फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Even Supreme Court remarks the situation of the roads but not improving

बड़े गड्ढे हैं इस राह में... सुप्रीम कोर्ट के टिप्पणी के बाद भी नहीं सुधरे हालात

Sun, 22 Jul 2018 04:01 AM IST
योगेश शर्मा, अमर उजाला, नोएडा
योगेश शर्मा, अमर उजाला, नोएडा Updated Sun, 22 Jul 2018 04:01 AM IST
विज्ञापन
Even Supreme Court remarks the situation of the roads but not improving
noida road - फोटो : lal singh

अगर आप नोएडा की सड़कों से गुजरते हैं तो सावधान हो जाएं। बारिश ने शहर की सड़कों के जख्मों को नासूर बना दिया है। जिनकी चपेट में आकर आए दिन कोई न कोई अपनी जान गंवा रहा है या फिर घायल हो रहा है। सड़क के गड्ढों पर सुप्रीम कोर्ट पहले भी तल्ख टिप्पणी कर चुका है, लेकिन लापरवाह सिस्टम आंखें मूंदकर सोया हुआ है।

विज्ञापन


शुक्रवार को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों के गड्ढों की वजह से जिंदगी गंवाने वालों की संख्या पर हैरानी जताते हुए इसकी तुलना आतंकी हमलों में होने वाली मौतों से कर डाली। सुप्रीम कोर्ट ने गड्ढों की वजह से जान गंवाने वाले लोगों को मुआवजे का हकदार बताया है। सुप्रीम कोर्ट की इस प्रतिक्रिया को शहरवासियों ने सही बताया है, लेकिन कोर्ट के सख्त रवैये का नोएडा प्राधिकरण पर क्या असर पड़ेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
विज्ञापन


आंकड़े खोल रहे पोल
जिला पुलिस की रिपोर्ट के आंकड़े हैरान कर देने वाले हैं। साल 2017 में सड़कों के गड्ढों ने 45 जान ली थीं। मौजूदा वर्ष की छमाही में ही 200 लोग सड़क हादसों में जान गंवा चुके हैं। माना जा रहा है कि सड़कों की दुर्दशा की वजह से इनमें से कई लोगों ने जिंदगी गंवाई। हर साल सड़कों की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किया जाता है, लेकिन सड़कों पर लापरवाही के सबूत फिर भी छोड़ दिए जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



(सभी फोटोज- लाल सिंह, अमर उजाला, नोएडा)

Even Supreme Court remarks the situation of the roads but not improving
noida road - फोटो : lal singh

सर्वे में 17.8 किलोमीटर सड़के खराब
मास्टर प्लान रोड नंबर-1, 2 व 3 के अलावा डीएससी रोड, उद्योग मार्ग, एक्सप्रेसवे, एफएनजी पर सर्वे किया गया था। सर्वे के दौरान 17.8 किलोमीटर लंबी सड़कों की हालत जर्जर पाई गई थी। इन सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का दावा किया गया था, लेकिन लीपापोती के अलावा कुछ नहीं किया गया। सड़कों की हालत आज भी बद से बदतर बनी हुई है।

टूटी सड़कें बन रहीं हैं जाम का कारण
शहर में जाम आम बात हो गई है। इसकी एक बड़ी वजह टूटी सड़कें हैं। जर्जर सड़कें और गड्ढों के कारण लोगों की गाड़ियों में ब्रेक लग जाता है। लोग गड्ढों में भरे पानी को देखकर थोड़ी देर सोचते हैं कि इसे पार करूं या न करूं। इतने में ही लंबी लाइन लग जाती है। शनिवार को बारिश के दौरान कुछ ऐसा ही नजारा दिखा।

आंकड़ों की जुबानी लापरवाही की कहानी
- 419 लोगों ने गंवाई पिछले वर्ष सड़क हादसों में जान
- 74 सड़क हादसे सड़कों पर गड्ढों की वजह से हुए
- 45 लोगों की जिंदगी सड़कों के गड्ढों ने लील ली
- 121 हादसे सड़कों पर कंस्ट्रक्शन के दौरान हुए
- 65 लोगों की जान सड़क कंस्ट्रक्शन के दौरान गई
- 164 सड़क हादसे बारिश के मौसम के दौरान हुए
(नोट: आंकड़े जिला पुलिस की 2017 की रिपोर्ट पर आधारित)

Even Supreme Court remarks the situation of the roads but not improving
noida road - फोटो : lal singh
किस मौसम में कितने हादसे

मौसम        हादसे        मौत
बारिश        215        84
कोहरा        191        83
अन्य        637        252
 

पहले सड़क पर पानी निकासी की व्यवस्था हो। वरना आज बनाओ कल टूट जाएगी। एक ही सड़क कई बार बनाकर कमाई के चक्कर में अधिकारी पानी निकासी की व्यवस्था नहीं करते। - सर्वेश अग्रवाल, सिविल इंजीनियर

प्रदेश का शो विंडो कहे जाने वाले नोएडा की स्थिति भी बिगड़ रही है। खस्ताहाल सड़कों पर चलना मुश्किल है। प्राधिकरण जिम्मेदारी से बचता है और जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं देते। -सुधीर श्रीवास्तव, प्रवक्ता-एनईए

सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाली सामग्री की जांच की जानी चाहिए। तय समयसीमा से पहले यदि सड़क जर्जर हो जाए तो ठेकेदार पर जुर्माना ही नहीं, बल्कि एफआईआर होनी चाहिए। -डॉ. सीबी झा, अध्यक्ष-अट्टा मार्केट व्यापारी एसोसिएशन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed