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महालक्ष्मी डेरा में 150 मकान तोड़े गए
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फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शनिवार को नगर निगम ने अरावली वन क्षेत्र में बसे महालक्ष्मी डेरा कॉलोनी में तोड़फोड़ की। इस दौरान करीब 150 मकानों को तोड़े गए। कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा है। हालांकि अपना आशियाना टूटता देख लोग रह न सके। डरे सहमे लोगों ने कार्रवाई का विरोध जताया और अधिकारियों से कार्रवाई रोकने की मांग की। लेकिन अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी और पुलिस ने उन्हें खदेड़ दिया।
अरावली में बने निर्माणों को लेकर पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने सभी निर्माणों को ढहाने के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निगम ने शुरुआत में कुछ फार्म हाउसों पर तोड़फोड़ कार्रवाई की। लेकिन, केवल खानापूर्ति तक सीमित रही। वन विभाग के अनुसार अरावली में करीब 140 फार्म हाउस, शिक्षण संस्थान, होटल और सोसाइटियां बनी हुई है। लेकिन निगम ने नौ फार्म हाउसों को तोड़ने के बाद कॉलोनियों में तोड़फोड़ कार्रवाई शुरू कर दी। इसे तहत सैनिक कॉलोनी चौक पर अरावली में बसी जमाई कॉलोनी और गुरुकुल इंद्रप्रस्थ कॉलोनी, नेहरू कॉलोनी व लक्ष्मीवाड़ा निवासियों को एक सप्ताह पहले निगम ने नोटिस जारी किए थे। पुलिस ने पैदल मार्च निकाला था। अधिकारियों द्वारा लगातार लोगों को घर खाली करने के लिए कहा गया।
सुबह 8 बजे पहुंच गई पुलिस टीम
महालक्ष्मी डेरा में तोड़फोड़ को लेकर सुबह आठ बजे पुलिस टीम कॉलोनी में पहुंच गई। प्रशासन की ओर से हर घर में चार-चार पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए। जिससे लोग किसी प्रकार का विरोध न कर सकें। दोपहर 11 बजे निगम का तोड़फोड़ दस्ता सात जेसीबी और एक पोकलेन के साथ पहुंचा। ग्रीनवैली के सामने से निगम ने तोड़फोड़ शुरू की। पुलिस ने लोगों को बलपूर्वक बाहर निकाल दिया और अलग-अलग जगह पर रोक दिया। जिससे लोग एक जगह इकट्ठे न हो सकें। सात जेसीबी ने पहाड़ी के निचले हिस्से में बने मकानों को ढहाया, तो पोकेलेन से पहाड़ी के ऊपरी हिस्से पर बने मकानों को ध्वस्त कर दिया। डरे सहमे लोग बेबस होकर केवल अपने घरों को टूटते देखते रहे। कुछ लोगों ने विरोध जताया। पुलिस ने उन्हें शांत करवा दिया। महालक्ष्मी डेरा कॉलोनी में ज्यादातर मजदूर तबके के लोग रहते हैं। महिलाएं आसपास की कोठियों में काम करती है। वहीं पुरुष कंपनियों में मजदूरी करते हैं।
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गुरुकुल में कार्रवाई किए बिना लौटा दस्ता
महालक्ष्मी डेरा क्षेत्र में करीब 400 मकान हैं। इनमें से करीब 250 मकान गुरुकुल क्षेत्र में आते हैं, जबकि 150 मकान अलग बने हुए थे। निगम तोड़फोड़ दस्ते ने महालक्ष्मी डेरा क्षेत्र में करीब तीन घंटे तोड़फोड़ की। इस दौरान करीब 150 मकानों को तोड़ा। यहां अधिकांश मकान टीन शेड के थे। इसलिए मकानों को तोड़ने में ज्यादा समय नहीं लगा। कुछ मकानों पर लेंटर था। इन मकानों को निगम ने सबसे अंत में तोड़ा। तीन से चार घंटे चली कार्रवाई के बाद तोड़फोड़ दस्ता वापस लौट गया। जबकि इस क्षेत्र से साथ ही गुरुकुल इंद्रप्रस्थ कॉलोनी बसी हुई है। निगम को यहां भी कार्रवाई करनी थी। लेकिन बिना तोड़फोड़ के टीम वापस लौट गई।
