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इनके हौसलों को सलाम लेकिन रुला देने वाली हैं इनकी कहानियां

Tue, 03 Mar 2015 01:29 AM IST
Updated Tue, 03 Mar 2015 01:29 AM IST
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Even if you are strong but their stories to cry freshly

बेशक पड़ोसी ने मेरे चेहरे पर तेजाब फेंककर अपनी घटिया सोच का परिचय दिया, लेकिन इससे मेरे सपने और खूबसूरत हो गए। अब मैं महिलाओं के लिए कुछ खास कर सकती हूं, जो कि एयरहोस्टेस बनकर नहीं कर पाती। किसी एक की घृणा ने मेरे चेहरे को बदरंग बना दिया है, लेकिन मैंने ब्यूटीशियन का पेशा अपनाते हुए दूसरों को खूबसूरत बनाने का जिम्मा उठाया है।

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गाजियाबाद, लाल कुआं निवासी 29 वर्षीय सोनिया ने बताया, ‘वर्ष 2004 में महज एक फोन के चलते मेरे पड़ोसी ने चेहरे पर तेजाब फेंक दिया। वजह, मैंने उससे एक मोबाइल खरीदा था, जोकि चोरी का था और पुलिस जांच में उसका नाम बता दिया था।’ सोनिया सोमवार को दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने पहुंची थीं।
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अमर उजाला से अपनी बात साझा करते हुए सोनिया कहती हैं, ‘दुनिया बेहद सुंदर है। दुनिया बेशक दिमाग से चलती है, लेकिन मैं दिल से, क्योंकि दिल के चलते ही दुनिया की खूबसूरती को देख व समझ सकती हूं।’
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आत्मविश्वास से भरती हूं महिलाओं संग फर्राटा: ओमकारी

Even if you are strong but their stories to cry freshly

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स ने पांच महिलाओं को उनके आत्मविश्वास और हौसले के लिए सम्मानित किया। इस मौके पर सोनिया चौधरी के अलावा ब्रेस्ट कैंसर को मात देने वाली रजनी भगत अरोड़ा, वुमन कैब ड्राइवर ओमकारी, घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने वाली अन्ना मैरी लॉपस और बेघरों को घर देने वाली अंजना राजागोपालन को भी सम्मानित किया गया।


दक्षिणी दिल्ली की कैब ड्राइवर ओमकारी (35) पिछले एक वर्ष से पुरुषों के क्षेत्र में अपनी रफ्तार से महिलाओं को सुरक्षित सफर का अहसास करवा रही हैं। घर चलाने के लिए यह कदम उठाया।

हालांकि उस वक्त परिवार का विरोध सहना पड़ा। अधिक पढ़ी-लिखी नहीं थी, इसलिए अच्छी नौकरी नहीं मिल सकती थी, लेकिन हौसले और निडरता के चलते अपने सपने को पूरा किया और आज परिवार भी साथ हैं।

घरेलू हिंसा समाज की घटिया सोच : अन्ना

Even if you are strong but their stories to cry freshly

मूल रूप से यूनाइटेड अरब अमीरात की अन्ना मेरी लॉपस (28) कहती हैं कि घरेलू हिंसा बंद कमरे की कहानी नहीं, बल्कि समाज की घटिया सोच है। महिला के आत्मसम्मान को चोट पहुंचाने का किसी को भी अधिकार नहीं। मेरे पहले पति ने जबरन शारीरिक शोषण किया, जोकि मुझे मंजूर नहीं था। आवाज उठाई और अब दिल्ली में मैत्री के माध्यम से लिंग अनुपात संग घरेलू हिंसा और शारीरिक शोषण की शिकार महिलाओं की आजादी के लिए काम कर रही हूं।

सभ्य समाज व नागरिक की सोच बढ़े : अंजना
जिनका कोई नहीं, उनका साईं होता है। कुछ ऐसी ही सोच के साथ मैंने ऐसे बच्चों को जोड़ा, ताकि वे समाज के सभ्य नागरिक बनकर दूसरों के कल्याण में सहयोग दें। अगर हम एक भी बच्चे को सभ्य नागरिक बनाने का जिम्मा उठाते हैं तो फिर समाज से कोई शिकायत या दिक्कत ही नहीं रहेगी। हमारा कर्तव्य बनता है कि हर बच्चे को संस्कार और अच्छी परवरिश दी जाए।

जीवन दायिनी को बचाने का प्रयास : रजनी
देश में महिलाएं ब्रेस्ट और ओवरी कैंसर की चपेट में हैं। जागरूकता के अभाव जब तक उन्हें पता चलता है, देर हो जाती है। 12 साल पहले मुझे मेरे परिवार ने तो साथ दिया पर अपनों के नाउम्मीद भरे शब्दों ने रुलाया। आज मैं महिलाओं को जागरूक कर रही हूं ताकि जीवन दायिनी जागरूकता के अभाव में कहीं जीवन से हाथ न धो बैठे।

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