फरीदाबादः मरीज के कटे पैर का बनाया था तकिया, अब अस्पताल ने डॉक्टरों को दी क्लीन चिट
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ट्रेन से कटे पैर को पीड़ित के ही सिर के नीचे लगाने के मामले में बीके सिविल अस्पताल प्रशासन ने अपने डाक्टरों को क्लीन चिट दी है। अस्पताल प्रशासन ने मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने वाले निजी एंबुलेंस कर्मियों पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ दिया है।
उधर, दोनों पैर कटने के बाद भी ट्रामा सेंटर में मरीज की जान तो बच गई, लेकिन छह घंटे से अधिक समय बीत जाने के कारण उसके पैर नहीं जुड़ सके। विशेषज्ञ डाक्टरों का कहना है कि ऐसे मामलों में कटे हुए पैर को तुरंत बर्फ में रख देना चाहिए था। इसके बाद छह घंटे के भीतर ही ऑपरेशन सफल होने का चांस रहता है। इस मामले में इससे अधिक समय बीत जाने के कारण कटे पैरों को दोबारा से जोड़ा नहीं जा सका।
ज्ञात हो कि 22 अगस्त की शाम करीब साढ़े पांच बजे भूड कालोनी के रहने वाले प्रदीप नई दिल्ली से चेन्नई जा रही राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आ गए थे। बड़खल फ्लाईओवर के समीप हुई इस दुर्घटना में प्रदीप के दोनों पैर कट गए थे। उन्हें जीआरपी ने निजी एंबुलेंस से बीके सिविल अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचाया था। यहां मरीज के दोनों कटे हुए पैर को उसका तकिया बना दिया गया था।
जांच टीम कर रही ये दावा
इस मामले को लेकर सीएमओ डॉ. गुलशन अरोड़ा ने चार सदस्यीय टीम बना कर जांच शुरू की थी। सोमवार को सीएमओ व पीएमओ समेत टीम के सदस्यों ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी के फुटेज की जांच की।
जांच टीम के सदस्यों ने दावा किया है कि मरीज के कटे हुए पैरों को तकिया निजी एंबुलेंस कर्मियों ने बनाया था। अस्पताल के डाक्टरों ने उन्हें हटा कर मरीज को उपचार के लिए तुरंत ले गए थे। इसके बाद उन्हें दिल्ली ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया।
क्या कहती हैं पीएमओ
बीके सिविल अस्पताल की प्रधान चिकित्साधिकारी (पीएमओ) सविता यादव ने बताया कि सीएमओ की अगुवाई में जांच टीम बनाई गई थी। इस प्रकरण में अस्पताल में सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। फुटेज में मरीज को यहां तक लाने वाले निजी एंबुलेंस कर्मियों की गलती स्पष्ट हो रही है।