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सुरक्षित नहीं हैं शहर में कई इमारतें
Updated Wed, 18 Jul 2018 08:44 PM IST
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सुरक्षित नहीं हैं शहर मेें कई इमारतें
- निगम अधिकारी निर्माण में मानकों के पालन की नहीं करते विधिवत जांच
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी में कई इमारतें रिहाइश के लिए सुरक्षित नहीं हैं, बावजूद इनमें से अधिकतर का इस्तेमाल किया जा रहा है। निगम और जिला प्रशासन के संज्ञान में होने के बावजूद इन जर्जर इमारतों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। लोगों को आशंका है कि इन जर्जर इमारतों में ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी गांव जैसी घटना हो सकती है।
बाबा फरीद की नगरी ओल्ड फरीदाबाद, राजा नाहर सिंह का शहर बल्लभगढ़ और 1950 के दशक में बसाए गए न्यू इंडस्ट्रियल टाउन (एनआईटी) में कई सरकारी और निजी इमारतें कई दशक पुरानी हैं। सरकारी इमारतें रखरखाव के अभाव में तो निजी इमारतों में पुराने ढांचे पर ही नया निर्माण करने से जर्जर हालत में हैं। जर्जर हो चुकी इन निजी इमारतों में तो आज भी लोग रह रहे हैं। कुछ जर्जर सरकारी इमारतों को जिन्हें त्यागा हुआ घोषित कर दिया गया है को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर जर्जर सरकारी इमारतों में आज भी लोग रह रहे हैं या उनमें रोजमर्रा की गतिविधियां चल रही हैं।
बिना नक्शा और डिजाइन पास कराए बन रहीं इमारतें
नगर निगम जिला योजनाकार कार्यालय के मुताबिक प्रतिवर्ष करीब सवा दो सौ नक्शों के आवेदन आते हैं। वर्तमान में शहर में एक हजार से अधिक निर्माण कार्य चल रहे हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि शहर में बिना नक्शा और डिजायन अप्रूव कराए ही निर्माण कार्य चल रहे हैं। निगम और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण नियमों के मुताबिक रेेजिडेंशियल इमारत की अधिकतम ऊंचाई 15 मीटर जबकि कॉमर्शियल इमारत की ऊंचाई जोन और स्थान के आधार 30 मीटर तक निर्धारित की जा सकती है। शहर में खास कर एनआईटी क्षेत्र में इस मानक का उल्लंघन कर कई इमारतें बनाई जा रही हैं। नियमानुसार इमारत के निर्माण के दौरान निगम या एचएसवीपी का बिल्डिंग इंस्पेक्टर नीवं रखी जाने, पंाच फिट ऊंचाई तक निर्माण, पैरापेट निर्माण और लेंटर डाले जाने के समय निर्माण का निरीक्षण करता है, यदि निर्माण में कोई खामी है तो उसे रोक कर सही करवाया जाता है, लेकिन इस नियम का पालन नहीं किया जाता। अतिरिक्त आयुक्त देवेंद्र कुमार ने बताया कि शहर में अवैध निर्माण के लिए समय समय पर सर्वे कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है।
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यहां है जर्जर बिल्डिंग
- बीके जिला राजकीय अस्पताल की पुरानी तीन बिल्डिंग
- दस से अधिक सरकारी विद्यालयों की इमारतें
- बिजली निगम के छह कार्यालय
- बीस से अधिक पशु अस्पतालों के पुराने भवन
- एनएच-पांच में 12 से अधिक निजी रिहायशी मकान
- एनएच-दो व तीन में 10 से अधिक निजी रिहायशी मकान
-अन्य कालोनियों में 50 से अधिक निजी रिहायशी मकान
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- निगम अधिकारी निर्माण में मानकों के पालन की नहीं करते विधिवत जांच
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी में कई इमारतें रिहाइश के लिए सुरक्षित नहीं हैं, बावजूद इनमें से अधिकतर का इस्तेमाल किया जा रहा है। निगम और जिला प्रशासन के संज्ञान में होने के बावजूद इन जर्जर इमारतों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। लोगों को आशंका है कि इन जर्जर इमारतों में ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी गांव जैसी घटना हो सकती है।
बाबा फरीद की नगरी ओल्ड फरीदाबाद, राजा नाहर सिंह का शहर बल्लभगढ़ और 1950 के दशक में बसाए गए न्यू इंडस्ट्रियल टाउन (एनआईटी) में कई सरकारी और निजी इमारतें कई दशक पुरानी हैं। सरकारी इमारतें रखरखाव के अभाव में तो निजी इमारतों में पुराने ढांचे पर ही नया निर्माण करने से जर्जर हालत में हैं। जर्जर हो चुकी इन निजी इमारतों में तो आज भी लोग रह रहे हैं। कुछ जर्जर सरकारी इमारतों को जिन्हें त्यागा हुआ घोषित कर दिया गया है को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर जर्जर सरकारी इमारतों में आज भी लोग रह रहे हैं या उनमें रोजमर्रा की गतिविधियां चल रही हैं।
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बिना नक्शा और डिजाइन पास कराए बन रहीं इमारतें
नगर निगम जिला योजनाकार कार्यालय के मुताबिक प्रतिवर्ष करीब सवा दो सौ नक्शों के आवेदन आते हैं। वर्तमान में शहर में एक हजार से अधिक निर्माण कार्य चल रहे हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि शहर में बिना नक्शा और डिजायन अप्रूव कराए ही निर्माण कार्य चल रहे हैं। निगम और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण नियमों के मुताबिक रेेजिडेंशियल इमारत की अधिकतम ऊंचाई 15 मीटर जबकि कॉमर्शियल इमारत की ऊंचाई जोन और स्थान के आधार 30 मीटर तक निर्धारित की जा सकती है। शहर में खास कर एनआईटी क्षेत्र में इस मानक का उल्लंघन कर कई इमारतें बनाई जा रही हैं। नियमानुसार इमारत के निर्माण के दौरान निगम या एचएसवीपी का बिल्डिंग इंस्पेक्टर नीवं रखी जाने, पंाच फिट ऊंचाई तक निर्माण, पैरापेट निर्माण और लेंटर डाले जाने के समय निर्माण का निरीक्षण करता है, यदि निर्माण में कोई खामी है तो उसे रोक कर सही करवाया जाता है, लेकिन इस नियम का पालन नहीं किया जाता। अतिरिक्त आयुक्त देवेंद्र कुमार ने बताया कि शहर में अवैध निर्माण के लिए समय समय पर सर्वे कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है।
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यहां है जर्जर बिल्डिंग
- बीके जिला राजकीय अस्पताल की पुरानी तीन बिल्डिंग
- दस से अधिक सरकारी विद्यालयों की इमारतें
- बिजली निगम के छह कार्यालय
- बीस से अधिक पशु अस्पतालों के पुराने भवन
- एनएच-पांच में 12 से अधिक निजी रिहायशी मकान
- एनएच-दो व तीन में 10 से अधिक निजी रिहायशी मकान
-अन्य कालोनियों में 50 से अधिक निजी रिहायशी मकान