।
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विजिलेंस ने पूर्व मुख्य अभियंता डीआर भास्कर और ठेकेदार सतवीर को आमने-सामने बैठाकर फिर से पूछताछ की। ठेकेदार ने कहा कि बिना काम भुगतान की एवज में आरोपी उससे 25 फीसदी तक कमीशन लेता था। विजिलेंस ने ठेकेदार सतवीर को प्रोडक्शन वारंट पर पांच दिन के रिमांड पर ले रखा है। तीसरे आरोपी मुख्य अभियंता रमन शर्मा ने की अग्रिम जमानत याचिका पर 23 मई को सुनवाई होगी। विजिलेंस अभी तक इंजीनियरिंग ब्रांच से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ कर रही है। जांच टीम ने टेंडर जारी करने से लेकर भुगतान करने तक की प्रक्रिया बारीकी से समझी है। विजिलेंस को बताया गया कि टेंडर जारी करने से लेकर बिल अकाउंट ब्रांच तक भेजने की जिम्मेदारी इंजीनियरिंग ब्रांच की होती है।
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विकास कार्यों से जुड़े कागजों पर इंजीनियरिंग ब्रांच के जेई, एसडीओ, कार्यकारी अभियंता, अधीक्षण अभियंता और चीफ इंजीनियर के हस्ताक्षर होते हैं। अंत में विकास कार्यों के फोटो और उसकी सारी डिटेल के साथ बिल अकाउंट ब्रांच के पास भेज दिया जाता है। अकाउंट ब्रांच जांच के बाद भुगतान जारी करता है। टीम ये जानना चाहती है कि इतनी प्रक्रिया के बावजूद बिना किसी जांच के अकाउंट ब्रांच ने भुगतान कैसे जारी कर दिया। जल्द ही विजिलेंस अकाउंट ब्रांच से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ करेगी। इसमें कई और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
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क्या है मामला
मई 2020 में नगर निगम के तत्कालीन चार पार्षदों दीपक चौधरी, दीपक यादव, सुरेंद्र अग्रवाल व महेंद्र सरपंच ने तत्कालीन निगम आयुक्त को शिकायत दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि निगम के लेखा विभाग ने ठेकेदार सतवीर की विभिन्न फर्मों को बिना काम किए भुगतान कर दिया है। निगम आयुक्त ने अपने स्तर पर मामले की जांच कराई। ठेकेदार को भुगतान में अनियमितताएं पाए जाने पर उन्होंने विजिलेंस से जांच की सिफारिश की। विजिलेंस ने अभी तक दो केस दर्ज किए हैं। जांच अभी जारी है।