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Delhi NCR News: धूल प्रदूषण रोकने के लिए विशेषज्ञों ने सुझाए स्थायी समाधान
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इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में क्लीन एयर डायलॉग्स के दूसरे संस्करण का किया आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते धूल प्रदूषण को रोकने के लिए नियामक संस्थाओं, नगर निगम अधिकारियों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने आगे की कार्ययोजनाओं पर चर्चा की। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में सीएक्यूएम रिसोर्स लैब और राहगीरी फाउंडेशन की ओर से आयोजित ‘क्लीन एयर डायलॉग्स’ के दूसरे संस्करण के दौरान सड़कों और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल कम करने के लिए स्थायी और स्रोत-आधारित समाधानों पर जोर दिया।
राहगीरी फाउंडेशन की निदेशक (सिटीज एंड अर्बन लैंडस्केप्स) निधि मदान की अध्यक्षता में आयोजित चर्चा में विशेषज्ञों ने मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, वैज्ञानिक तरीकों से निर्माण और ध्वस्तीकरण (सीएंडडी) कचरे का प्रबंधन, नियमित सफाई व्यवस्था और सड़क किनारों के बेहतर डिजाइन जैसे उपायों पर जोर दिया।
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डेटा आधारित निगरानी प्रणाली से धूल प्रबंधन के नियम सुनिश्चित होंगे
सीएक्यूएम के तकनीकी सदस्य डॉ. एसडी अत्री ने बताया कि आयोग नगर निकायों और शहर प्रशासन की जवाबदेही तय करने के लिए डेटा आधारित निगरानी प्रणाली विकसित कर रहा है। इसके जरिए सड़कों और निर्माण स्थलों पर धूल प्रबंधन के नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं, एमसीडी के करोल बाग जोन के उपायुक्त दिलखुश मीणा ने बताया कि ‘डस्ट-फ्री रोड्स’ अभियान के तहत अब तक 112 मीट्रिक टन से अधिक जमा धूल हटाई जा चुकी है, 87 मीट्रिक टन मलबे का निस्तारण हो चुका है। इसके साथ ही 78 किलोमीटर सड़कों की सफाई की गई है।
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जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पैटर्न में बदलाव
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा कि धूल नियंत्रण और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की लागत को प्रत्येक बुनियादी ढांचा परियोजना की प्रारंभिक योजना और टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। वहीं, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के सुमित शर्मा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पैटर्न में बदलाव और लंबे सूखे की घटनाएं बढ़ रहीं हैं। ऐसे में एनसीआर में धूल प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए शहरी नियोजन में व्यापक बदलाव आवश्यक हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते धूल प्रदूषण को रोकने के लिए नियामक संस्थाओं, नगर निगम अधिकारियों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने आगे की कार्ययोजनाओं पर चर्चा की। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में सीएक्यूएम रिसोर्स लैब और राहगीरी फाउंडेशन की ओर से आयोजित ‘क्लीन एयर डायलॉग्स’ के दूसरे संस्करण के दौरान सड़कों और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल कम करने के लिए स्थायी और स्रोत-आधारित समाधानों पर जोर दिया।
राहगीरी फाउंडेशन की निदेशक (सिटीज एंड अर्बन लैंडस्केप्स) निधि मदान की अध्यक्षता में आयोजित चर्चा में विशेषज्ञों ने मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, वैज्ञानिक तरीकों से निर्माण और ध्वस्तीकरण (सीएंडडी) कचरे का प्रबंधन, नियमित सफाई व्यवस्था और सड़क किनारों के बेहतर डिजाइन जैसे उपायों पर जोर दिया।
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डेटा आधारित निगरानी प्रणाली से धूल प्रबंधन के नियम सुनिश्चित होंगे
सीएक्यूएम के तकनीकी सदस्य डॉ. एसडी अत्री ने बताया कि आयोग नगर निकायों और शहर प्रशासन की जवाबदेही तय करने के लिए डेटा आधारित निगरानी प्रणाली विकसित कर रहा है। इसके जरिए सड़कों और निर्माण स्थलों पर धूल प्रबंधन के नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं, एमसीडी के करोल बाग जोन के उपायुक्त दिलखुश मीणा ने बताया कि ‘डस्ट-फ्री रोड्स’ अभियान के तहत अब तक 112 मीट्रिक टन से अधिक जमा धूल हटाई जा चुकी है, 87 मीट्रिक टन मलबे का निस्तारण हो चुका है। इसके साथ ही 78 किलोमीटर सड़कों की सफाई की गई है।
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जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पैटर्न में बदलाव
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा कि धूल नियंत्रण और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की लागत को प्रत्येक बुनियादी ढांचा परियोजना की प्रारंभिक योजना और टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। वहीं, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के सुमित शर्मा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पैटर्न में बदलाव और लंबे सूखे की घटनाएं बढ़ रहीं हैं। ऐसे में एनसीआर में धूल प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए शहरी नियोजन में व्यापक बदलाव आवश्यक हैं।