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नौका पर सवार होकर आ रही हैं मां, हाथी पर गमन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Tue, 09 Oct 2018 11:36 PM IST
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शारदीय नवरात्र का शुभारंभ बुधवार से माता के आगमन से होगा। माता रानी इस बार नौका पर सवार होकर रही हैं। मां का नौका पर सवार होना सर्वसिद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही उनका गमन गजानन पर होगा। यह अधिक वर्षा और अच्छी फसल का प्रतीक है।
बांके बिहारी मंदिर के आचार्य संतोष कुमार ने बताया कि बुधवार को कलश स्थापना होने पर माता नौका पर सवार होकर आ रही हैं। देवी भागवत के अनुसार, नौका पर सवार होकर आना सर्वसिद्धि के लिए होता है। माता का गमन हाथी पर हो रहा है जो अधिक वर्षा और अच्छी फसल का सूचक है। इसके साथ ही इस बार सर्दी भी अच्छी होगी।
नवरात्र में व्रत का विधान भी है। सभी व्यक्तियों को अपने श्रद्धानुसार व्रत करना चाहिए। ईएसआईसी में तैनात डा. अंजू भारद्वाज ने बताया कि शारीरिक शुद्धि के लिए आयुर्वेद में प्रत्येक छ: महीने या दो प्रमुख मौसमों गर्मी और सर्दी के बाद पंचकर्म कराने की सलाह दी जाती है। इसके लिए चैत्र (मार्च-अप्रैल) और अश्विन (सितंबर-अक्तूबर) महीना बेहतर माना जाता है। इसलिए शारीरिक शुद्धि का एक आसान स्वरूप हमें नवरात्र में मिल जाता है। इसे एक प्रकार से लंघन चिकित्सा भी कहा जाता है।
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- सुबह 6.53 से 9.13 बजे तक लाभ का चौघड़िया और तुला लग्न
- सुबह 9.13 से 11.31 बजे तक अमृत का चौघड़िया और वृश्चिक लग्न
शहर में सजे मंदिर, बाजारों में रही रौनक
नवरात्र के लिए शहर भर के मंदिर रंगबिरंगी लाइटों से जगमगा उठे। इसके साथ ही मंगलवार सुबह से ही बाजार में बड़ी धूम रही। श्राद्ध के दौरान जहां बाजार ठप पड़े थे, वहीं मंगलवार को बाजारों में रौनक देखने को मिली। सबसे ज्यादा नारियल, माता की मूर्ति और माता की चुनरी की खरीदारी लोग करते नजर आए। एनएच-1 स्थित श्री महारानी वैष्णव देवी मंदिर के प्रधान सेवक जगदीश भाटिया ने बताया कि बुधवार सुबह मंदिर में कलश स्थापना और दुर्गा पूजा के साथ ही ज्योति प्रचंड की जाएगी। 17 अक्टूबर को अष्टमी के अवसर पर फूलों वाली मंडली के नाम से मशहूर राज सहगल ग्रुप द्वारा रात दस बजे से सुबह चार बजे तक माता का जागरण किया जाएगा। इसके बाद 18 अक्टूबर को रामनवमी पूजन व हवन यज्ञ के बाद कंचक पूजन व विशाल भंडारा आयोजित किया जाएगा।
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बांके बिहारी मंदिर के आचार्य संतोष कुमार ने बताया कि बुधवार को कलश स्थापना होने पर माता नौका पर सवार होकर आ रही हैं। देवी भागवत के अनुसार, नौका पर सवार होकर आना सर्वसिद्धि के लिए होता है। माता का गमन हाथी पर हो रहा है जो अधिक वर्षा और अच्छी फसल का सूचक है। इसके साथ ही इस बार सर्दी भी अच्छी होगी।
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नवरात्र में व्रत का विधान भी है। सभी व्यक्तियों को अपने श्रद्धानुसार व्रत करना चाहिए। ईएसआईसी में तैनात डा. अंजू भारद्वाज ने बताया कि शारीरिक शुद्धि के लिए आयुर्वेद में प्रत्येक छ: महीने या दो प्रमुख मौसमों गर्मी और सर्दी के बाद पंचकर्म कराने की सलाह दी जाती है। इसके लिए चैत्र (मार्च-अप्रैल) और अश्विन (सितंबर-अक्तूबर) महीना बेहतर माना जाता है। इसलिए शारीरिक शुद्धि का एक आसान स्वरूप हमें नवरात्र में मिल जाता है। इसे एक प्रकार से लंघन चिकित्सा भी कहा जाता है।
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- सुबह 6.53 से 9.13 बजे तक लाभ का चौघड़िया और तुला लग्न
- सुबह 9.13 से 11.31 बजे तक अमृत का चौघड़िया और वृश्चिक लग्न
शहर में सजे मंदिर, बाजारों में रही रौनक
नवरात्र के लिए शहर भर के मंदिर रंगबिरंगी लाइटों से जगमगा उठे। इसके साथ ही मंगलवार सुबह से ही बाजार में बड़ी धूम रही। श्राद्ध के दौरान जहां बाजार ठप पड़े थे, वहीं मंगलवार को बाजारों में रौनक देखने को मिली। सबसे ज्यादा नारियल, माता की मूर्ति और माता की चुनरी की खरीदारी लोग करते नजर आए। एनएच-1 स्थित श्री महारानी वैष्णव देवी मंदिर के प्रधान सेवक जगदीश भाटिया ने बताया कि बुधवार सुबह मंदिर में कलश स्थापना और दुर्गा पूजा के साथ ही ज्योति प्रचंड की जाएगी। 17 अक्टूबर को अष्टमी के अवसर पर फूलों वाली मंडली के नाम से मशहूर राज सहगल ग्रुप द्वारा रात दस बजे से सुबह चार बजे तक माता का जागरण किया जाएगा। इसके बाद 18 अक्टूबर को रामनवमी पूजन व हवन यज्ञ के बाद कंचक पूजन व विशाल भंडारा आयोजित किया जाएगा।