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Faridabad News: उच्च न्यायालय के आदेश के बाद नहर पार के किसानों को आवासीय प्लाॅट मिलने की उम्मीद जगी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद 18 शहरों में जमीन अधिग्रहण के बदले सरकार किसानों को आवासीय प्लॉट देगी। इस सूची में फरीदाबाद का भी नाम शामिल है। सरकार उच्च न्यायालय के आदेश पर फार्म भरवाएगी और रिहायशी प्लॉट देगी।
नहरपार ग्रेटर फरीदाबाद किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष शिव दत्त वशिष्ठ ने बताया कि सेक्टर 75-80 के लिए किसानों की बैगर मर्जी के लगभग 300 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इस जमीन को मात्र सोलह लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अधिग्रहित किया गया था। नहर पार के किसानों ने कई वर्षों तक अपनी जमीन को बचाने के लिए आंदोलन किया लेकिन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने किसानों को ना तो लैंड पूलिंग पॉलिसी में जोड़ा ओर ना ही रिहायशी प्लाॅट दिए।
किसानों की जमीन अधिगृहित होने के बाद भी किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने किसानों की जमीनों पर प्लाॅट काट कर मुनाफे में बेच दिए। उच्च न्यायालय ने किसान संघर्ष समिति ग्रेटर फरीदाबाद की याचिका व विभिन्न याचिकाओं का निपटारा करते हुए हरियाणा सरकार को नीति के मुताबिक जमीन मालिकों को अधिग्रहण के बदले में आवासीय प्लॉट देने का निर्देश दिया है। इस फैसले को लेकर नहर पार के किसानों ने खुशी जाहिर की है। नहर पार के किसानों के संघर्ष से अन्य जिलों के किसानों को प्लाट मिलने की उम्मीद बन गई हैं। अब किसान 50 हजार रुपये के साथ अपना फार्म हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में जमा करा सकते हैं। इस मौके पर किसान दयाराम , रघुवीर सिंह नागर, कमल, रामफल, जगजीत, रघुबीर सिंह, भारत, शरद शर्मा, नरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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फरीदाबाद। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद 18 शहरों में जमीन अधिग्रहण के बदले सरकार किसानों को आवासीय प्लॉट देगी। इस सूची में फरीदाबाद का भी नाम शामिल है। सरकार उच्च न्यायालय के आदेश पर फार्म भरवाएगी और रिहायशी प्लॉट देगी।
नहरपार ग्रेटर फरीदाबाद किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष शिव दत्त वशिष्ठ ने बताया कि सेक्टर 75-80 के लिए किसानों की बैगर मर्जी के लगभग 300 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इस जमीन को मात्र सोलह लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अधिग्रहित किया गया था। नहर पार के किसानों ने कई वर्षों तक अपनी जमीन को बचाने के लिए आंदोलन किया लेकिन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने किसानों को ना तो लैंड पूलिंग पॉलिसी में जोड़ा ओर ना ही रिहायशी प्लाॅट दिए।
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किसानों की जमीन अधिगृहित होने के बाद भी किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने किसानों की जमीनों पर प्लाॅट काट कर मुनाफे में बेच दिए। उच्च न्यायालय ने किसान संघर्ष समिति ग्रेटर फरीदाबाद की याचिका व विभिन्न याचिकाओं का निपटारा करते हुए हरियाणा सरकार को नीति के मुताबिक जमीन मालिकों को अधिग्रहण के बदले में आवासीय प्लॉट देने का निर्देश दिया है। इस फैसले को लेकर नहर पार के किसानों ने खुशी जाहिर की है। नहर पार के किसानों के संघर्ष से अन्य जिलों के किसानों को प्लाट मिलने की उम्मीद बन गई हैं। अब किसान 50 हजार रुपये के साथ अपना फार्म हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में जमा करा सकते हैं। इस मौके पर किसान दयाराम , रघुवीर सिंह नागर, कमल, रामफल, जगजीत, रघुबीर सिंह, भारत, शरद शर्मा, नरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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