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प्लानिंग शाखा के लिपिक के खिलाफ एफआईआर कराने के आदेश
Updated Fri, 04 May 2018 10:52 PM IST
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प्लानिंग शाखा के लिपिक के खिलाफ एफआईआर कराने के आदेश
फरीदाबाद। नगर निगम की प्लानिंग शाखा के लिपिक विनेश हुड्डा के खिलाफ निगम आयुक्त मो. शाईन ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। विनेश ने 2014 में एक प्लॉट का शुल्क वसूल कर निगम के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर करीब एक लाख रुपये की हेराफेरी की थी। उसके खिलाफ तत्कालीन निगमायुक्त ने एफआईआर के आदेश जारी किए थे लेकिन मामला दबा दिया गया था।
नगर निगम सूत्रों के मुताबिक विनेश हुड्डा 2014 में प्लानिंग ब्रांच मे लिपिक के पद पर था। उसने एक प्लॉट धारक से पौने दो लाख रुपये लेकर उसे तो इतने की ही रसीद दी लेकिन निगम के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर कुछ हजार रुपये ही दर्शाए। प्लॉट मालिक ने माप जोख की तो प्लॉट दो वर्गगज कम निकला। इस पर उसने नगर निगम में दो वर्गगज का शुल्क वापस करने के लिए आवेदन दिया। प्लॉट मालिक के आवेदन पर ऑडिट शाखा ने फाइल की जांच की थी। इसमें पाया गया कि प्लॉट धारक को रसीद तो पौने दो लाख रुपये की दी गई है लेकिन निगम रिकॉर्ड में चंद हजार रुपये की शुल्क वसूली दर्ज की गई है। मामले में विनेश हुड्डा की बेईमानी साबित हुई तो तत्कालीन निगमायुक्त ने 10 जून 2014 को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए थे।
खास बात यह रही कि अधिकारियों ने तत्कालीन निगमायुक्त के आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया। लगभग चार साल बाद निगमायुक्त मो. शाईन ने प्लानिंग शाखा की फाइलों की ऑडिट शुरू करवाई तो पिछला आदेश सामने आया। निगमायुक्त ने अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं होने पर आश्चर्य जताते हुए डीटीपी को विनेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए। निगमायुक्त मो. शाईन ने बताया कि मामला 2014 का है लिपिक विनेश के खिलाफ केस दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
फरीदाबाद। नगर निगम की प्लानिंग शाखा के लिपिक विनेश हुड्डा के खिलाफ निगम आयुक्त मो. शाईन ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। विनेश ने 2014 में एक प्लॉट का शुल्क वसूल कर निगम के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर करीब एक लाख रुपये की हेराफेरी की थी। उसके खिलाफ तत्कालीन निगमायुक्त ने एफआईआर के आदेश जारी किए थे लेकिन मामला दबा दिया गया था।
नगर निगम सूत्रों के मुताबिक विनेश हुड्डा 2014 में प्लानिंग ब्रांच मे लिपिक के पद पर था। उसने एक प्लॉट धारक से पौने दो लाख रुपये लेकर उसे तो इतने की ही रसीद दी लेकिन निगम के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर कुछ हजार रुपये ही दर्शाए। प्लॉट मालिक ने माप जोख की तो प्लॉट दो वर्गगज कम निकला। इस पर उसने नगर निगम में दो वर्गगज का शुल्क वापस करने के लिए आवेदन दिया। प्लॉट मालिक के आवेदन पर ऑडिट शाखा ने फाइल की जांच की थी। इसमें पाया गया कि प्लॉट धारक को रसीद तो पौने दो लाख रुपये की दी गई है लेकिन निगम रिकॉर्ड में चंद हजार रुपये की शुल्क वसूली दर्ज की गई है। मामले में विनेश हुड्डा की बेईमानी साबित हुई तो तत्कालीन निगमायुक्त ने 10 जून 2014 को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए थे।
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खास बात यह रही कि अधिकारियों ने तत्कालीन निगमायुक्त के आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया। लगभग चार साल बाद निगमायुक्त मो. शाईन ने प्लानिंग शाखा की फाइलों की ऑडिट शुरू करवाई तो पिछला आदेश सामने आया। निगमायुक्त ने अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं होने पर आश्चर्य जताते हुए डीटीपी को विनेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए। निगमायुक्त मो. शाईन ने बताया कि मामला 2014 का है लिपिक विनेश के खिलाफ केस दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
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