{"_id":"5b084af64f1c1b8f6e8b4951","slug":"131527270134-faridabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डेंगू मलेरिया विभाग की लाचारी, लाखों की आबादी पर मुट्ठी भर कर्मचारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेंगू मलेरिया विभाग की लाचारी, लाखों की आबादी पर मुट्ठी भर कर्मचारी
Updated Fri, 25 May 2018 11:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
डेंगू मलेरिया विभाग की लाचारी, लाखों की आबादी पर मुट्ठी भर कर्मचारी
फरीदाबाद। मौसमी बीमारियों से लड़ने में डेंगू-मलेरिया विभाग असहाय है। विभाग के पास 103 की एवज में केवल 35 फील्ड सहयोगी ही मौजूद हैं। मलेरिया सुपरवाइजर भी 39 में से महज 10 ही हैं। ऐसे में विभाग केवल हाई रिस्क एरिया पर काम कर रहा है। विभाग की मजबूरी है कि लाखों की आबादी के लिए गिने-चुने कर्मचारियों की सहायता से ही बीमारियों से निपटने के आदेश दिए जाते हैं।
विभाग के पास अति संवेदनशील क्षेत्र के गांव मोहना में सिर्फ एक गैंग स्प्रे वर्कर है। अर्बन क्षेत्र में निगरानी के लिए भी अर्बन मलेरिया स्कीम (यूएमस) के तहत 50 में से केवल 4 यूएमओ पदासीन हैं। मलेरिया विभाग प्रभारी के लिए कर्मचारियों और सहयोगियों के अभाव में जिले को डेंगू मलेरिया से बचाने की चिंता सता रही है। ऐसे में समस्या यह भी है कि कई अधीनस्थों को अन्य सरकारी कामों में सहायक के रूप में भी बुला लिया जाता है। विभाग एक मास्टर प्लान तैयार कर हाई रिस्क एरिया पर ध्यान लगा रहा है। डेंगू मलेरिया विभाग प्रभारी डॉ. गीता पालिया ने बताया कि विभाग की दूसरी बड़ी समस्या लोगों में जानकारी का अभाव है। ऐसे में आने वाला मौसम विभाग और स्थानीय लोगों के लिए चुनौती भरा होगा।
कोट
विभाग मौजूदा सुविधाओं में ही हर संभव प्रयास की कोशिश में है। मौजूदा सहयोगियों के साथ मलेरिया-डेंगू से बचाव किसी जंग से कम नहीं है। विभाग में तय संख्या में कर्मचारी तैनात कर दिए जाएं तो काफी हद तक लोगों को जागरूक करने के साथ ही बीमारी को रोकने में भी मदद मिल सकती है।
विज्ञापन
- डॉ. गीता पालिया, प्रभारी, डेंगू-मलेरिया विभाग
फरीदाबाद। मौसमी बीमारियों से लड़ने में डेंगू-मलेरिया विभाग असहाय है। विभाग के पास 103 की एवज में केवल 35 फील्ड सहयोगी ही मौजूद हैं। मलेरिया सुपरवाइजर भी 39 में से महज 10 ही हैं। ऐसे में विभाग केवल हाई रिस्क एरिया पर काम कर रहा है। विभाग की मजबूरी है कि लाखों की आबादी के लिए गिने-चुने कर्मचारियों की सहायता से ही बीमारियों से निपटने के आदेश दिए जाते हैं।
विभाग के पास अति संवेदनशील क्षेत्र के गांव मोहना में सिर्फ एक गैंग स्प्रे वर्कर है। अर्बन क्षेत्र में निगरानी के लिए भी अर्बन मलेरिया स्कीम (यूएमस) के तहत 50 में से केवल 4 यूएमओ पदासीन हैं। मलेरिया विभाग प्रभारी के लिए कर्मचारियों और सहयोगियों के अभाव में जिले को डेंगू मलेरिया से बचाने की चिंता सता रही है। ऐसे में समस्या यह भी है कि कई अधीनस्थों को अन्य सरकारी कामों में सहायक के रूप में भी बुला लिया जाता है। विभाग एक मास्टर प्लान तैयार कर हाई रिस्क एरिया पर ध्यान लगा रहा है। डेंगू मलेरिया विभाग प्रभारी डॉ. गीता पालिया ने बताया कि विभाग की दूसरी बड़ी समस्या लोगों में जानकारी का अभाव है। ऐसे में आने वाला मौसम विभाग और स्थानीय लोगों के लिए चुनौती भरा होगा।
विज्ञापन
कोट
विभाग मौजूदा सुविधाओं में ही हर संभव प्रयास की कोशिश में है। मौजूदा सहयोगियों के साथ मलेरिया-डेंगू से बचाव किसी जंग से कम नहीं है। विभाग में तय संख्या में कर्मचारी तैनात कर दिए जाएं तो काफी हद तक लोगों को जागरूक करने के साथ ही बीमारी को रोकने में भी मदद मिल सकती है।
विज्ञापन
- डॉ. गीता पालिया, प्रभारी, डेंगू-मलेरिया विभाग