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पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर बिल्डर पर 10 करोड़ का जुर्माना
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फरीदाबाद। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के आरोप में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने ग्रेटर फरीदाबाद (सेक्टर-86) स्थित स्मार्ट हाउसिंग प्रोजेक्ट लिमिटेड पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि एक माह में जमा करानी होगी। एनजीटी ने राज्य सरकार व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कहा है कि स्मार्ट हाउसिंग प्रोजेक्ट लिमिटेड जब तक पर्यावरण के मानकों के अनुरूप कार्य नहीं करता है, तब तक उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाए।
इस मामले में मुकुंद धोटे नामक व्यक्ति ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया था कि स्मार्ट हाउसिंग प्रोजेक्ट लिमिटेड अपने वेस्टा हाइट्स प्रोजेक्ट में पर्यावरण संरक्षण कानून का उल्लंघन कर रहा है। याचिका में धोटे ने बताया कि बिल्डर द्वारा सोसायटी में लगाया गया सीवर ट्रीटमेंट प्लांट पर्याप्त क्षमता का नहीं है। सोसायटी से निकलने वाले सीवरेज को आगरा नहर में डाला जा रहा है। एनजीटी के आदेश पर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सोसायटी का निरीक्षण कर खामियों की रिपोर्ट तैयार की। निरीक्षण के दौरान बिल्डर जांच कमेटी को वहां न तो भूजल के दोहन संबंधी कोई एनओसी दिखा पाया और न ही वहां ग्रीन बेल्ट व बेसमेंट में पार्किंग की व्यवस्था टीम को मिली। रिपोर्ट में नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे जनरेटर व उनसे फैल रहे ध्वनि प्रदूषण की भी जानकारी दी गई।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल ने कहा कि पर्यावरण को किसी भी कीमत पर नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। बिल्डर द्वारा जानबूझ कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने को सख्ती से लिया जाना चाहिए। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्होंने जो बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई की है, वह पर्याप्त नहीं है। एनजीटी ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह इस तरह पर्यावरण एवं जन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले हाउसिंग प्रोजेक्ट पर निगाह रखने के लिए व्यवस्था बनाए। साथ ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि वह राज्य में इस तरह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले हाउसिंग प्रोजेक्टस का सर्वे कर इसकी रिपोर्ट तैयार करे।
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इस मामले में मुकुंद धोटे नामक व्यक्ति ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया था कि स्मार्ट हाउसिंग प्रोजेक्ट लिमिटेड अपने वेस्टा हाइट्स प्रोजेक्ट में पर्यावरण संरक्षण कानून का उल्लंघन कर रहा है। याचिका में धोटे ने बताया कि बिल्डर द्वारा सोसायटी में लगाया गया सीवर ट्रीटमेंट प्लांट पर्याप्त क्षमता का नहीं है। सोसायटी से निकलने वाले सीवरेज को आगरा नहर में डाला जा रहा है। एनजीटी के आदेश पर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सोसायटी का निरीक्षण कर खामियों की रिपोर्ट तैयार की। निरीक्षण के दौरान बिल्डर जांच कमेटी को वहां न तो भूजल के दोहन संबंधी कोई एनओसी दिखा पाया और न ही वहां ग्रीन बेल्ट व बेसमेंट में पार्किंग की व्यवस्था टीम को मिली। रिपोर्ट में नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे जनरेटर व उनसे फैल रहे ध्वनि प्रदूषण की भी जानकारी दी गई।
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एनजीटी के अध्यक्ष न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल ने कहा कि पर्यावरण को किसी भी कीमत पर नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। बिल्डर द्वारा जानबूझ कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने को सख्ती से लिया जाना चाहिए। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्होंने जो बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई की है, वह पर्याप्त नहीं है। एनजीटी ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह इस तरह पर्यावरण एवं जन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले हाउसिंग प्रोजेक्ट पर निगाह रखने के लिए व्यवस्था बनाए। साथ ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि वह राज्य में इस तरह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले हाउसिंग प्रोजेक्टस का सर्वे कर इसकी रिपोर्ट तैयार करे।
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