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Faridabad News: अरावली वाइल्डलाइफ रिसर्च सेंटर योजना औपचारिकताओं में फंसी

Tue, 14 Apr 2026 12:31 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 14 Apr 2026 12:31 AM IST
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Aravalli Wildlife Research Center Project Mired in Formalities
अप्रैल से शुरू होना था काम, जानवरों की आवाजाही पर सटीक नजर रखी जा सकेगी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। धौज गांव में बनने वाले अरावली के पहले वाइल्डलाइफ मॉनिटरिंग और रिसर्च सेंटर का काम फिलहाल अधर में लटका हुआ है। विभाग की योजना के अनुसार इस केंद्र का संचालन और कैमरा-ट्रैप के जरिए वन्यजीवों की निगरानी का काम इसी साल अप्रैल माह से शुरू होना था लेकिन प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण इसमें देरी हो रही है।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केंद्र की स्थापना को लेकर विभाग की ओर से प्रस्ताव बनाकर उच्च अधिकारियों के पास भेज दिया गया है। फिलहाल यह पूरी योजना प्रक्रियाधीन है। मुख्यालय से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही जमीन पर काम शुरू हो पाएगा। हरियाणा वन विभाग इस सेंटर को दक्षिणी अरावली में वन्यजीवों के संरक्षण और उनके व्यवहार के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए एक प्रमुख हब बनाना चाहता है। योजना में सेंटर में कैमरा-ट्रैप मॉनिटरिंग और जीपीएस-आधारित ट्रैकिंग तकनीक का इस्तेमाल होगा। इससे तेंदुए, लकड़बग्घे और अन्य जानवरों की आवाजाही पर सटीक नजर रखी जा सकेगी। साल 2017 में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सर्वे के बाद से अरावली के वन्यजीवों का कोई नया और बड़ा डेटा एकत्र नहीं किया गया है। यह सेंटर इस कमी को दूर करेगा। मानव-वन्यजीव संघर्ष (तेंदुए का रिहायशी इलाकों में आना) की स्थिति में यह केंद्र त्वरित रेस्क्यू और बेहतर समन्वय का काम करेगा।
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वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर रिसर्च सेंटर के लिए पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। यहां से प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया है। जब तक वहां से हरी झंडी नहीं मिलती, तब तक कैमरा-ट्रैप लगाने और जीआईएस मैपिंग का काम शुरू नहीं हो पाएगा। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और अरावली के आसपास बिछते सड़कों के जाल के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास सुरक्षित नहीं रहे। अक्सर जानवर सड़क हादसों का शिकार होते हैं या रास्ता भटककर गांवों में आ जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिसर्च सेंटर के शुरू होने से वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके आवास के सुधार में बड़ी मदद मिलेगी। फिलहाल, वन्यजीव प्रेमियों को इस प्रोजेक्ट के अमलीजामा पहनने का इंतजार है।
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वर्जन
स्थानीय स्तर से प्रस्ताव भेजा जा चुका है। फिलहाल यह पूरी योजना प्रक्रियाधीन है। स्वीकृति मिलने के बाद ही जमीन पर काम शुरू हो पाएगा। जैसे ही आगामी दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, सेंटर को स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। -झलकार उयके, डीएफओ
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