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दवा लेकर दिया 'दर्द': फर्जी ESI कार्ड से 43 लाख का इलाज करा गए 13 मरीज, निजी अस्पताल ने भेजा बिल तो हुआ खुलास

Tue, 12 Dec 2023 07:02 PM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 12 Dec 2023 07:02 PM IST
सार

कर्मचारी राज्य बीमा योजना के तहत बीमाकृत लोगों को इलाज मुफ्त में किया जाता है। इसके लिए एनआईटी तीन में मेडिकल कॉलेज, सेक्टर आठ में अस्पताल के अलावा सात डिस्पेंसरी भी हैं। यहां किसी कारणवश मरीज के इलाज के लिए सुविधा उपलब्ध नहीं होने की सूरत में मरीज के निजी अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। 

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13 patients got treatment worth Rs 43 lakh using fake ESI card in faridabad
फर्जी ईएसआई कार्ड दिखाकर अस्पताल में कराया इलाज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ईएसआई (ESI) कार्ड से इलाज के खेल का एक मामला हरियाणा के फरीदाबाद में सामने आया है। 13 मरीजों ने फर्जी कार्ड के दम पर निजी अस्पताल में अपना इलाज कराया और चलते बने। मामले का खुलासा तब हुआ जब अस्पताल ने 44.53 लाख का बिल कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) को भेज दिया। जांच में पाया मरीजों के कार्ड का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। मामला अजरौंदा चौक स्थित एसएसबी अस्पताल का है। प्रबंधन ने सेंट्रल थाना में मरीजों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है।

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एसएसबी अस्पताल के मुख्य सुरक्षा अधिकारी दीपक शर्मा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया अस्पताल सीजीएएस, ईजीएचएस, ईएसआई, पीएसयू, कॉरपोरेट आर्गेनाइजेशन के साथ पैनल पर है। फरवरी 2018 में अस्पताल में 13 मरीज बल्लभगढ़ सेक्टर-आठ ईएसआईसी शाखा से रेफर किए गए थे। इनमें से अधिकांश मरीज फरीदाबाद और पलवल से आए थे। सभी के ईएसआई कार्ड देखकर उन्हें भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। हालात गंभीर होने के कारण कई मरीजों के ऑपरेशन भी किए गए।

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पूरी तरह से ठीक होने के बाद अस्पताल ने मरीजों को छुट्टी दी गई। अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों के इलाज में आए कुल 43.53 लाख रुपये का बिल ईएसआईसी सेक्टर-आठ को भेज दिया लेकिन बिल खारिज कर दिया गया। पूछताछ करने पर ईएसआईसी अधिकारियों ने बताया मरीजों के ईएसआई कार्ड के लिए जमा दस्तावेज फर्जी हैं।

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कार्ड बनवाने के दौरान ही शुरू कर दिया था फर्जीवाड़ा
एसएसबी अस्पताल के प्रबंधन के मुताबिक उन्होंने ईएसआईसी के रेफर अनुमति देखने के बाद ही मरीजों का इलाज किया। बीमाकृत मरीजों के इलाज के सभी दस्तावेज पहले संबंधित ईएसआईसी कार्यालय भेजे जाते हैं, वहां से अनुमति मिलने के बाद इलाज शुरू किया जाता है। साल 2021-22 में ईएसआईसी ने बिल खारिज करते हुए कहा कि मरीजों ने कार्ड बनाने के दौरान दिए गए दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर रखी है। पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने सितंबर से मामले की जांच शुरू की थी। जांच के बाद सोमवार रात सेक्टर-12 स्थित सेंट्रल थाने में केस दर्ज कर लिया गया।

13 लोगों के नाम सहित दर्ज हुआ मामला
अस्पताल प्रबंधन के पास इलाज के लिए आए सभी मरीजों का डाटा है। इसी के आधार पर पुलिस ने पुष्पा देवी, देव दत्त, डिंपी देवी, विशाल कुमार, ज्ञान चंद, महेश कुमारी, गुलनाज, रोशनी, रोहित रोकाया, विनय राठी, मनोज ठाकुर, मोहम्मद हनीफ व योगेश शर्मा के खिलाफ केस दर्ज किया है। एसएसबी अस्पताल प्रबंधन का कहना है सभी आरोपी मरीज व उनके आश्रित के रूप में अस्पताल में आए थे।

ईएसआईसी अस्पताल में सुविधा न होने पर किया जाता है रेफर
कर्मचारी राज्य बीमा योजना के तहत बीमाकृत लोगों को इलाज मुफ्त में किया जाता है। इसके लिए एनआईटी तीन में मेडिकल कॉलेज, सेक्टर आठ में अस्पताल के अलावा सात डिस्पेंसरी भी हैं। यहां किसी कारणवश मरीज के इलाज के लिए सुविधा उपलब्ध नहीं होने की सूरत में मरीज के निजी अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। जो अस्पताल ईएसआईसी के पैनल पर होगा केवल वहीं पर मरीज को रेफर किया जाता है। निजी अस्पताल में आने वाले इलाज का सारा खर्च ईएसआईसी द्वारा भुगतान किया जाता है।

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