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आखिर बच्चों को कैसे मिले इतने खतरनाक केमिकल

Thu, 08 Nov 2018 11:16 PM IST
Updated Thu, 08 Nov 2018 11:16 PM IST
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आखिर बच्चों को कैसे मिले इतने खतरनाक केमिकल
प्रतीकात्मक तस्वीर
कपड़ा कॉलोनी में दिवाली की रात केमिकल (गंधक और पोटाशियम) को आतिशबाजी के तौर पर इस्तेमाल कर रहे किशोर को आखिर इतने खतरनाक केमिकल कैसे मिले यह बड़ा सवाल है। कॉलोनी के लोगों के अनुसार वहीं के एक पंसारी ने पंकज को वह केमिकल एक हजार रुपये किलो के हिसाब से बेचा था और कॉलोनी के ही एक वेल्डर ने तीन सौ रुपये में वह लोहे के पाइप को बंदूक के रूप में बनाकर बेचा था।
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विज्ञान अध्यापक अजय शर्मा ने बताया कि गंधक तो बाजार में फिर भी आसानी से मिल जाता है, मगर पोटेशियम का इस तरह खुलेआम बिकना खतरनाक है। पोटेशियम नाइट्रेट विस्फोटक है और आतिशबाजी बनाने के दौरान उसका इस्तेमाल होता है। उसके लिए किस केमिकल को कितनी मात्रा में मिलाना है, वह सब तय होता है। ऐसे में यदि गलत अनुपात में मिलाने से हादसा काफी बड़ा हो सकता है।
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वहीं कॉलोनी के लोगों का भी आरोप है कि वहीं के एक पंसारी ने बच्चों को यह केमिकल बेचा है, 70-80 रुपये किलो वाले इस केमिकल को एक हजार रुपये किलो के हिसाब से बेचा गया। इतने गंभीर हादसे के बाद भी पुलिस के पास जानकारी नहीं होना, पुलिस के लचरपन को दर्शाता है। हादसे के बाद कपड़ा कॉलोनी के लोग दहशत में हैं।
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300 से 500 रुपये में बेचे बंदूकनुमा पाइप
कपड़ा कॉलोनी निवासी मनोज कुमार ने बताया कॉलोनी के ही एक वेल्डर ने लोहे के पाइप को बंदूक का रूप देकर पांच-पांच सौ रुपये में बेचा था। दिवाली पर आतिशबाजी नहीं मिलने का सभी ने फायदा उठाया। मनोज के अनुसार पिछले करीब एक सप्ताह में उस वेल्डर ने इस तरह के तीन सौ से अधिक पाइप बेचे हैं। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों उस वेल्डर की ठुकाई भी की है। मगर दिव्यांग होने के कारण उस पर तरस खाकर उसे छोड़ दिया।


चंदा कर दिए इलाज के पैसे
इस हादसे में सबसे ज्यादा पंकज की हालत खराब है। उसके हाथ का ऑपरेशन हुआ है। अभी भी डॉक्टर उसकी हालत ठीक नहीं बता रहे हैं। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण पंकज के परिजन उसका इलाज भी ढंग से नहीं करवा पा रहे हैं। मनोज कुमार ने बताया कि उनके साथ कॉलोनी के लोगों ने चंदा कर 35 हजार रुपये जमा किए थे, जिसे बृहस्पतिवार शाम को वे उसके परिजनों को सफदरजंग अस्पताल में देकर आए हैं।
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