वर्जन
अरावली में बने अवैध निर्माण पर निगम ने एक बार फिर कार्रवाई शुरू कर दी है। शनिवार को महालक्ष्मी डेरा क्षेत्र में तोड़फोड़ की गई। इसके साथ ही जल्द अन्य जगहों पर तोड़फोड़ कार्रवाई शुरू की जाएगी। - यशपाल यादव, निगमायुक्त
यहां 40 वर्ष से रह रहे है। निगम ने एक झटके में मकान को आंखों के सामने देखते-देखते ध्वस्त कर दिया। आसपास की कॉलोनियों में कमरा भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में परिवार को लेकर कहां जाएं समझ नहीं आ रहा। - थान सिंह, स्थानीय निवासी
दो साल से कोरोना महामारी से परेशान थे। पहले नौकरी छूटी, घर बैठ गए। किसी तरह घर खर्च चलाया। अभी नौकरी लगी ही थी, कि निगम ने घरों को खाली करने का नोटिस थमा दिया। फिर नौकरी चली गई। मकान टूटने से अब पूरी तरह बेघर हो गया हूं। - ओम प्रकाश, स्थानीय निवासी
गांव में जमीन बेचकर माता पिता ने यहां घर बनाया था। किसी तरह बच्चों को पढ़ा लिखा रहे थे। काम धंधा पहले से ठप है। घर टूटने से परेशानी और ज्यादा बढ़ जाएगी। - होशियार सिंह, स्थानीय निवासी
निगम को हमारी कॉलोनी केवल अवैध लगी। इसलिए तोड़ दिया, जबकि कॉलोनी के साथ में हाईराइज इमारतें बन रही है। इन्हें कोई नहीं तोड़ता। यदि गरीबों के घरों को उजाड़ा जा रहा है तो अमीरों के घरों को भी तोड़ना चाहिए। - रामवीर सिंह, स्थानीय निवासी
सरकार ने कहा था कि जहां झुग्गी वहीं मकान। लेकिन सरकार केवल गरीबों को उजाड़ने का काम किया है। कॉलोनी के पास में अरावली वन क्षेत्र में बन रही हाईराइज सोसाइटी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। हमारे घर तोड़ दिए गए। - रोशन सिंह,स्थानीय निवासी
किसी तरह पैसे जोड़कर घर मुश्किल से घर बनाया था। तीन लाख रुपये घर बनाने में खर्च हो गए थे। निगम ने मिनटों में तोड़ दिया। इसके लिए सरकार को उन्हें मुआवजा देना चाहिए था। - छेदू सिंह, स्थानीय निवासी
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अरावली में बने निर्माणों को लेकर पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने सभी निर्माणों को ढहाने के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निगम ने शुरुआत में कुछ फार्म हाउसों पर तोड़फोड़ कार्रवाई की। लेकिन, केवल खानापूर्ति तक सीमित रही। वन विभाग के अनुसार अरावली में करीब 140 फार्म हाउस, शिक्षण संस्थान, होटल और सोसाइटियां बनी हुई है। लेकिन निगम ने नौ फार्म हाउसों को तोड़ने के बाद कॉलोनियों में तोड़फोड़ कार्रवाई शुरू कर दी। इसे तहत सैनिक कॉलोनी चौक पर अरावली में बसी जमाई कॉलोनी और गुरुकुल इंद्रप्रस्थ कॉलोनी, नेहरू कॉलोनी व लक्ष्मीवाड़ा निवासियों को एक सप्ताह पहले निगम ने नोटिस जारी किए थे। पुलिस ने पैदल मार्च निकाला था। अधिकारियों द्वारा लगातार लोगों को घर खाली करने के लिए कहा गया।
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सुबह 8 बजे पहुंच गई पुलिस टीम
