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कोटे से लौटे बच्चे, परिजनों को देख झलकें आंसू
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फरीदाबाद। कोटा, राजस्थान से शनिवार को हरियाणा रोडवेज की बसें वहां फंसे बच्चों को लेकर पहुंची। यहां परिजनों से मिले बच्चों की आंखों में आंसू छलक उठे। परिजनों के गले लग सभी ने भगवान का व मदद के लिए हरियाणा और राजस्थान सरकार का धन्यवाद किया। शनिवार को कुल 86 बच्चे फरीदाबाद लौटे। इनकी थर्मल स्क्रीनिंग कर प्रशासन ने उनके परिजनों को सौंप दिया। स्वास्थ्य विभाग ने सभी को घर में क्वारंटीन रहने के लिए कहा है। अब स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर इनके सैंपल लेगी।
आईआईटी, नीट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोटा में फंसे बच्चों ने उन्हें वहां से निकालने के लिए प्रदेश सरकार से मदद की गुहार लगाई थी। इस पर शुक्रवार को प्रदेश सरकार ने वहां से बच्चों को लाने के लिए हरियाणा रोडवेज की बसों को भेजा था। रात को करीब दो बजे बसें वहां से बच्चों को लेकर निकली, जो सुबह करीब 4 बजे फरीदाबाद पहुंची। कुछ बच्चों को गांव नचौली स्थित लिंग्याज विद्यापीठ ले जाया गया, जबकि लड़कियों को सेक्टर-16 स्थित किसान भवन में लाया गया। यहां पर उनकी थर्मल स्क्रीनिंग के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया।
कोटा में आईआईटी की तैयारी कर रहा था। पीजी में रहने के दौरान खाने-पीने की तो दिक्कत नहीं थी, मगर अब जब दूसरे बच्चे अपने घर लौटने लगे तो बच्चे अकेले होने लगे थे। ऐसे में वे परेशान हो रहे थे। पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था और अवसादग्रस्त होने लगे थे। प्रदेश सरकार ने हमें सकुशल घर पहुंचाया, इसके लिए उनका धन्यवाद। - जतिन कुमार, डबुआ कॉलोनी
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कोटा में नीट की तैयारी कर रहा था। लॉकडाउन के दौरान वहां फंसे बच्चों की देखरेख के लिए स्थानीय प्रशासन तथा खासकर वहां के डीएम ओम कसेरा का काफी सहयोग रहा। उन्होंने बच्चों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी कर रखा था। बच्चों को वापस उनके घर सकुशल पहुंचाने के लिए हरियाणा और राजस्थान दोनों सरकारों का धन्यवाद है। - निशांत राठी, फतेहपुर चंदीला निवासी
कोटा में नीट की तैयारी कर रहा था। वहां पीजी में रहते हुए किसी चीज की ज्यादा परेशानी नहीं हुई, मगर अब जब बच्चे अपने घरों को लौटने लगे तो पीजी में छात्र कम हो गए। तब मैस बंद होने की नौबत आ गई। तब हर कोई अब अपने घर लौटने को बेताब था। - सुमित पांडे, सेक्टर-23 निवासी
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आईआईटी, नीट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोटा में फंसे बच्चों ने उन्हें वहां से निकालने के लिए प्रदेश सरकार से मदद की गुहार लगाई थी। इस पर शुक्रवार को प्रदेश सरकार ने वहां से बच्चों को लाने के लिए हरियाणा रोडवेज की बसों को भेजा था। रात को करीब दो बजे बसें वहां से बच्चों को लेकर निकली, जो सुबह करीब 4 बजे फरीदाबाद पहुंची। कुछ बच्चों को गांव नचौली स्थित लिंग्याज विद्यापीठ ले जाया गया, जबकि लड़कियों को सेक्टर-16 स्थित किसान भवन में लाया गया। यहां पर उनकी थर्मल स्क्रीनिंग के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया।
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कोटा में आईआईटी की तैयारी कर रहा था। पीजी में रहने के दौरान खाने-पीने की तो दिक्कत नहीं थी, मगर अब जब दूसरे बच्चे अपने घर लौटने लगे तो बच्चे अकेले होने लगे थे। ऐसे में वे परेशान हो रहे थे। पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था और अवसादग्रस्त होने लगे थे। प्रदेश सरकार ने हमें सकुशल घर पहुंचाया, इसके लिए उनका धन्यवाद। - जतिन कुमार, डबुआ कॉलोनी
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कोटा में नीट की तैयारी कर रहा था। लॉकडाउन के दौरान वहां फंसे बच्चों की देखरेख के लिए स्थानीय प्रशासन तथा खासकर वहां के डीएम ओम कसेरा का काफी सहयोग रहा। उन्होंने बच्चों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी कर रखा था। बच्चों को वापस उनके घर सकुशल पहुंचाने के लिए हरियाणा और राजस्थान दोनों सरकारों का धन्यवाद है। - निशांत राठी, फतेहपुर चंदीला निवासी
कोटा में नीट की तैयारी कर रहा था। वहां पीजी में रहते हुए किसी चीज की ज्यादा परेशानी नहीं हुई, मगर अब जब बच्चे अपने घरों को लौटने लगे तो पीजी में छात्र कम हो गए। तब मैस बंद होने की नौबत आ गई। तब हर कोई अब अपने घर लौटने को बेताब था। - सुमित पांडे, सेक्टर-23 निवासी