बड़े गड्ढे हैं इस राह में... सुप्रीम कोर्ट के टिप्पणी के बाद भी नहीं सुधरे हालात
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अगर आप नोएडा की सड़कों से गुजरते हैं तो सावधान हो जाएं। बारिश ने शहर की सड़कों के जख्मों को नासूर बना दिया है। जिनकी चपेट में आकर आए दिन कोई न कोई अपनी जान गंवा रहा है या फिर घायल हो रहा है। सड़क के गड्ढों पर सुप्रीम कोर्ट पहले भी तल्ख टिप्पणी कर चुका है, लेकिन लापरवाह सिस्टम आंखें मूंदकर सोया हुआ है।
शुक्रवार को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों के गड्ढों की वजह से जिंदगी गंवाने वालों की संख्या पर हैरानी जताते हुए इसकी तुलना आतंकी हमलों में होने वाली मौतों से कर डाली। सुप्रीम कोर्ट ने गड्ढों की वजह से जान गंवाने वाले लोगों को मुआवजे का हकदार बताया है। सुप्रीम कोर्ट की इस प्रतिक्रिया को शहरवासियों ने सही बताया है, लेकिन कोर्ट के सख्त रवैये का नोएडा प्राधिकरण पर क्या असर पड़ेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
आंकड़े खोल रहे पोल
जिला पुलिस की रिपोर्ट के आंकड़े हैरान कर देने वाले हैं। साल 2017 में सड़कों के गड्ढों ने 45 जान ली थीं। मौजूदा वर्ष की छमाही में ही 200 लोग सड़क हादसों में जान गंवा चुके हैं। माना जा रहा है कि सड़कों की दुर्दशा की वजह से इनमें से कई लोगों ने जिंदगी गंवाई। हर साल सड़कों की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किया जाता है, लेकिन सड़कों पर लापरवाही के सबूत फिर भी छोड़ दिए जाते हैं।
(सभी फोटोज- लाल सिंह, अमर उजाला, नोएडा)
सर्वे में 17.8 किलोमीटर सड़के खराब
मास्टर प्लान रोड नंबर-1, 2 व 3 के अलावा डीएससी रोड, उद्योग मार्ग, एक्सप्रेसवे, एफएनजी पर सर्वे किया गया था। सर्वे के दौरान 17.8 किलोमीटर लंबी सड़कों की हालत जर्जर पाई गई थी। इन सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का दावा किया गया था, लेकिन लीपापोती के अलावा कुछ नहीं किया गया। सड़कों की हालत आज भी बद से बदतर बनी हुई है।
टूटी सड़कें बन रहीं हैं जाम का कारण
शहर में जाम आम बात हो गई है। इसकी एक बड़ी वजह टूटी सड़कें हैं। जर्जर सड़कें और गड्ढों के कारण लोगों की गाड़ियों में ब्रेक लग जाता है। लोग गड्ढों में भरे पानी को देखकर थोड़ी देर सोचते हैं कि इसे पार करूं या न करूं। इतने में ही लंबी लाइन लग जाती है। शनिवार को बारिश के दौरान कुछ ऐसा ही नजारा दिखा।
आंकड़ों की जुबानी लापरवाही की कहानी
- 419 लोगों ने गंवाई पिछले वर्ष सड़क हादसों में जान
- 74 सड़क हादसे सड़कों पर गड्ढों की वजह से हुए
- 45 लोगों की जिंदगी सड़कों के गड्ढों ने लील ली
- 121 हादसे सड़कों पर कंस्ट्रक्शन के दौरान हुए
- 65 लोगों की जान सड़क कंस्ट्रक्शन के दौरान गई
- 164 सड़क हादसे बारिश के मौसम के दौरान हुए
(नोट: आंकड़े जिला पुलिस की 2017 की रिपोर्ट पर आधारित)
मौसम हादसे मौत
बारिश 215 84
कोहरा 191 83
अन्य 637 252
पहले सड़क पर पानी निकासी की व्यवस्था हो। वरना आज बनाओ कल टूट जाएगी। एक ही सड़क कई बार बनाकर कमाई के चक्कर में अधिकारी पानी निकासी की व्यवस्था नहीं करते। - सर्वेश अग्रवाल, सिविल इंजीनियर
प्रदेश का शो विंडो कहे जाने वाले नोएडा की स्थिति भी बिगड़ रही है। खस्ताहाल सड़कों पर चलना मुश्किल है। प्राधिकरण जिम्मेदारी से बचता है और जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं देते। -सुधीर श्रीवास्तव, प्रवक्ता-एनईए
सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाली सामग्री की जांच की जानी चाहिए। तय समयसीमा से पहले यदि सड़क जर्जर हो जाए तो ठेकेदार पर जुर्माना ही नहीं, बल्कि एफआईआर होनी चाहिए। -डॉ. सीबी झा, अध्यक्ष-अट्टा मार्केट व्यापारी एसोसिएशन