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प्रदेश में 55 फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Tue, 31 May 2016 10:18 AM IST
सार
- प्रदेश की ज्यादातर गर्भवती रह जाती हैं सुविधाओं से वंचित
- नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे: एक तिहाई महिलाओं को प्रसव के दो दिन के भीतर डाक्टरी सहायता नहीं मिलती
- 32.5 फीसदी महिलाओं को ही मिल पाती है आयरन, फोलिक एसिड की पूरी डोज
- 54.9 फीसदी महिलाएं गर्भावस्था के दौरान अनिवार्य चार चेकअप से भी वंचित
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विस्तार
प्रदेश में गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को उचित स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं हो रही हैं। आधी से ज्यादा गर्भवती खून की कमी का शिकार हैं, लेकिन सिर्फ 32.5 फीसदी को ही मानक के मुताबिक सौ दिन तक आयरन और फोलिक एसिड की डोज उपलब्ध कराई जाती है।
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मालूम हो कि सौ दिन तक आयरन और फोलिक एसिड का डोज हर एक गर्भवती को दिया जाना जरूरी माना जाता है। करीब 37 फीसदी महिलाओं को पहले तीन माह में चेकअप भी नहीं होता। 54.9 फीसदी महिलाएं गर्भावस्था के दौरान अनिवार्य चार चेकअप से भी वंचित रह जाती हैं।
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एक तिहाई महिलाओं को अभी भी प्रसव के दो दिन के भीतर डाक्टरी सहायता नहीं उपलब्ध होती है। प्रदेश की गर्भवती महिलाओं की यह सच्चाई नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4, (2015-16) में बयान की गई है।
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सबसे खर्चीला फरीदाबाद
बाबा फरीद की नगदी में प्रति प्रसव पर सबसे ज्यादा 3856 रुपये खर्च किए गए। बावजूद इसके आधी से ज्यादा प्रसूताओं की पहली तिमाही में गर्भ की जांच नहीं की गई। सत्तर फीसदी गर्भवतियों ने आवश्यक चार प्रसव पूर्व जांच नहीं कराई। महज 18.5 फीसदी गर्भवतियों को ही आयरन, फोलिक एसिड की गोलियां उपलब्ध कराई गईं।
मेवात जिला सबसे पीछे
सर्वे के मुताबिक, गर्भवतियों की स्वास्थ्य देखभाल में मेवात जिला सबसे पीछे है। यहां 78.6 फीसदी गर्भवती खून की कमी का शिकार हैं, जबकि महज 6.2 फीसदी को ही आयरन, फोलिक एसिड की पूरी डोज उपलब्ध कराई गई। करीब नब्बे फीसदी गर्भवतियों ने प्रसव पीड़ा शुरू होने से पहले अस्पताल का मुंह नहीं देखा। यहां एक प्रसव पर सरकार की ओर से औसतन 1864 रुपये खर्च किए जाते हैं।
यमुनानगर सबसे बेहतर
सबसे बेहतर हालात यमुना नगर के हैं। यहां 90.5 फीसदी महिलाओं की गर्भ ठहरने के तीन माह के भीतर जांच की गई। गर्भावस्था की नौ माह की अवस्था के दौरान तीन चौथाई महिलाओं ने आवश्यक चार जांच करवाईं। खास बात यह कि यहां 55.8 फीसदी गर्भवती एनिमिक पाई गईं, लेकिन आयरन, फोलिक एसिड की सौ दिन की डोज 61.5 फीसदी को उपलब्ध कराई गई।
आधे से ज्यादा शिशु कोलस्ट्रम से वंचित
सर्वे के मुताबिक प्रदेश में 42.4 फीसदी शिशु एक जन्म से एक घंटे के भीतर मां का पहला पीला गाढ़ा दूध (कोलस्ट्रम) पीने से वंचित रह गए। छह माह की उम्र तक सिर्फ 50 फीसदी शिशु ही सिर्फ मां के दूध पर निर्भर रहे। छह माह से दो साल तक के महज 7.5 फीसदी बच्चों को ही पर्याप्त पोषाहार मिले बाकी 92.5 फीसदी अल्पपोषण या कुपोषण का शिकार हुए। यही वजह है कि पांच साल की उम्र तक आते आते 34 फीसदी बच्चे बौने और 29.4 फीसदी बच्चे कम वजन वाले पाए गए।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे एक नजर में
पहली तिमाही में जांच चार विजिट आयरन डोज एनिमिक औसत खर्च
अंबाला 78.2 64.7 48.2 54.7 785
पलवल 30.7 19 8.1 58.6 2306
सोनीपत 72.9 38.7 29.9 65.5 2589
मेवात 12.8 6.5 6.2 78.6 1864
महेंद्रगढ़ 74.1 44.3 35.6 43.0 1081
करनाल 80.2 63.1 39.6 66.3 728
पंचकूला 86.7 81.5 51.9 38.7 896
रेवाड़ी 54.7 28.7 24.0 48.4 1369
पानीपत 72.6 40.3 16.1 50.2 1927
सिरसा 77.2 55.9 25.2 52.8 500
रोहतक 73.2 48.4 27.7 58.7 1909
फरीदाबाद 48.3 30.1 18.5 31.0 3856
हिसार 59.8 40.5 32.9 49.8 949
कुरुक्षेत्र 74.5 65.0 39.6 32.9 923
कैथल 78.6 61.0 54.9 54.4 519
झज्जर 68.6 52.7 30.5 59.8 1217
जींद 82.5 57.1 33.2 62.3 1099
फतेहाबाद 87.5 60.7 49.1 67.6 850
यमुनानगर 90.5 75.4 61.5 55.8 1044
भिवानी 70.9 53.8 31.9 42.3 1108
गुडग़ांव 38.3 33.1 19.4 66.5 2843
हरियाणा 63.2 45.1 32.5 55.0 1503