महालक्ष्मी डेरा में तोड़फोड़ को लेकर सुबह आठ बजे पुलिस टीम कॉलोनी में पहुंच गई। प्रशासन की ओर से हर घर में चार-चार पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए। जिससे लोग किसी प्रकार का विरोध न कर सकें। दोपहर 11 बजे निगम का तोड़फोड़ दस्ता सात जेसीबी और एक पोकलेन के साथ पहुंचा। ग्रीनवैली के सामने से निगम ने तोड़फोड़ शुरू की। पुलिस ने लोगों को बलपूर्वक बाहर निकाल दिया और अलग-अलग जगह पर रोक दिया। जिससे लोग एक जगह इकट्ठे न हो सकें। सात जेसीबी ने पहाड़ी के निचले हिस्से में बने मकानों को ढहाया, तो पोकेलेन से पहाड़ी के ऊपरी हिस्से पर बने मकानों को ध्वस्त कर दिया। डरे सहमे लोग बेबस होकर केवल अपने घरों को टूटते देखते रहे। कुछ लोगों ने विरोध जताया। पुलिस ने उन्हें शांत करवा दिया। महालक्ष्मी डेरा कॉलोनी में ज्यादातर मजदूर तबके के लोग रहते हैं। महिलाएं आसपास की कोठियों में काम करती है। वहीं पुरुष कंपनियों में मजदूरी करते हैं।
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गुरुकुल में कार्रवाई किए बिना लौटा दस्ता
महालक्ष्मी डेरा क्षेत्र में करीब 400 मकान हैं। इनमें से करीब 250 मकान गुरुकुल क्षेत्र में आते हैं, जबकि 150 मकान अलग बने हुए थे। निगम तोड़फोड़ दस्ते ने महालक्ष्मी डेरा क्षेत्र में करीब तीन घंटे तोड़फोड़ की। इस दौरान करीब 150 मकानों को तोड़ा। यहां अधिकांश मकान टीन शेड के थे। इसलिए मकानों को तोड़ने में ज्यादा समय नहीं लगा। कुछ मकानों पर लेंटर था। इन मकानों को निगम ने सबसे अंत में तोड़ा। तीन से चार घंटे चली कार्रवाई के बाद तोड़फोड़ दस्ता वापस लौट गया। जबकि इस क्षेत्र से साथ ही गुरुकुल इंद्रप्रस्थ कॉलोनी बसी हुई है। निगम को यहां भी कार्रवाई करनी थी। लेकिन बिना तोड़फोड़ के टीम वापस लौट गई।
वर्जन
अरावली में बने अवैध निर्माण पर निगम ने एक बार फिर कार्रवाई शुरू कर दी है। शनिवार को महालक्ष्मी डेरा क्षेत्र में तोड़फोड़ की गई। इसके साथ ही जल्द अन्य जगहों पर तोड़फोड़ कार्रवाई शुरू की जाएगी। - यशपाल यादव, निगमायुक्त
यहां 40 वर्ष से रह रहे है। निगम ने एक झटके में मकान को आंखों के सामने देखते-देखते ध्वस्त कर दिया। आसपास की कॉलोनियों में कमरा भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में परिवार को लेकर कहां जाएं समझ नहीं आ रहा। - थान सिंह, स्थानीय निवासी
दो साल से कोरोना महामारी से परेशान थे। पहले नौकरी छूटी, घर बैठ गए। किसी तरह घर खर्च चलाया। अभी नौकरी लगी ही थी, कि निगम ने घरों को खाली करने का नोटिस थमा दिया। फिर नौकरी चली गई। मकान टूटने से अब पूरी तरह बेघर हो गया हूं। - ओम प्रकाश, स्थानीय निवासी
गांव में जमीन बेचकर माता पिता ने यहां घर बनाया था। किसी तरह बच्चों को पढ़ा लिखा रहे थे। काम धंधा पहले से ठप है। घर टूटने से परेशानी और ज्यादा बढ़ जाएगी। - होशियार सिंह, स्थानीय निवासी
निगम को हमारी कॉलोनी केवल अवैध लगी। इसलिए तोड़ दिया, जबकि कॉलोनी के साथ में हाईराइज इमारतें बन रही है। इन्हें कोई नहीं तोड़ता। यदि गरीबों के घरों को उजाड़ा जा रहा है तो अमीरों के घरों को भी तोड़ना चाहिए। - रामवीर सिंह, स्थानीय निवासी
सरकार ने कहा था कि जहां झुग्गी वहीं मकान। लेकिन सरकार केवल गरीबों को उजाड़ने का काम किया है। कॉलोनी के पास में अरावली वन क्षेत्र में बन रही हाईराइज सोसाइटी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। हमारे घर तोड़ दिए गए। - रोशन सिंह,स्थानीय निवासी
किसी तरह पैसे जोड़कर घर मुश्किल से घर बनाया था। तीन लाख रुपये घर बनाने में खर्च हो गए थे। निगम ने मिनटों में तोड़ दिया। इसके लिए सरकार को उन्हें मुआवजा देना चाहिए था। - छेदू सिंह, स्थानीय निवासी