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Faridabad News: झाड़सैंतली गांव की शोभा बढ़ाएगा भव्य स्वागत द्वार
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गांव में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को गांव की संस्कृति का अहसास होगा
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। वार्ड नंबर 1 के झाड़सैंतली गांव के मुख्य प्रवेश पर राम बाग मंदिर और पचोला कुआं के पास अब एक भव्य स्वागत द्वार बनने जा रहा है, जो गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नए रूप में पेश करेगा। यहां से होकर गांव में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को पहली नजर में ही गांव की संस्कृति का अहसास होगा।
लंबे समय से यहां के लोगों की मांग थी कि इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को दर्शाने वाला कोई प्रतीक बनाया जाए। राम बाग मंदिर और पचोला कुआं न केवल आस्था के केंद्र हैं बल्कि गांव के इतिहास के भी गवाह हैं। हर साल यहां मेलों और धार्मिक आयोजनों में सैकड़ों लोग आते हैं लेकिन अब तक प्रवेश द्वार साधारण बना हुआ है।
इस परियोजना को लेकर ग्रामीणों में उत्साह है। उनका मानना है कि स्वागत द्वार बनने से गांव की खूबसूरती बढ़ेगी और आने वाले मेहमानों का स्वागत पारंपरिक अंदाज में होगा। यह धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा और बाहरी लोगों में गांव के प्रति आकर्षण बढ़ाएगा।
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स्थानीय युवाओं का कहना है कि यह कदम गांव के गौरव को बढ़ाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक बनेगा। वहीं, दुकानदार मानते हैं कि धार्मिक आयोजनों और मेलों में जब भीड़ बढ़ेगी तो इसका फायदा स्थानीय व्यापार को भी मिलेगा। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यह द्वार आने वाले दशकों तक झाड़सैंतली की पहचान बना रहेगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। वार्ड नंबर 1 के झाड़सैंतली गांव के मुख्य प्रवेश पर राम बाग मंदिर और पचोला कुआं के पास अब एक भव्य स्वागत द्वार बनने जा रहा है, जो गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नए रूप में पेश करेगा। यहां से होकर गांव में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को पहली नजर में ही गांव की संस्कृति का अहसास होगा।
लंबे समय से यहां के लोगों की मांग थी कि इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को दर्शाने वाला कोई प्रतीक बनाया जाए। राम बाग मंदिर और पचोला कुआं न केवल आस्था के केंद्र हैं बल्कि गांव के इतिहास के भी गवाह हैं। हर साल यहां मेलों और धार्मिक आयोजनों में सैकड़ों लोग आते हैं लेकिन अब तक प्रवेश द्वार साधारण बना हुआ है।
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इस परियोजना को लेकर ग्रामीणों में उत्साह है। उनका मानना है कि स्वागत द्वार बनने से गांव की खूबसूरती बढ़ेगी और आने वाले मेहमानों का स्वागत पारंपरिक अंदाज में होगा। यह धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा और बाहरी लोगों में गांव के प्रति आकर्षण बढ़ाएगा।
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स्थानीय युवाओं का कहना है कि यह कदम गांव के गौरव को बढ़ाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक बनेगा। वहीं, दुकानदार मानते हैं कि धार्मिक आयोजनों और मेलों में जब भीड़ बढ़ेगी तो इसका फायदा स्थानीय व्यापार को भी मिलेगा। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यह द्वार आने वाले दशकों तक झाड़सैंतली की पहचान बना रहेगा।