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Faridabad News: तीन घंटे तक सोसाइटी की लिफ्ट में फंसा रहा आठ साल का मासूम, डरने की बजाए बैठकर किया होमवर्क

Sun, 20 Aug 2023 10:44 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 20 Aug 2023 10:44 PM IST
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An eight-year-old boy stuck in the lift of the society for three hours, instead of being afraid, he did his homework
- कई बार दबाया इमरजेंसी बटन, सहायता के साथ कई बार लोगों को लगाई आवाज
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- पर किसी ने नहीं सुनी आवाज
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-86 स्थित ओमेक्स हाइट्स के स्टूडियो अपार्टमेंट की लिफ्ट में आठ साल का बच्चा करीब 3 घंटे तक फंसा रहा। गनीमत रही कि बच्चे को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा। बच्चा शनिवार शाम को पांचवीं मंजिल से पहली मंजिल पर ट्यूशन पढ़ने के लिए अकेले लिफ्ट से जा रहा था। तभी दूसरी मंजिल पर आकर लिफ्ट बंद हो गई। बच्चे द्वारा कई बार इमरजेंसी बटन दबाया गया और जोर-जोर से चिल्लाकर मदद की गुहार लगाई गई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। तब बच्चा बिना डरे अंदर ही बैठकर ही अपना होमवर्क करने लगा। उधर कई घंटे बाद भी जब बच्चा घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने काफी तलाश की और फिर गार्ड से लिफ्ट के बारे में पूछा तो उसने बताया कि लिफ्ट पांच बजे से बंद है। तब उनको शक हुआ कि बच्चा लिफ्ट के अंदर है। काफी मशक्कत के बाद रात को आठ बजे बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

ओमेक्स हाइट्स के स्टूडियो अपार्टमेंट की पांचवीं मंजिल पर रहने वाले पवन चंदीला ने बताया कि वह निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। शनिवार की शाम वह किसी काम से घर से बाहर गए हुए थे। पत्नी का स्वास्थ्य ठीक नहीं होने की वजह से वह घर पर आराम कर रही थीं। उनका आठ साल का बेटा गौरवान्वित दूसरी कक्षा का छात्र है। वह पांचवी मंजिल पर रहते हैं और बेटा पहली मंजिल पर ट्यूशन पढ़ता है। शनिवार की शाम 5 बजे उनका बेटा ट्यूशन जाने के लिए घर से लिफ्ट से नीचे गया। गौरवाविंत ने उनको बताया कि दूसरी मंजिल पर जाकर लिफ्ट अचानक से बंद हो गई। जिसके बाद उसने काफी देर तक इमरजेंसी बटन दबाया और आवाज लगाकर मदद मांगी, लेकिन, किसी ने उसकी आवाज नहीं सुनी। शाम साढ़े 6 बजे तक बेटा ट्यूशन से वापस घर आ जाता है। सात बजे तक भी जब वह घर नहीं लौटा तो उनकी पत्नी ने ट्यूशन अध्यापक से फोन कर जानकारी ली। अध्यापक ने बताया कि गौरवान्वित ट्यूशन आया ही नहीं। जिसके बाद उनकी पत्नी ने सोसाइटी के हर पार्क में देखा और आस-पड़ोस में रहने वाले लोगों से बेटे के बारे में पूछताछ की। लेकिन, कुछ पता नहीं चला। जिसके बाद उनकी पत्नी ने फोन करके उनको सूचना दी। जिसके बाद शाम को साढ़े सात बजे उन्होंने गार्ड से लिफ्ट के बारे में पूछा कि वह कब से बंद है, तब गार्ड ने बताया कि लिफ्ट शाम को पांच बजे से बंद है। जिसका बाद उनको शक हुआ कि उनका बेटा गौरवान्वित लिफ्ट के अंदर बंद है। जिसके बाद उन्होंने सोसाइटी की आरडब्ल्यूए व अन्य लोगों को फोन करके मदद मांगी चाही लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। जिसके बाद दूसरी लिफ्ट से ऊपर जाकर बंद लिफ्ट को ऊपर से खोलकर आवाज लगाकर गौरवान्वित के बारे में पूछा तो बच्चे ने कहा कि वह अंदर है। जिसके बाद तुरंत कर्मचारियों को बुलाकर लिफ्ट को खुलवाया और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला।
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शिकायत के तीन घंटे बाद भी नहीं पहुंचा कोई अधिकारी
गार्ड ने लोगों को बताया कि लिफ्ट बंद होने के बाद उन्होंने इसकी शिकायत रखरखाव एजेंसी से कर दी थी। इसके बावजूद कोई अधिकारी मौके पर सुध लेने नहीं पहुंचा। अगर समय पर कोई कर्मचारी ठीक करने के लिए आ जाता तो बच्चे को समय रहते बाहर निकाला जा सकता था।
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लिफ्ट में बैठकर बच्चे ने किया होमवर्क
गौरवान्वित ने बताया कि पिता पवन ने उनको समझाया कि अगर कभी लिफ्ट बंद हो जाती है तो डरना नहीं चाहिए। लिफ्ट में लगे हर बटन के बारे में उनको जानकारी दी। जिसके चलते उन्होंने मदद मांगी। काफी देर आवाज लगाने के बाद जब कोई मदद के लिए नहीं आया, तो उसने अपने स्कूल का होमवर्क करना शुरू कर दिया। जिससे उनका दिमाग लिफ्ट की बजाए पढ़ाई में लगा रहे। इस दौरान उसने स्कूल के होमवर्क के साथ साथ ट्यूशन का एक्स्ट्रा होमवर्क भी कर लिया।



पता चलने पर 3 मिनट के अंदर निकाला बच्चे को बाहर
रखरखाव एजेंसी के राज्य प्रबंधक सुधीर शर्मा ने बताया कि सोसाइटी में करीब 78 लिफ्ट हैं। जिसकी देखरेख का जिम्मा उनका है। शनिवार की रात को आठ बजे बच्चे के बारे में पता लगने के बाद मात्र तीन मिनट के अंदर टीम ने मौके पर पहुंच कर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उन्होंने बताया कि हर लिफ्ट के अंदर सुरक्षा के नियम लिखे हुए हैं, जिसमें यह भी लिखा हुआ है कि 12 साल से कम उम्र वाला बच्चा लिफ्ट में कभी भी अकेला सफर नहीं करेगा। बच्चे के साथ कोई परिवार का सदस्य जरूर होगा। इन बच्चे को अकेला भेजना ही बहुत बड़ी गलती है। साथ ही बच्चा अगर समय पर इमरजेंसी बटन दबा देता तो तुरंत बच्चे को उसी समय निकाल लिया जाता।
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